PM मोदी का ऐतिहासिक स्लोवाकिया दौरा: 33 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा

PM नरेंद्र मोदी पहली बार स्लोवाकिया दौरे पर पहुंचे। ब्रातिस्लावा में पारंपरिक ब्रेड-नमक से स्वागत हुआ। आज वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक ब्रेड और नमक से स्वागत किया गया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा है। मोदी आज राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने यूरोपीय दौरे के दूसरे चरण में स्लोवाकिया पहुंचकर भारत और मध्य यूरोप के बीच संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद यह पहली बार है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री आधिकारिक यात्रा पर वहां पहुंचे हैं। इस ऐतिहासिक दौरे को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराय ब्लानार ने किया। स्वागत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री को पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार ब्रेड और नमक भेंट किया गया। स्लोवाक संस्कृति में यह परंपरा सम्मान, मित्रता और सद्भावना का प्रतीक मानी जाती है। प्रधानमंत्री ने इस पारंपरिक सम्मान को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के महत्व को रेखांकित किया।

भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए ऐतिहासिक क्षण

स्लोवाकिया ने 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व ग्रहण किया था। पिछले 33 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा है, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ जाता है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

ब्रातिस्लावा में भारतीय समुदाय का उत्साह

प्रधानमंत्री के आगमन पर ब्रातिस्लावा एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। भारतीय प्रवासियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और भारत के प्रति अपने जुड़ाव को प्रदर्शित किया।

स्लोवाकिया में वर्तमान में लगभग 9,200 भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या आईटी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों की है। पिछले कुछ वर्षों में स्लोवाकिया भारतीय प्रतिभाओं के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है, विशेष रूप से तकनीक और विनिर्माण क्षेत्रों में।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्लोवाकिया के शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए यह देश यूरोप के अन्य बाजारों तक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार भी बन गया है।

आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच 2025 में लगभग 17,000 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार दर्ज किया गया था, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

भारत से स्लोवाकिया को मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वस्त्र और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात किया जाता है। वहीं स्लोवाकिया से भारत को वाहन, औद्योगिक मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण और प्रोसेस्ड रबर जैसे उत्पाद आयात किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान निवेश और औद्योगिक सहयोग को लेकर नए समझौतों पर चर्चा हो सकती है।

यूरोप का ऑटोमोबाइल हब है स्लोवाकिया

स्लोवाकिया को यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमोबाइल उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है। लगभग 55 लाख की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से अधिक यात्री वाहनों का निर्माण करता है। यहां दुनिया की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों जैसे वोक्सवैगन, किआ, जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो की उत्पादन इकाइयां संचालित हैं।

ऑटोमोबाइल उद्योग स्लोवाकिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और देश की जीडीपी में लगभग 14 प्रतिशत योगदान देता है। भारत की तेजी से बढ़ती ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और स्लोवाकिया की विनिर्माण क्षमता दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।

PM मोदी का ऐतिहासिक स्लोवाकिया दौरा: 33 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा

श्रम बाजार और भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर

स्लोवाकिया इस समय जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश की कार्यशील आबादी में हर वर्ष हजारों लोगों की कमी दर्ज की जा रही है, जिसके कारण कुशल विदेशी कामगारों की मांग लगातार बढ़ रही है।

भारतीय आईटी विशेषज्ञ, इंजीनियर, स्वास्थ्यकर्मी और तकनीकी पेशेवर इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान कौशल विकास और मानव संसाधन सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

फ्रांस यात्रा के बाद स्लोवाकिया पहुंचे मोदी

स्लोवाकिया पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के दौरे पर थे, जहां उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

फ्रांस और भारत के बीच हुई वार्ता के दौरान 13 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ नई आर्थिक और रणनीतिक पहल शुरू करने का निर्णय लिया।

नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने भाग लिया, जहां भारत और यूरोप के स्टार्टअप्स तथा निवेशकों ने नवाचार और तकनीकी साझेदारी पर विचार-विमर्श किया।

G7 शिखर सम्मेलन पर भी रहेगी नजर

प्रधानमंत्री मोदी का यूरोपीय दौरा स्लोवाकिया तक सीमित नहीं है। वह आगामी दिनों में फ्रांस के एवियान में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर इस बात पर भी रहेगी कि सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच संभावित मुलाकात में किन मुद्दों पर बातचीत होती है।

भारत की यूरोप नीति को मिलेगा नया आयाम

विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का स्लोवाकिया दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की यूरोप-केंद्रित विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पश्चिमी और मध्य यूरोप के देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

स्लोवाकिया जैसे उभरते यूरोपीय साझेदारों के साथ बढ़ता सहयोग भारत को नए बाजार, निवेश के अवसर और तकनीकी साझेदारियां प्रदान कर सकता है। वहीं स्लोवाकिया के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण साझेदार साबित हो सकता है।

इस ऐतिहासिक यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नई गति आने की उम्मीद है और आने वाले वर्षों में भारत-स्लोवाकिया सहयोग के कई नए आयाम देखने को मिल सकते हैं।

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