बेंगलुरु में 16 मई को PanIIT समिट 2026 का उद्घाटन राज्यपाल थावरचंद गहलोत करेंगे। इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक और स्टार्टअप इनोवेशन पर चर्चा होगी, जिसमें देश-विदेश से 2000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
बेंगलुरु: भारत के तकनीकी और नवाचार क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में माने जा रहे “PanIIT Bangalore Summit 2026” का उद्घाटन 16 मई को बेंगलुरु के ताज यशवंतपुर में किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के राज्यपाल Thawar Chand Gehlot करेंगे।
यह समिट भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में नेतृत्व को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन को कर्नाटक सरकार के सहयोग से प्रस्तुत किया गया है और इसका संयोजन PanIIT Alumni India Association द्वारा किया जा रहा है।
2,000 से अधिक प्रतिनिधियों की वैश्विक भागीदारी
आयोजकों के अनुसार इस दो दिवसीय समिट में भारत और विदेशों से 2,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें 250 से अधिक स्टार्टअप फाउंडर्स, 120 निवेशक (Investors) और दुनिया भर के IIT एलुमनी नेटवर्क के सदस्य शामिल हैं।
यह नेटवर्क 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के 5 लाख से अधिक पूर्व छात्रों को जोड़ता है, जो वैश्विक तकनीकी और नवाचार इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस आयोजन का उद्देश्य स्टार्टअप्स, निवेशकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया जा सके।
“Sovereignty in Technology” थीम पर केंद्रित समिट
इस वर्ष के समिट की मुख्य थीम “Sovereignty in Technology” यानी “प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता और संप्रभुता” रखी गई है। इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की भूमिका पर फोकस करना है।
आयोजकों के अनुसार भारत वर्तमान में दुनिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टैलेंट पूल में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान देता है, लेकिन रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर देश का खर्च GDP का केवल 0.7 प्रतिशत के आसपास है। यह अंतर भारत की प्रतिभा क्षमता और तकनीकी स्वामित्व के बीच एक महत्वपूर्ण गैप को दर्शाता है।
समिट का मुख्य फोकस इस गैप को कम करने और भारत को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा।
बेंगलुरु: भारत की टेक क्रांति का केंद्र
समिट में बेंगलुरु और कर्नाटक को भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। बेंगलुरु का विकास एक ऐसे शहर के रूप में हुआ है, जहां पहले सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाएं जैसे HAL, DRDO, BHEL और NAL स्थित थीं।

समय के साथ यह शहर भारत की आईटी इंडस्ट्री और स्टार्टअप इकोसिस्टम का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। आज बेंगलुरु को भारत का “सिलिकॉन वैली” भी कहा जाता है।
आयोजकों के अनुसार, शहर अब अपने विकास के “पांचवें चरण” में प्रवेश कर चुका है, जहां फोकस डीप टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैज्ञानिक अनुसंधान पर है।
डीप टेक और AI पर वैश्विक चर्चा
दो दिवसीय इस समिट में कई उच्च स्तरीय सत्र (plenary sessions), पैनल चर्चाएं और विशेष ट्रैक शामिल होंगे। इनमें मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों पर चर्चा होगी:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग
- सेमीकंडक्टर तकनीक और हार्डवेयर नवाचार
- रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology)
- ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकें
- मोबिलिटी और स्मार्ट ट्रांसपोर्
- स्वास्थ्य (Healthcare) और बायोटेक इनोवेशन
इन सभी क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए बड़ा मंच
इस समिट का एक प्रमुख आकर्षण “पिच-ए-थॉन” (Pitch-a-thon) होगा, जहां स्टार्टअप्स अपने इनोवेटिव आइडियाज को सीधे निवेशकों के सामने प्रस्तुत करेंगे।
यह मंच युवा उद्यमियों को वैश्विक निवेशकों और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। आयोजकों का मानना है कि इससे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी और फंडिंग के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
कर्नाटक सरकार की भूमिका और तकनीकी नेतृत्व
यह समिट कर्नाटक सरकार के समर्थन से आयोजित किया जा रहा है, जो राज्य को तकनीकी नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बेंगलुरु पहले से ही भारत के सबसे बड़े टेक हब के रूप में जाना जाता है, जहां हजारों स्टार्टअप्स और वैश्विक टेक कंपनियां कार्यरत हैं। सरकार का उद्देश्य इस स्थिति को और मजबूत करना और डीप टेक इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
भारत के AI और डीप टेक भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समिट भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में एक मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक्नोलॉजी आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेंगे।
भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अनुसंधान और तकनीकी स्वामित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इस समिट का उद्देश्य इसी दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है।












