पूर्वोत्तर भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ पहचान वैश्विक मंच पर मजबूत: वित्त मंत्री ने बताया विकास का नया मॉडल

पूर्वोत्तर भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती मिली। वित्त मंत्री ने इसे भारत के विकास का नया मॉडल बताया, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत तेजी से विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है और अब यह वैश्विक स्तर के कई महत्वपूर्ण स्थलों का घर बन चुका है।

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्य—जिन्हें सामूहिक रूप से “अष्टलक्ष्मी” कहा जाता है—अब वैश्विक मानचित्र पर एक मजबूत और उभरते हुए विकास मॉडल के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब सतत विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों के नए केंद्र के रूप में सामने आ रहा है।

पूर्वोत्तर के विकास पर अपने विचार साझा करते हुए वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि अष्टलक्ष्मी क्षेत्र में शामिल राज्य—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—अब दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।

अष्टलक्ष्मी राज्यों की बढ़ती वैश्विक पहचान

वित्त मंत्री के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत अब केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि यह नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास का उदाहरण बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे कई विकास कार्य हुए हैं, जो वैश्विक स्तर पर मिसाल माने जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिक्किम, जिसे दुनिया का पहला 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य माना जाता है, पूर्वोत्तर की पर्यावरण-अनुकूल नीति का प्रतीक है। इसके साथ ही क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है।

बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव

पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस सुधार ने न केवल क्षेत्रीय दूरी को कम किया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और निवेश के अवसरों को भी बढ़ाया है। सरकारी आकलनों के अनुसार, इन विकास पहलों ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। 

स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच में भी तेजी से सुधार दर्ज किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन “समावेशी विकास” का परिणाम है, जिसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई है।

‘एक्ट ईस्ट’ नीति का प्रमुख स्तंभ

पूर्वोत्तर क्षेत्र अब भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। यह नीति दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, जलविद्युत परियोजनाओं, गैस इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा-पार कनेक्टिविटी में किए गए निवेश ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लगातार नीतिगत समर्थन के कारण पूर्वोत्तर भारत में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। यह विकास पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के सतत उपयोग के साथ आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि “अष्टलक्ष्मी” अब केवल एक सांस्कृतिक या प्रशासनिक पहचान नहीं है, बल्कि यह भारत के “विकसित भारत” विजन के भीतर एक ऐसे क्षेत्र का प्रतीक है जो तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

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