पंजाब सरकार का पहला ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। 30 अगस्त तक 55.36 लाख परिवारों का सर्वे किया गया, जबकि AI आधारित गुणवत्ता जांच में 7.24 लाख प्रविष्टियां मैनुअल जांच के लिए भेजी गईं।
चंडीगढ़: पंजाब में नशे की स्थिति और उससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए शुरू किया गया ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। 30 अगस्त तक 55.61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 55.36 लाख परिवारों का सर्वे किया जा चुका है। इस तरह 99.56 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। सर्वे के डेटा की गुणवत्ता जांच के लिए AI आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।
55.36 लाख परिवारों का सर्वे पूरा
पंजाब सरकार ने अप्रैल में प्रदेश के परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और नशे से जुड़े हालात की जानकारी जुटाने के लिए यह व्यापक सर्वे शुरू किया था। 30 अगस्त तक कुल 55.36 लाख परिवारों को सर्वे में कवर किया गया। हालांकि, 3,48,692 परिवारों ने सर्वे में सहयोग नहीं किया या इसमें शामिल होने से इन्कार कर दिया।
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सर्वे किए गए परिवारों में से 51.88 लाख सर्वे को AI आधारित सिस्टम के जरिए गुणवत्ता जांच के लिए परखा गया। इनमें 44.63 लाख सर्वे AI प्रणाली ने स्वीकार कर लिए, जबकि 7.24 लाख प्रविष्टियों को AI ने अस्वीकार कर मैनुअल गुणवत्ता जांच के लिए भेजा। यह AI द्वारा जांचे गए सर्वे का 13.96 प्रतिशत था।
मैनुअल जांच में अधिकांश सर्वे स्वीकार
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मैनुअल जांच के लिए भेजे गए 7.24 लाख मामलों में से 7.23 लाख की जांच पूरी हो चुकी है। जांच के बाद 6.77 लाख सर्वे संपादन के बाद स्वीकार कर लिए गए। वहीं, 19,432 सर्वे को अस्वीकार श्रेणी में रखा गया। यह गुणवत्ता जांच के लिए पात्र कुल सर्वे का 0.37 प्रतिशत है।
जिलेवार कवरेज में अमृतसर सबसे आगे रहा। यहां 4,75,079 के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 4,80,030 सर्वे किए गए, जो 101.04 प्रतिशत है। मानसा, तरनतारन, संगरूर और फिरोजपुर ने भी 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल किया। फाजिल्का, मोगा और पठानकोट ने निर्धारित लक्ष्य पूरा किया।
सबसे कम कवरेज फरीदकोट में 95.32 प्रतिशत रही। इसके बाद एसएएस नगर 98.04 प्रतिशत, रूपनगर 98.13 प्रतिशत और लुधियाना 98.15 प्रतिशत पर रहे। संख्या के लिहाज से लुधियाना में सबसे बड़ा अंतर रहा, जहां 6,58,844 के लक्ष्य के मुकाबले 6,46,634 सर्वे हुए।
नशे के साथ परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी दर्ज
सर्वे का उद्देश्य सिर्फ नशा करने वालों की पहचान करना नहीं था। इसमें नशे की प्रकृति, लत की अवधि, उपचार की स्थिति और नशामुक्ति केंद्र तक पहुंच से जुड़ी जानकारी भी जुटाई गई। इसके साथ परिवार की शिक्षा, रोजगार, मासिक आय, जमीन, कर्ज, पलायन और विदेश जाने से संबंधित जानकारी भी ली गई।
सर्वे में जाति और उपजाति के अलावा सरकारी सेवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और पानी के स्रोतों तक पहुंच के दौरान भेदभाव से जुड़े सवाल भी शामिल किए गए। इस व्यापक दायरे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जनभावना से जुड़ा डेटा जुटाने का आरोप लगाया था।
अब सरकार सर्वे से जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण करेगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में गठित समिति में संबंधित विभागों के सचिव शामिल हैं। समिति नशे की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों, नशे के प्रकार और प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन कर नई योजनाओं और नीतियों के लिए सुझाव तैयार करेगी।








