भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले, 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी से प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि दी।
नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले, 14 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर 1947 के भारत विभाजन से प्रभावित लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने उस दौर की पीड़ा, विस्थापन और मानवीय त्रासदी को याद करते हुए कहा कि देश के बंटवारे ने असंख्य परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए संदेश में विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेली गई कठिनाइयों को याद किया। उन्होंने उन परिवारों को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें हिंसा, पलायन और अपनों से बिछड़ने जैसी असाधारण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास का वह दौर बेहद भयावह और पीड़ादायक था, जिसकी त्रासदी ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए।
1947 के विभाजन ने बदल दी लाखों लोगों की जिंदगी
भारत का विभाजन आधुनिक दक्षिण एशिया के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में शामिल रहा है। वर्ष 1947 में ब्रिटिश शासन की समाप्ति के साथ भारत और पाकिस्तान दो अलग देशों के रूप में अस्तित्व में आए। इस राजनीतिक विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर लोगों को अपने घर, गांव और पुश्तैनी जमीन छोड़कर नई सीमाओं के दूसरी ओर जाना पड़ा।
विभाजन के दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए और अनेक परिवार बिछड़ गए। हिंसा और असुरक्षा के माहौल ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। कई लोगों ने अपने प्रियजनों, घरों और वर्षों से बसे सामाजिक परिवेश को खो दिया। यह अनुभव केवल भौगोलिक सीमाओं के बदलने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने पीढ़ियों तक परिवारों की स्मृतियों और जीवन को प्रभावित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसी दर्दनाक दौर को याद करते हुए कहा कि अनगिनत लोगों को अपनी जड़ों से दूर होना पड़ा और अकल्पनीय कष्टों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, उस समय आम परिवारों ने जो पीड़ा झेली, उसकी कल्पना करना भी कठिन है।

'मुश्किलों के बावजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी'
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विभाजन के बाद विस्थापित लोगों के साहस और संघर्ष को भी विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी प्रभावित लोगों ने जीवन से हार नहीं मानी। अनेक परिवारों ने नए स्थानों पर पहुंचकर लगभग शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और मेहनत, धैर्य तथा संघर्ष के बल पर नई शुरुआत की। समय के साथ इन लोगों ने अपने परिवारों को फिर से संभाला और देश के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों की जीवन यात्राएं मानवीय दृढ़ता और साहस की मिसाल हैं। बेहद कठिन परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ने की उनकी क्षमता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर देशवासियों से आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास की इस त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत के दर्द को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना भी है।उन्होंने लोगों से एकता, मेल-मिलाप और सद्भाव को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, देश की ताकत उसकी विविधता और लोगों के बीच आपसी सहयोग में निहित है। उन्होंने सभी नागरिकों से मिलकर एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के लिए काम करने की अपील की।
हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
भारत में हर वर्ष 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों लोगों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और अपनों से बिछड़ने की पीड़ा का सामना किया। विभाजन के समय कई परिवारों को रातोंरात अपना घर छोड़ना पड़ा। लोग अपने पैतृक गांवों और शहरों से दूर नई जगहों पर शरण लेने के लिए मजबूर हुए। अनेक परिवार ऐसे थे जिनके सदस्य एक-दूसरे से बिछड़ गए और कई लोग दोबारा कभी नहीं मिल सके।












