पटना में छात्र-युवाओं के साथ किसान और मजदूर संगठनों से जुड़े लोगों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। महंगाई, बेरोजगारी और भूमि अधिग्रहण के विरोध में निकाले गए इस आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति यानी परमानेंट VC की नियुक्ति की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था से रोजगार, शिक्षा और किसानों-मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महंगाई बढ़ने से आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी में जुटे हैं। छात्रों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है, ताकि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा, नियुक्ति और अन्य अकादमिक गतिविधियां नियमित तरीके से चल सकें।
मार्च के दौरान छात्र-युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रोजगार और शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना था कि केवल परीक्षाओं की घोषणा से युवाओं की समस्या दूर नहीं होगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा करना और नियुक्तियां सुनिश्चित करना भी जरूरी है। छात्रों की ओर से विश्वविद्यालयों में खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को भरने और स्थायी कुलपति की नियुक्ति की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया।
किसान और मजदूरों से जुड़े लोगों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के हितों और उनकी आजीविका का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि जमीन अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को कई बार अपनी जमीन और उससे जुड़े रोजगार के नुकसान की चिंता रहती है। ऐसे में मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई।
पटना में राजभवन की ओर निकाले गए इस मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी भी की। छात्र संगठनों की ओर से विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा से जुड़े सवालों को उठाया गया, जबकि किसान-मजदूरों ने महंगाई, रोजगार और भूमि से संबंधित मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी। मार्च में अलग-अलग सामाजिक और छात्र समूहों की मौजूदगी के कारण कई मुद्दे एक साथ सामने आए।
छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति की नियुक्ति केवल प्रशासनिक पद भरने का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के संचालन पर भी पड़ता है। उनके अनुसार स्थायी कुलपति के रहने से अकादमिक फैसलों, परीक्षाओं, शैक्षणिक योजनाओं और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मामलों में स्पष्टता रहती है। इसी वजह से उन्होंने जल्द स्थायी VC की नियुक्ति की मांग रखी।
प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी को लेकर भी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। युवाओं का कहना था कि नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया, रिजल्ट और नियुक्ति में लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शन के दौरान युवाओं से जुड़े इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया गया और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की मांग की गई।
महंगाई का मुद्दा भी मार्च में प्रमुखता से सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ता है। किसान और मजदूर वर्ग के लोगों ने अपनी आय और खर्च के बीच बढ़ते अंतर को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि ग्रामीण और निम्न आय वाले परिवारों के लिए खाद्य सामग्री, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रदर्शनकारियों की ओर से यह मांग भी रखी गई कि जिन लोगों की जमीन किसी परियोजना के लिए ली जाती है, उनके हितों की पर्याप्त सुरक्षा हो। जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति लागू करने की मांग की गई। किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा कि जमीन उनके लिए केवल संपत्ति नहीं बल्कि आजीविका का मुख्य साधन भी होती है।
मार्च को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। राजभवन और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। प्रदर्शन के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए पुलिस की ओर से आवश्यक प्रबंध किए गए। बड़ी संख्या में लोगों के एक जगह जुटने के कारण आसपास के रास्तों पर आवाजाही को लेकर भी पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए। उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों में लंबे समय तक स्थायी प्रशासनिक पद खाली रहने से छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन में नियमितता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान होना चाहिए।
किसान और मजदूर संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने भी अपने मुद्दों को लेकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि महंगाई और रोजगार की समस्या का असर समाज के अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है। किसान अपनी उपज और जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंतित हैं, जबकि मजदूर वर्ग रोजगार और आय से जुड़े सवालों का सामना कर रहा है। इसी कारण इन सभी मुद्दों को एक साथ लेकर आक्रोश मार्च निकाला गया।
पटना में निकले इस मार्च के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। छात्र संगठनों की मुख्य मांगों में स्थायी VC की नियुक्ति, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे रहे, जबकि किसान-मजदूरों ने महंगाई और भूमि अधिग्रहण को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
अब प्रदर्शनकारियों की नजर इस बात पर है कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं। विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति की नियुक्ति, युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों की समस्याएं अलग-अलग विभागों से संबंधित हैं। ऐसे में इन मांगों पर आगे की प्रक्रिया संबंधित संस्थानों और सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगी।
इस आक्रोश मार्च ने एक बार फिर पटना में छात्र और सामाजिक संगठनों के उन मुद्दों को सामने रखा है, जिनमें शिक्षा, रोजगार, महंगाई और जमीन से जुड़े सवाल शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर अपनी मांगें रखीं और संबंधित अधिकारियों से इन मुद्दों पर बातचीत तथा समाधान की मांग की। अब आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इन मांगों पर प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।











