इडली के साथ हर बार सांभर या नारियल की चटनी खाने का मन नहीं करता। ऐसे में कोंकणी रसोई का मिरसांगे उदक एक अच्छा विकल्प है। हरी मिर्च, हींग, नमक और पानी से बनने वाली इस रेसिपी में न गैस जलानी पड़ती है और न ही ज्यादा तैयारी करनी होती है।
Mirsange Udak Recipe: सुबह नाश्ते में इडली बनी हो और साथ में सांभर या चटनी बनाने का समय न मिले, तो एक बार मिरसांगे उदक बनाकर देखिए। यह कोंकण के घरों में बनाया जाने वाला तीखा और पतला मिश्रण है, जिसे इडली के साथ खाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसे पकाने की जरूरत नहीं पड़ती। बस घर में रखी हरी मिर्च, हींग और नमक चाहिए। रेसिपी शेयर करने वाले सनी व्यास के मुताबिक, मिक्सर में इसे तैयार करने में करीब 20 सेकंड लगते हैं।
कोंकण के घरों में पुराने समय से बन रहा मिरसांगे उदक
गोवा और तटीय कर्नाटक के खान-पान में कई ऐसी चीजें मिलती हैं, जिन्हें बनाने का तरीका बहुत सीधा है। मिरसांगे उदक भी इन्हीं में से एक है। इसका स्वाद आम चटनी से थोड़ा अलग होता है। यह गाढ़ी नहीं, बल्कि पानी की तरह पतली होती है। इसमें हरी मिर्च का तीखापन और हींग की खुशबू साफ महसूस होती है।
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कोंकणी परिवारों में इस तरह के पारंपरिक व्यंजन लंबे समय से बनाए जाते रहे हैं। इन्हें तैयार करने के लिए ज्यादा मसालों या तेल की जरूरत नहीं होती। मिरसांगे उदक भी कम सामान में बन जाता है।
अगर घर में अचानक इडली बन जाए और चटनी के लिए नारियल न हो, तो यह रेसिपी काम आ सकती है। खासकर उन लोगों को इसका स्वाद पसंद आ सकता है, जो खाने में थोड़ा ज्यादा तीखा पसंद करते हैं।
मिरसांगे उदक बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
इस रेसिपी के लिए रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजें ही काफी हैं। हरी मिर्च इसका मुख्य हिस्सा है। आप जितना तीखा खाना पसंद करते हैं, उसी हिसाब से मिर्च लें।
इसके अलावा थोड़ी सी हींग चाहिए, जिससे पानी में अलग खुशबू आती है। नमक स्वाद के अनुसार डालना है। इन सभी चीजों को मिलाने के लिए साफ पीने का पानी इस्तेमाल किया जाता है।
मिरसांगे उदक में न तो तेल डालना पड़ता है और न ही किसी तरह का तड़का लगाना होता है। इसे बनाने से पहले हरी मिर्च को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें, ताकि मिक्सर में आसानी से पिस जाए।
बिना गैस जलाए ऐसे तैयार करें मिरसांगे उदक
सबसे पहले एक छोटा मिक्सर जार लें। उसमें कटी हुई हरी मिर्च डालें। इसके बाद चुटकी भर हींग और स्वाद के मुताबिक नमक मिला दें। अब इसमें थोड़ा पीने का पानी डालकर जार का ढक्कन बंद कर दें।
मिक्सर को करीब 15 से 20 सेकंड तक चलाएं। जब मिर्च अच्छी तरह पिस जाए और उसका स्वाद पानी में मिल जाए, तो मिक्सर बंद कर दें। तैयार मिश्रण को एक कटोरी में निकाल लें।
अगर यह ज्यादा तीखा लगे, तो थोड़ा और पानी मिलाया जा सकता है। वहीं, हल्का तीखा पसंद करने वाले लोग शुरुआत से ही कम मिर्च इस्तेमाल करें। इस तरह बिना कुछ पकाए इडली के साथ खाने के लिए मिरसांगे उदक तैयार हो जाएगा।
ध्यान रहे कि 20 सेकंड का समय केवल मिक्सर में पीसने का है। मिर्च धोने, काटने और बाकी सामान निकालने में थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।
कटहल के पत्तों में बनी इडली के साथ खाया जाता है
कोंकणी खान-पान में मिरसांगे उदक को खास तरह की इडली के साथ भी परोसा जाता है। इस इडली को खोट्टो कहा जाता है। इसे कटहल के पत्तों से बने छोटे डोने में भाप देकर तैयार किया जाता है।
कटहल के पत्तों में पकने की वजह से खोट्टो की खुशबू साधारण इडली से कुछ अलग होती है। इसे खाते समय मिरसांगे उदक में डुबोया जाता है। नरम इडली के साथ मिर्च और हींग वाला पानी मिलकर तीखा स्वाद देता है।
हालांकि, इसके लिए खोट्टो बनाना जरूरी नहीं है। घर में रोज बनने वाली साधारण इडली के साथ भी मिरसांगे उदक खाया जा सकता है।
इडली के अलावा इन चीजों के साथ भी खा सकते हैं
मिरसांगे उदक केवल इडली तक सीमित नहीं है। इसे डोसा के साथ भी परोसा जा सकता है। अगर नारियल की चटनी नहीं बनानी हो, तो डोसा का एक टुकड़ा इसमें डुबोकर खा सकते हैं।
इसके अलावा सादे दाल-चावल और खिचड़ी के साथ भी इसका स्वाद अच्छा लग सकता है। कई बार घर में सादा खाना बना होता है और साथ में कुछ तीखा खाने का मन करता है। ऐसे में मिरसांगे उदक की थोड़ी सी मात्रा खाने के साथ ली जा सकती है।
चूंकि इसमें कच्ची हरी मिर्च इस्तेमाल होती है, इसलिए इसका तीखापन ज्यादा हो सकता है। जिन लोगों को मिर्च से पेट में जलन या परेशानी होती है, उन्हें इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए।
अगली बार घर में इडली बनाएं, तो सांभर और चटनी के अलावा इस कोंकणी रेसिपी को भी आजमाकर देखें। इसकी सबसे अच्छी बात यही है कि कम सामान में तैयार हो जाती है और बर्तन भी ज्यादा इस्तेमाल नहीं होते।











