प्रशांत महासागर में अल नीनो के सक्रिय होने के बीच भारत में मानसून की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। हालांकि मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार सामान्य से कम बनी हुई है।
नई दिल्ली: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति इस वर्ष अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी बीच, प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की सक्रियता और ऊपरी वायुमंडलीय परिस्थितियों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारकों का प्रभाव मानसून की गति और वर्षा वितरण पर पड़ सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार सामान्य से कम है। जून के पहले पखवाड़े में देशभर में औसत वर्षा सामान्य स्तर से लगभग 25 प्रतिशत कम रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में यह कमी और बढ़ सकती है, हालांकि दीर्घकालिक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
अल नीनो क्या है और इसका प्रभाव क्यों महत्वपूर्ण है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। यह वैश्विक मौसम प्रणालियों को प्रभावित करता है और कई देशों में वर्षा तथा तापमान के पैटर्न में बदलाव ला सकता है। भारत के संदर्भ में, अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून और कम वर्षा से जोड़ा जाता है, हालांकि इसका प्रभाव हर वर्ष समान नहीं होता।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की स्थिति कई अन्य वायुमंडलीय और समुद्री कारकों पर भी निर्भर करती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली शक्तिशाली पश्चिमी हवाएं, जिन्हें "वेस्टरली जेट स्ट्रीम" कहा जाता है, अपनी सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर सक्रिय हैं। इन हवाओं के कारण मानसूनी बादलों के विकास और स्थिरता पर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी स्तर पर तेज पश्चिमी प्रवाह बादलों को पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होने दे रहा, जिससे कई क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। हालांकि मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और आने वाले दिनों में इसमें सुधार संभव है।
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मानसून की वर्तमान स्थिति
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 15 जून तक मानसून ने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के शेष हिस्सों के साथ-साथ तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ अतिरिक्त क्षेत्रों में प्रगति की है। मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। हालांकि देश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मानसून की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
विशेष रूप से भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में मानसून के आगमन में देरी देखी जा रही है। सामान्य परिस्थितियों में यहां मानसून 11 जून के आसपास पहुंच जाता है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों के दौरान मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।
इस अवधि में इसके महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों के अलावा छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तथा मध्य अरब सागर तक आगे बढ़ने की संभावना है।हालांकि, वर्षा की तीव्रता और वितरण स्थानीय मौसम परिस्थितियों तथा महासागरीय प्रभावों पर निर्भर करेगा।









