कृषि मंत्री Kirodi Lal Meena ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पांचना बांध से नहरों में तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है। उन्होंने हाईकोर्ट आदेशों का पालन कर किसानों की समस्या जल्द हल करने की अपील की है।
जयपुर: राजस्थान में पांचना बांध से जुड़े जल विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर तत्काल नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो उन्हें “मजबूरन कुछ कदम उठाने पड़ सकते हैं”। यह मुद्दा अब न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि किसानों और स्थानीय समुदायों के बीच भी गंभीर तनाव का कारण बनता जा रहा है।
कैचमेंट और कमांड एरिया के बीच टकराव, समाधान की मांग
अपने पत्र में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि कैचमेंट एरिया और कमांड एरिया के लोगों के बीच बातचीत कर तत्काल समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि सवाईमाधोपुर के खंडीप गांव में नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर लंबे समय से धरना चल रहा है। धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद उन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी कृषि व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
20 साल से पानी संकट, किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का दावा
किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में दावा किया है कि वर्ष 2006 से पांचना बांध का पानी कमांड एरिया के किसानों तक नहीं पहुंच रहा है। इसके कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है और ग्रामीणों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने बताया कि करौली जिले के 35 गांवों की लगभग 40 हजार बीघा जमीन प्रभावित है, जिससे करीब 1.25 लाख लोगों को हर साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर किसानों को अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
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हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद अनुपालन न होने का आरोप
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर है। पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने कई बार पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब तक उनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। 8 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सिंचाई प्रणाली के माध्यम से नहरों में पानी छोड़ा जाए और किसी भी प्रकार की बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ता गया।
अवमानना याचिका और बढ़ता कानूनी दबाव
जानकारी के अनुसार, आदेशों का पालन न होने पर ग्रामोत्थान संस्थान पीलोदा द्वारा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। 23 अप्रैल 2026 को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि चार साल बीत जाने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया है। कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से पानी छोड़ने और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
स्थानीय विरोध और दोहरी मांगों का संकट
पांचना डैम क्षेत्र में स्थिति और जटिल हो गई है क्योंकि स्थानीय ग्रामीणों ने भी अलग मांगें रखी हैं। आसपास के 39 गांवों के लोग पहले अपने क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। इन गांवों की भौगोलिक स्थिति ऊंचाई पर होने के कारण ग्रेविटी फ्लो से पानी पहुंचाना संभव नहीं है, जिसके चलते सरकार ने लिफ्ट सिंचाई योजना तैयार की है।
लिफ्ट परियोजना और सरकारी प्रयास
सरकार की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए 200 एमसीएफटी क्षमता की लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर काम किया जा रहा है, जिससे 13 गांवों की लगभग 1973 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा पांचना बांध और नहरों के पुनर्वास के लिए 11.46 करोड़ रुपये की योजना भी लागू की जा रही है। राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान भी किया है।
किसानों की स्थिति और सामाजिक प्रभाव
पानी की कमी के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के साथ-साथ बेरोजगारी और पलायन की समस्या भी बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन घटने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।









