ओडिशा विधानसभा में पाठ्यपुस्तक की गलतियों पर हंगामा, BJD ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा; सदन 4 बजे तक स्थगित

ओडिशा विधानसभा में पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों पर BJD ने मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा मांगा। कांग्रेस ने MMDR कानून का विरोध किया और सदन 4 बजे तक स्थगित हुआ

ओडिशा विधानसभा में स्कूल पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों और खनन कानून को लेकर BJD-कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया। BJD ने शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा मांगा, जबकि कांग्रेस ने MMDR कानून वापस लेने की मांग की। सदन शाम 4 बजे तक स्थगित हुआ।

भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार, 23 सितंबर को स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों और नए खनन कानून को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। बीजू जनता दल (BJD) के विधायकों ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की, जबकि कांग्रेस विधायकों ने Mines and Minerals (Development and Regulation) यानी MMDR कानून में किए गए बदलावों को वापस लेने की मांग उठाई। विरोध के बीच सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट बाद ही शाम 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष का प्रदर्शन

ओडिशा विधानसभा में बुधवार सुबह 10:30 बजे प्रश्नकाल के साथ कार्यवाही शुरू हुई। इसके तुरंत बाद BJD और कांग्रेस के विधायक हाथों में तख्तियां लेकर सदन के वेल में पहुंच गए।

विपक्षी विधायकों ने स्पीकर के आसन के पास प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। BJD का मुख्य मुद्दा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई त्रुटियां थीं। पार्टी ने इसके लिए स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग की।

दूसरी ओर कांग्रेस विधायकों ने नए खनन कानून का मुद्दा उठाया। कांग्रेस की मांग है कि MMDR कानून में किए गए बदलावों को वापस लिया जाए।

रिपोर्टर्स टेबल पर चढ़े कुछ विधायक

विरोध के दौरान विधानसभा में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। कुछ विपक्षी विधायक रिपोर्टर्स टेबल पर खड़े हो गए, जबकि कुछ ने स्पीकर के आसन की ओर बढ़ने और उस पर चढ़ने की कोशिश की।

इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर बैठे रहे, जबकि विपक्षी विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। सदन में लगातार सरकार विरोधी नारे सुनाई देते रहे।

कार्यवाही की अध्यक्षता उस समय डिप्टी स्पीकर भवानी शंकर भोई कर रहे थे। उन्होंने विपक्षी विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा।

मंत्री के जवाब के दौरान और बढ़ा विरोध

सदन में हंगामा उस समय और बढ़ गया जब डिप्टी स्पीकर ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री केसी पात्रा को विपक्षी सदस्यों के सवालों का जवाब देने की अनुमति दी।

विपक्षी विधायक उस समय भी वेल में मौजूद रहे और नारेबाजी करते रहे। डिप्टी स्पीकर ने सदस्यों को शांत कराने और अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया, लेकिन इसका तत्काल असर नहीं हुआ।

इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे चलाना मुश्किल हो गया। आखिरकार डिप्टी स्पीकर ने विधानसभा को शाम 4 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट बाद ही स्थगन की स्थिति बन गई।

BJD क्यों मांग रही नित्यानंद गोंड का इस्तीफा?

ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों का विवाद पिछले कुछ समय से जारी है। BJD और कांग्रेस इससे पहले भी स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर चुके हैं।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आई हैं और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। जुलाई में भी BJD और कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए गोंड से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की थी।

ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं। बुधवार को विधानसभा में BJD ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।

विधानसभा से महात्मा गांधी मार्ग पहुंचे BJD विधायक

सदन स्थगित होने के बाद BJD विधायक विधानसभा से निकलकर भुवनेश्वर के महात्मा गांधी मार्ग पहुंचे।

वहां पार्टी के युवा और छात्र संगठनों की ओर से पाठ्यपुस्तक विवाद को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। BJD विधायकों ने इस प्रदर्शन में शामिल होकर नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग दोहराई।

इससे साफ है कि BJD इस मुद्दे को केवल विधानसभा के भीतर ही नहीं बल्कि बाहर भी उठा रही है।

मानसून सत्र के पहले दिन भी हुआ था हंगामा

बुधवार का हंगामा मानसून सत्र में लगातार दूसरे दिन देखने को मिला। मंगलवार को सत्र के पहले दिन भी BJD और कांग्रेस के विधायकों ने इन्हीं दो प्रमुख मुद्दों को लेकर विरोध किया था।

पहले दिन सदन ने पूर्व सदस्यों और नेपाल में हाल की अचानक आई बाढ़ के पीड़ितों के लिए शोक प्रस्ताव के साथ कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए थे।

BJD ने पाठ्यपुस्तकों की गलतियों का मामला उठाया, जबकि कांग्रेस ने MMDR Amendment Act का विरोध किया। हंगामे के कारण स्पीकर सुरमा पाढ़ी को सदन स्थगित करना पड़ा था।

इस तरह मानसून सत्र के शुरुआती दोनों दिनों में विपक्ष के विरोध का असर विधानसभा की नियमित कार्यवाही पर पड़ा है।

कांग्रेस ने खनन कानून को बनाया मुद्दा

जहां BJD ने पाठ्यपुस्तक विवाद को प्रमुखता दी, वहीं कांग्रेस नए खनन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रही है।

खनिज संसाधनों के लिहाज से ओडिशा भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। MMDR कानून में बदलाव को लेकर राज्य में पहले से राजनीतिक विवाद चल रहा है।

BJD अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी संशोधनों का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि नया कानून खनिज संसाधनों पर राज्य के वित्तीय अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। केंद्र और कानून के समर्थकों का रुख अलग है और वे खनिज-समृद्ध भूमि पर कई स्तर के करों को औद्योगिक पारिस्थितिकी के लिए नुकसानदेह बताते हैं।

कांग्रेस ने बुधवार को इसी कानून को वापस लेने की मांग को लेकर विधानसभा में प्रदर्शन किया।

खनन कानून पर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?

MMDR संशोधन कानून 2026 के पारित होने के बाद से ओडिशा में इस पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी दल इसे राज्य के वित्तीय और संघीय अधिकारों से जोड़ रहे हैं।

BJD ने दावा किया है कि कानून से ओडिशा को सालाना राजस्व नुकसान हो सकता है। यह BJD का आकलन है और राज्य तथा केंद्र की सत्तारूढ़ BJP इससे सहमत नहीं है। BJP की ओर से तर्क दिया गया है कि खनिज वाली भूमि पर मनमाने और कई स्तर के शुल्क राज्य के औद्योगिक माहौल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इस वजह से विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में खनन कानून भी सरकार और विपक्ष के बीच प्रमुख टकराव के मुद्दों में शामिल हो गया है।

पाठ्यपुस्तक विवाद भी बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

स्कूली किताबों में त्रुटियों का मुद्दा शिक्षा से जुड़ा होने के कारण सीधे विद्यार्थियों और अभिभावकों से संबंधित है। विपक्ष इसी आधार पर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है।

BJD ने आरोप लगाया है कि गलतियों का दायरा गंभीर है और इसके लिए संबंधित मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जुलाई में BJD प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा था कि किताबों की गलतियों से हजारों विद्यार्थी प्रभावित हुए और शैक्षणिक सत्र की प्रगति बाधित हुई। यह BJD का आरोप था।

बुधवार के प्रदर्शन से स्पष्ट हुआ कि पार्टी मानसून सत्र में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।

सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण मानसून सत्र

ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए मानसून सत्र के शुरुआती दो दिन लगातार विपक्षी विरोध से प्रभावित रहे हैं।

एक तरफ BJD पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों को लेकर स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस MMDR कानून में बदलाव को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है।

बुधवार को सदन के भीतर विरोध इतना बढ़ा कि प्रश्नकाल भी सुचारू रूप से नहीं चल सका और कार्यवाही कुछ ही मिनट में शाम 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि विधानसभा की आगे की कार्यवाही में सरकार इन मुद्दों पर किस तरह जवाब देती है और विपक्ष अपना विरोध किस रूप में जारी रखता है। फिलहाल मानसून सत्र के शुरुआती चरण में पाठ्यपुस्तक विवाद और खनन कानून दो प्रमुख राजनीतिक मुद्दों के रूप में उभरे हैं।

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