बठिंडा में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की ओर से पौधरोपण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पौधे लगाने के साथ किसानों को खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। किसानों को फसल प्रबंधन, बेहतर उत्पादन और बदलते मौसम के अनुसार खेती की तकनीक अपनाने के बारे में बताया गया।
पौधरोपण अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली को बढ़ावा देना रहा। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि खेती और पर्यावरण एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक संख्या में पेड़-पौधे होने से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
अभियान के दौरान किसानों को अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया। पौधों की देखभाल, सिंचाई और उनके संरक्षण के बारे में भी जानकारी दी गई। किसानों से अपील की गई कि वे अपने खेतों, घरों और आसपास की खाली जगहों पर पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल करें।
पीएयू की टीम ने किसानों को फसल प्रबंधन के जरूरी टिप्स भी दिए। विशेषज्ञों ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए केवल गुणवत्तापूर्ण बीज का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल के पूरे चक्र के दौरान सही प्रबंधन भी जरूरी है।
किसानों को खेत की तैयारी, उचित समय पर बुवाई, सिंचाई, खाद और उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी की जरूरत और फसल की अवस्था के अनुसार ही खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
फसल में कीट या रोग दिखाई देने पर तुरंत उचित कदम उठाने की सलाह भी दी गई। किसानों से कहा गया कि बिना जानकारी के किसी भी दवा का इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। इससे फसल को नुकसान से बचाने के साथ अनावश्यक खर्च को भी कम किया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों ने मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए किसानों को फसल प्रबंधन में सावधानी बरतने की सलाह दी। तापमान, बारिश और नमी में बदलाव का फसलों पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को खेत की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार सिंचाई व अन्य कृषि कार्य करने के लिए कहा गया।
पौधरोपण अभियान के दौरान किसानों ने भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर रुचि दिखाई। किसानों का कहना था कि खेती के साथ पर्यावरण को बचाना भी जरूरी है। पेड़-पौधे खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर भी जागरूक किया। खेतों में फसल अवशेष जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन और उपयोग की जानकारी दी गई। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों को खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का सही इस्तेमाल करने से लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पीएयू की ओर से आयोजित इस अभियान में पौधरोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे किसानों की रोजमर्रा की खेती से जोड़कर भी समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी, पानी और पर्यावरण का संरक्षण बेहद जरूरी है।
किसानों को पानी की बचत के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने और खेत में अनावश्यक पानी न लगाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि भूजल का स्तर बनाए रखने के लिए पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।
अभियान के दौरान किसानों को यह संदेश भी दिया गया कि पौधरोपण के बाद उसकी देखभाल करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पौधा लगाना। पौधे को शुरुआती दिनों में पर्याप्त पानी और सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिए लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी करने की अपील की गई।
पीएयू के इस अभियान से किसानों को पर्यावरण और कृषि दोनों से जुड़ी जानकारी एक साथ मिली। इससे ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने में मदद मिलेगी।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से कहा कि खेती में किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसके बारे में सही जानकारी हासिल करें। वैज्ञानिक सलाह के आधार पर खेती करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार किया जा सकता है।
बठिंडा में पीएयू का पौधरोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में एक पहल रहा। अभियान के दौरान पौधे लगाने के साथ किसानों को फसल प्रबंधन, खाद-उर्वरक के संतुलित उपयोग, सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ी जानकारी दी गई। किसानों को पर्यावरण बचाने के साथ खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।













