पंजाब सरकार का दावा, कर्मचारियों को केंद्र से 30-70% अधिक वेतन; DA पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिया जवाब

DA पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजाब सरकार ने कहा कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र से 30–70% अधिक वेतन मिलता है।

पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के DA भुगतान संबंधी आदेश के बाद कहा कि राज्य के कर्मचारियों को केंद्र के समकक्ष कर्मचारियों से 30 से 70 प्रतिशत तक अधिक वेतन मिलता है। सरकार ने महंगाई भत्ता तय करना अपना नीतिगत अधिकार बताया।

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा बकाया महंगाई भत्ता (DA) भुगतान के निर्देश के बाद पंजाब सरकार ने अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि राज्य के कर्मचारियों को पहले से ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन मिल रहा है और DA की दर तय करना राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने रखा अपना पक्ष

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता (DA) दो सप्ताह के भीतर जारी करने के निर्देश के बाद पंजाब सरकार ने विस्तृत बयान जारी किया है। सरकार ने कहा कि राज्य में लागू वेतन ढांचा केंद्र सरकार से अलग है और दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। सरकार के अनुसार, राज्य कर्मचारियों को पहले से ही कई पदों पर केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन दिया जा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ते की दर निर्धारित करना राज्य सरकार का नीतिगत और संप्रभु अधिकार है तथा इस संबंध में वित्तीय स्थिति और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

30 से 70 प्रतिशत अधिक वेतन मिलने का दावा

सरकारी बयान में दावा किया गया है कि पंजाब सरकार के विभिन्न कैडरों में कार्यरत कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की तुलना में 30 से 70 प्रतिशत तक अधिक वेतन मिल रहा है। सरकार का कहना है कि भले ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वर्तमान में अधिक प्रतिशत का महंगाई भत्ता मिल रहा हो, लेकिन राज्य में मूल वेतनमान अधिक होने के कारण कुल मासिक वेतन कई मामलों में ज्यादा है।

सरकार ने यह भी कहा कि राज्य हमेशा यह सुनिश्चित करने के पक्ष में रहा है कि किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के वेतनमान और वहां लागू DA के आधार पर मिलने वाली कुल राशि से कम वेतन न मिले।

सरकार ने उदाहरण देकर समझाया अंतर

अपने दावे को स्पष्ट करने के लिए पंजाब सरकार ने कुछ पदों का उदाहरण भी दिया। सरकार के अनुसार, पंजाब में कार्यरत एक क्लर्क का कुल मासिक वेतन 54,812 रुपये है, जबकि केंद्र सरकार के समान पद पर यह राशि 36,960 रुपये है। इसी तरह पंजाब में एक बस ड्राइवर को 40,612 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि केंद्र सरकार में समान श्रेणी के ड्राइवर का वेतन 36,960 रुपये बताया गया है।

सरकार का कहना है कि केवल महंगाई भत्ते के प्रतिशत की तुलना करने के बजाय कुल वेतन संरचना को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

वित्तीय बोझ बढ़ने की जताई आशंका

राज्य सरकार ने कहा कि पंजाब पहले से ही देश के प्रमुख राज्यों में वेतन और पेंशन पर सबसे अधिक वित्तीय बोझ उठाने वाले राज्यों में शामिल है। यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है, तो इससे विकास कार्यों और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है।

सरकार का कहना है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ राज्य की वित्तीय स्थिति को भी संतुलित रखना आवश्यक है।

अभी अंतिम निर्णय बाकी

पंजाब सरकार का यह बयान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामने आया है। फिलहाल सरकार ने अपना पक्ष सार्वजनिक किया है, जबकि अदालत के निर्देशों के अनुपालन और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर अंतिम स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। सरकार और कर्मचारियों के संगठनों की आगे की कार्रवाई पर भी सभी की नजर बनी हुई है।

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