राहुल गांधी ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साहस की सराहना करते हुए कथित पुलिस कार्रवाई, धमकियों और बदसलूकी पर सवाल उठाए। उन्होंने छात्रों से बातचीत का वीडियो साझा कर परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया।
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलनों में शामिल युवाओं के साहस की सराहना करते हुए कहा है कि बदसलूकी, गाली-गलौज और कथित हिंसा का सामना करने के बावजूद अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों और छात्राओं की हिम्मत को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ हुई अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए थे। आंदोलनकारियों ने कथित परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
राहुल गांधी ने शेयर किया छात्रों से बातचीत का वीडियो
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर छात्रों से बातचीत का वीडियो साझा किया। यह बातचीत 5 अगस्त को हुई थी। वीडियो में वह प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं से उनके अनुभव, आंदोलन में शामिल होने की वजह और कथित उत्पीड़न के बारे में सवाल करते दिखाई देते हैं।
राहुल गांधी ने छात्रों से पूछा कि क्या उन्हें प्रदर्शन के बाद किसी तरह की परेशानी या प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला प्रदर्शनकारी ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें लगातार अपशब्दों का सामना करना पड़ता है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियां मिलने की बात कही।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की कथित हिंसा और दबाव के सामने मजबूती से खड़े रहने वाले युवाओं का साहस प्रशंसा के योग्य है। उन्होंने विशेष रूप से उन छात्राओं की हिम्मत का उल्लेख किया, जिन्होंने कथित बदसलूकी और हिंसा के बावजूद प्रदर्शन जारी रखा।
छात्रों से पूछा- आंदोलन में क्यों शामिल हुए?
वीडियो में राहुल गांधी ने एक छात्रा से यह भी पूछा कि वह और दूसरे युवा इस आंदोलन में क्यों शामिल हुए। इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि हर व्यक्ति केवल अपने व्यक्तिगत मुद्दे के लिए आवाज उठाएगा तो व्यापक समाधान हासिल करना मुश्किल होगा।
छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होने से उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।
राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनने के बाद कहा कि समाज में बहुत से लोग अपने आसपास गलत घटनाएं देखते हैं, लेकिन उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाते। उनके अनुसार, अन्याय के सामने खड़ा होना ही वास्तविक नागरिक जिम्मेदारी है।
जंतर-मंतर आंदोलन बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की थी। 20 जून को हुए प्रदर्शन में छात्रों और समर्थकों की बड़ी भीड़ जुटी थी। प्रदर्शन के दौरान थाली और चम्मच बजाकर भी विरोध दर्ज कराया गया था।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा व्यवस्था में सुधार, जिम्मेदारी तय करना और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल थी। 25 जुलाई तक आंदोलन जारी रहा और इस दौरान केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों तथा आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी हुई।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए अलग तस्वीर पेश की। भाजपा ने बाद में राहुल गांधी पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और पुलिस कार्रवाई को लेकर उनके दावों को गलत बताया।
पुलिस कार्रवाई को लेकर आमने-सामने आरोप
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांगा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने भी दावा किया कि उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए। भाजपा की ओर से कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोली नहीं चलाई और विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है। इस तरह छात्र आंदोलन से जुड़ा विवाद केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा भी बन गया।

पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। 2026 में NEET-UG से जुड़े विवाद ने इस बहस को और तेज किया। हजारों और लाखों विद्यार्थियों के लिए ऐसी परीक्षाएं उच्च शिक्षा और करियर का महत्वपूर्ण रास्ता होती हैं, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर व्यापक हो सकता है।
रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने भी परीक्षा विवाद के बाद युवाओं में बढ़ती नाराजगी, रोजगार की चिंता और शिक्षा व्यवस्था में भरोसे के संकट को व्यापक सामाजिक मुद्दे के रूप में रेखांकित किया है।
इसी पृष्ठभूमि में छात्र संगठनों और युवा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनाई जाए, पेपर लीक की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई हो और प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय मिले।
राहुल गांधी ने युवाओं के संघर्ष को बताया नागरिक जिम्मेदारी
राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत के दौरान यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केवल अपने आसपास होने वाली गलतियों को देखकर चुप रहना पर्याप्त नहीं है।
उनकी टिप्पणी का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि कांग्रेस लगातार युवाओं, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के खिलाफ उठाती रही है। छात्र आंदोलन को समर्थन देकर राहुल गांधी ने एक बार फिर शिक्षा और युवाओं के भविष्य को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
वहीं, सरकार और भाजपा की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर आपत्ति जताई गई है। इससे साफ है कि परीक्षा सुधार और छात्र अधिकारों से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी हिस्सा बन चुका है।
आंदोलन के बाद भी सवाल बरकरार
जंतर-मंतर का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। आंदोलन के दौरान उठाए गए सवालों में परीक्षा की विश्वसनीयता, पेपर लीक रोकने की क्षमता, प्रशासनिक जवाबदेही और विद्यार्थियों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
राहुल गांधी द्वारा साझा किया गया वीडियो इसी व्यापक बहस को फिर सामने लाता है। एक ओर विपक्ष छात्रों के साथ कथित ज्यादती और सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है, वहीं सरकार समर्थक पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है।
आने वाले समय में परीक्षा सुधारों और युवाओं की शिकायतों पर सरकार के कदम इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल राहुल गांधी की टिप्पणी ने छात्र आंदोलनों, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।











