पिंडी छोले का नाम पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर से जुड़ा है, जहाँ से इस व्यंजन की शुरुआत हुई थी। यह उत्तर भारत, खासकर पंजाब का एक बेहद मशहूर और पारंपरिक व्यंजन है। यह आम छोले मसाले या अमृतसरी छोले से काफी अलग होता है। इसकी खासियत इसका गहरा काला रंग, सूखापन (dry texture) और तीखा-खट्टा स्वाद है। इसमें प्याज और टमाटर की ग्रेवी का इस्तेमाल बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। इसका असली जादू इसके खास भुने हुए मसालों और ऊपर से डाले गए गरमा-गरम घी के तड़के में है।
सामग्री
- उबालने के लिए: 2 कप काबुली चने (रात भर भीगे हुए), 2 टी-बैग्स (Tea bags) या एक पोटली में बंधी 2 चम्मच चाय पत्ती (गहरे रंग के लिए), 2 तेजपत्ता, 1 बड़ी इलायची, 1 इंच दालचीनी, ½ छोटा चम्मच खाने का सोडा (मीठा सोडा - चनों को नरम करने के लिए), नमक।
- पिंडी छोले मसाला (सूखा भूनकर पीस लें): 2 बड़े चम्मच साबुत धनिया, 1 बड़ा चम्मच जीरा, 1 बड़ा चम्मच अनारदाना (अनिवार्य है), 4-5 लौंग, 1 चम्मच काली मिर्च, 3-4 सूखी लाल मिर्च।
- अन्य सूखे मसाले: 1 बड़ा चम्मच अमचूर पाउडर, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा चम्मच हल्दी (वैकल्पिक), 1 छोटा चम्मच अजवाइन, काला नमक स्वादानुसार।
- तड़के के लिए: 3-4 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, 1 छोटा चम्मच हींग, 2 इंच अदरक के लच्छे (Julienne), 3-4 हरी मिर्च (बीच से चीरा लगी हुई)।
बनाने का तरीका
- चने उबालना: भीगे हुए चनों को धोकर प्रेशर कुकर में डालें। इसमें टी-बैग्स, खड़े मसाले (तेजपत्ता, बड़ी इलायची, दालचीनी), नमक, खाने का सोडा और आवश्यकतानुसार पानी (चनों से लगभग 1 इंच ऊपर) डालें। कुकर बंद करें और 5-6 सीटी आने तक या चनों के पूरी तरह नरम होने तक पकाएं (चने दबने चाहिए लेकिन टूटने नहीं चाहिए)।
- मसाला तैयार करना: जब तक चने उबल रहे हैं, एक पैन में 'पिंडी छोले मसाला' के तहत लिखे सभी साबुत मसालों (धनिया, जीरा, अनारदाना, लौंग, काली मिर्च, सूखी मिर्च) को धीमी आंच पर खुशबू आने तक सूखा भून लें। ठंडा करके इन्हें दरदरा या बारीक पीस लें।
- चने तैयार करना: उबले हुए चनों में से टी-बैग्स और खड़े मसाले निकाल दें। चनों को पानी से अलग कर लें, लेकिन पानी को फेंके नहीं, उसे एक बर्तन में बचाकर रखें।
- मसाले मिलाना: अब उबले हुए चनों को एक लोहे की कड़ाही या भारी तले के पैन में डालें। इनके ऊपर तैयार किया हुआ पिंडी मसाला, अमचूर पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, अजवाइन और काला नमक डालें। चनों को मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाएं (क्योंकि इसमें ग्रेवी नहीं है, मसाले चनों पर लिपटने चाहिए)। अगर बहुत सूखा लगे, तो 2-3 बड़े चम्मच उबला हुआ बचा पानी डाल दें।
- तड़का (सबसे महत्वपूर्ण स्टेप): एक तड़का पैन में घी को तेज़ गरम करें। जब घी से धुआं निकलने लगे, तो आंच धीमी करें और उसमें हींग, अदरक के लच्छे और हरी मिर्च डालें। जैसे ही अदरक का रंग हल्का बदले, इस खौलते हुए तड़के को तुरंत मसालों से लिपटे चनों के ऊपर डाल दें। (यह गरम घी कच्चे मसालों को पका देगा और बेहतरीन स्वाद लाएगा)।
- पकाना: तड़का डालने के बाद, चनों को हल्के हाथों से मिलाएं और धीमी आंच पर 5-7 मिनट तक पकने दें ताकि सारे फ्लेवर एकसार हो जाएं। गरमा-गरम पिंडी छोले तैयार हैं।
- परोसने के तरीके
पिंडी छोले का क्लासिक कॉम्बिनेशन गरमा-गरम भटूरों के साथ है। इसके अलावा, इसे तंदूरी रोटी, नान, कुलचा या पूरी के साथ भी बेहद पसंद किया जाता है। परोसते समय इसके साथ सिरके वाले प्याज के लच्छे, नींबू के टुकड़े, हरी मिर्च का अचार और ठंडा बूंदी रायता ज़रूर रखें, जो इसके तीखेपन को संतुलित करता है।
खाने के फायदे
पिंडी छोले स्वाद और सेहत का खजाना हैं। काबुली चना प्लांट-बेस्ड प्रोटीन (Protein) और फाइबर (Fiber) का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और पाचन में मदद करता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले मसाले जैसे अजवाइन, हींग और अदरक पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं। यह डायबिटिक लोगों के लिए भी अच्छा है क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।













