पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को निर्वाचन आयोग ने SIR नोटिस जारी किया। उन्हें पहचान और निवास की पुष्टि के लिए उपस्थित होना होगा। 82 वर्षीय प्रकाश ने कहा कि सरकारी डेटाबेस में जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद नोटिस मिला।
New Delhi: भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) को विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के तहत नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी पहचान और निवास की पुष्टि करने के लिए कहा गया है।
एडमिरल प्रकाश, जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद गोवा में स्थायी रूप से रह रहे हैं, ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि SIR प्रपत्र अपेक्षित जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं तो इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।
अनमैप श्रेणी में होने का मामला
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2002 में अंतिम बार अद्यतन मतदाता सूची में एडमिरल अरुण प्रकाश का विवरण दर्ज नहीं था, इसलिए उन्हें 'अनमैप' (Unmapped) श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि उनका नाम वर्तमान सूची में स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई दे रहा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई लोगों ने इस पर सवाल उठाया कि पूर्व नौसेना प्रमुख का पीपीओ (Pension Payment Order) और जीवन प्रमाणपत्र पहले से सरकारी डेटाबेस में उपलब्ध हैं, फिर एसआईआर टीम को और क्या जानकारी चाहिए।
जिला निर्वाचन अधिकारी का बयान
दक्षिण गोवा की जिला निर्वाचन अधिकारी एग्ना क्लीटस ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकांश लोग इसी स्थिति का सामना करते हैं। उन्होंने बताया कि एडमिरल प्रकाश 'अनमैप' श्रेणी में आते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि वह सोमवार को एडमिरल प्रकाश के प्रपत्र को देखेंगी और प्राधिकारी उनसे संपर्क करेंगे।
एडमिरल प्रकाश का बयान
एडमिरल अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि उन्हें न तो किसी विशेष सुविधा की जरूरत है और न ही उन्होंने 20 साल सेवानिवृत्ति के बाद कभी कोई विशेष मांग की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने आवश्यकतानुसार SIR प्रपत्र भरे थे और वे ईसीआई की वेबसाइट पर गोवा की प्रारूप मतदाता सूची 2026 में अपने नाम देखकर प्रसन्न थे।

एडमिरल ने स्पष्ट किया कि वे निर्वाचन आयोग के नोटिस का पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने सुझाव दिया कि यदि SIR प्रपत्र अपेक्षित जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं तो उसमें संशोधन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बीएलओ (Booth Level Officer) ने उनसे तीन बार मुलाकात की और वे अतिरिक्त जानकारी मांग सकते थे।
उम्र और दूरी को लेकर चुनौती
एडमिरल प्रकाश ने यह भी लिखा कि वे 82 वर्ष के हैं और उनकी पत्नी 78 वर्ष की हैं। उन्हें दो अलग-अलग तिथियों पर 18 किलोमीटर दूर जाकर उपस्थित होने को कहा गया है, जो उनके लिए चुनौतीपूर्ण है।
इस पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया भी आई। लेफ्टिनेंट कर्नल टी. एस. आनंद (सेवानिवृत्त) ने लिखा कि ऐसा सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ी के कारण हो सकता है, लेकिन हर नागरिक जिसे अपने दस्तावेज़ ठीक हैं, जाकर अपनी पहचान स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि एडमिरल प्रकाश के पीपीओ और जीवन प्रमाणपत्र पर्याप्त हैं और एसआईआर टीम उनके घर भी जा सकती है।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि एडमिरल प्रकाश का और अन्य नागरिकों का पीपीओ और जीवन प्रमाणपत्र पहले से सरकारी डेटाबेस में मौजूद है, केवल सिस्टम पर कुछ बटन दबाने की जरूरत है। यह मामले में सामान्य समझ की कमी को दर्शाता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का महत्व
निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्रमुख बिंदु हैं:
दोहरे पंजीकरण को हटाना: सुनिश्चित करना कि एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में न हो।
मृतकों के नाम का विलोपन: फर्जी वोटिंग रोकने के लिए सूची को अपडेट रखना।
पते का सत्यापन: यह सुनिश्चित करना कि मतदाता वास्तव में उसी पते पर रहता है जहाँ वह पंजीकृत है।
डिजिटल इंडिया के दौर में प्रक्रियाओं की चुनौतियां
एडमिरल अरुण प्रकाश के मामले ने यह स्पष्ट किया है कि डिजिटल डेटाबेस और सरकारी रिकॉर्ड होने के बावजूद, जमीनी प्रक्रियाओं में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। ऐसे में निर्वाचन आयोग को अपनी प्रक्रियाओं को और अधिक ‘यूजर-फ्रेंडली’ और आधुनिक बनाने की आवश्यकता है।
विशेषकर वरिष्ठ नागरिक और पूर्व सेवा में रहे व्यक्तित्वों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाना जरूरी है। इससे न केवल उनकी परेशानी कम होगी बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की दक्षता भी बढ़ेगी।











