प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस पहुंचे: रक्षा, AI और वैश्विक सुरक्षा पर भारत-फ्रांस साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस पहुंचे। आज राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करेंगे। राफेल डील, AI, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और G7 समिट पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस पहुंचे, जहां भारतीय समुदाय ने उनका भव्य स्वागत किया। आज वे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच राफेल डील, AI, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष तकनीक समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

नई दिल्ली/पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे, जहां भारतीय समुदाय ने उनका जोरदार स्वागत किया। होटल पहुंचने पर बड़ी संख्या में मौजूद प्रवासी भारतीयों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और भारत-फ्रांस मित्रता के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, बच्चों से मुलाकात की और समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत की। उनकी यात्रा को भारत-फ्रांस संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान रक्षा, तकनीक, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है।ननि 

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और फ्रांस दोनों अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। नीस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनके उत्साह के लिए आभार जताया।

आज होगी मैक्रों-मोदी की अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष कार्यक्रम, सेमीकंडक्टर निर्माण, हेल्थ टेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

भारत और फ्रांस पिछले कुछ वर्षों में अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग से लेकर उन्नत तकनीकों के विकास तक, दोनों देश कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान कई नए समझौतों की घोषणा भी की जा सकती है।

तकनीक और इनोवेशन पर रहेगा विशेष फोकस

फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी "भारत इनोवेट्स" कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है और डिजिटल टेक्नोलॉजी, फिनटेक, हेल्थ टेक और AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रांस भी यूरोप के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब्स में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर बड़ी घोषणाओं की संभावना जताई जा रही है।

राफेल डील पर दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 114 राफेल लड़ाकू विमानों के प्रस्तावित सौदे को माना जा रहा है। भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए यह सौदा बेहद अहम समझा जा रहा है।

भारत चाहता है कि इन विमानों में स्वदेशी हथियार प्रणालियों और तकनीकों को एकीकृत करने की अधिक सुविधा मिले। इसके लिए तकनीकी अधिकारों और सॉफ्टवेयर एक्सेस से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष इस दिशा में सहमत होते हैं तो यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

हालांकि इस सौदे को अभी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।

छह दिनों का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा

प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के छह दिवसीय दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी सातवीं फ्रांस यात्रा है, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है।

फ्रांस में वे नीस, एवियान और पेरिस का दौरा करेंगे। इसके बाद वे स्लोवाकिया जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे। स्लोवाकिया के स्वतंत्र देश बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी।

भारत इस यात्रा के जरिए मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का संकेत है।

G7 शिखर सम्मेलन में भारत की अहम भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और वैश्विक मामलों में बढ़ते प्रभाव के कारण उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता है।

इस वर्ष सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा संकट, वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर चर्चा होगी। भारत इन मुद्दों पर विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगा।

ट्रम्प से मुलाकात की संभावना

G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की यह करीब 16 महीने बाद आमने-सामने मुलाकात हो सकती है।

बैठक में व्यापार, रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से इस बैठक को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा संभव

ईरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान चर्चा का विषय बन सकती है। दुनिया के एक बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग का समर्थक रहा है। फ्रांस और ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित सुरक्षा ढांचे को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट कर सकता है।

भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

भारत और फ्रांस के बीच दशकों से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों ने कई सफल परियोजनाओं पर साथ काम किया है।

फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का लगातार समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग हो या न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) की सदस्यता, फ्रांस हमेशा भारत के पक्ष में खड़ा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

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