उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा और उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। ओवैसी ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए पूछा कि अखिलेश यादव के सत्ता में रहने के दौरान कितने दंगे हुए। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के उद्देश्य से विपक्षी दलों के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा।
ओवैसी रविवार को कानपुर के कैंट क्षेत्र स्थित बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर AIMIM की रणनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उन दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है, जो उत्तर प्रदेश में भाजपा को दोबारा सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं। ओवैसी के मुताबिक, अगर विपक्षी दल इस उद्देश्य को लेकर साथ आना चाहते हैं तो AIMIM उनसे बातचीत करने के लिए तैयार है।
ओवैसी ने अपने भाषण में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर कहा कि चुनाव के समय ‘अखिलेश भैया आ रहे हैं’ जैसे नारे सुनाई देते हैं। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि जब अखिलेश यादव सत्ता में आए थे तो उस दौरान कितने दंगे हुए थे। इस बयान के बाद उन्होंने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख किया और कहा कि उस घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और गांवों से विस्थापित हुए थे। करीब 50 हजार लोगों के विस्थापन का आंकड़ा उन्होंने अपने भाषण में बताया।
मुजफ्फरनगर में अगस्त-सितंबर 2013 के दौरान सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। ओवैसी ने अपने भाषण में इस घटना को अखिलेश यादव के तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यकाल से जोड़ते हुए सपा पर राजनीतिक सवाल उठाए। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ओवैसी का यह बयान एक राजनीतिक आरोप और भाषण का हिस्सा है; इसे इस रूप में नहीं लिखा जा सकता कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी या किसी सरकार की कानूनी दोषसिद्धि इससे स्वतः साबित होती है।
ओवैसी ने इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक मुद्दों तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों को वोट देने वाले लोगों को अपने विकास, शिक्षा और प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल भी पूछने चाहिए। उन्होंने AIMIM की राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की अपील करते हुए विधानसभा में समुदाय की आवाज होने की बात कही।
जनसभा के दौरान ओवैसी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पार्टी की तैयारी का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि AIMIM ने अभी उत्तर प्रदेश में सीटों की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है और संगठन को जिलेवार मजबूत करने का काम किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने गठबंधन को लेकर कहा कि जो दल भाजपा को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ बातचीत कर सकते हैं।
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी संभावित गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार करेगी और उसके बाद गठबंधन होने की स्थिति में घोषणा की जाएगी। इसका मतलब यह है कि फिलहाल उनके बयान को किसी अंतिम गठबंधन की घोषणा के रूप में नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में किसी विशिष्ट दल के साथ सीट बंटवारे या औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
ओवैसी ने अपने भाषण में बिहार विधानसभा चुनाव का भी संदर्भ दिया। उन्होंने दावा किया कि बिहार चुनाव से पहले AIMIM ने राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, CPI और अन्य वामपंथी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर गठबंधन के तहत छह सीटों पर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उनकी पेशकश स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने कहा कि उन पर इसके बजाय आरोप लगाए गए। यह दावा ओवैसी द्वारा अपने भाषण में रखा गया राजनीतिक पक्ष है।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी आगे है और विभिन्न दल अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। AIMIM पहले भी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ चुकी है और ओवैसी लगातार राज्य में पार्टी का संगठन विस्तार करने की बात करते रहे हैं। इस बार उनके ताजा बयान का केंद्र गठबंधन की संभावना और विपक्षी दलों के साथ बातचीत रहा है।
ओवैसी ने अपने भाषण में भाजपा सरकार की नीतियों और उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मदरसों, रोजगार और कुछ प्रशासनिक कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए सरकार की आलोचना की। उनके इन बयानों को भी राजनीतिक आरोप और विपक्षी नेता के वक्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए। संबंधित मुद्दों पर सरकार या अन्य राजनीतिक दलों का पक्ष अलग हो सकता है।
उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी का भी उल्लेख किया और कहा कि राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद वह उनसे बातचीत करते हैं। ओवैसी ने जयंत चौधरी के भाजपा के साथ जाने को लेकर उनसे बातचीत का जिक्र किया और कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं। यह टिप्पणी भी उनके कानपुर भाषण का हिस्सा थी।
यूपी की राजनीति में AIMIM का यह गठबंधन प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन दलों के बीच औपचारिक गठबंधन होगा। ओवैसी ने अपनी ओर से गठबंधन के लिए दरवाजा खुला रखने की बात कही है और 2 अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट करने का संकेत दिया है।
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और AIMIM के बीच राजनीतिक मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। ताजा बयान में ओवैसी ने सीधे अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल और मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र किया। दूसरी ओर, गठबंधन के सवाल पर उन्होंने विपक्षी दलों से बातचीत की पेशकश की है। इसलिए उनके बयान में एक तरफ सपा पर राजनीतिक हमला और दूसरी तरफ व्यापक विपक्षी गठबंधन के लिए बातचीत का प्रस्ताव दोनों पहलू दिखाई देते हैं।
फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए किसी अंतिम गठबंधन की तस्वीर सामने नहीं आई है। AIMIM ने गठबंधन को लेकर अपना प्रस्ताव रखा है और 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात कही है। आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दल इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इससे राज्य में संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।












