राजगढ़-पिलानी हाईवे पर डंपर और बोलेरो की टक्कर में भीषण आग लगने से तीन बारातियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि पांच युवक गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया है।
झुंझुनूं: राजस्थान में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर दिया। राजगढ़-पिलानी नेशनल हाईवे 709 पर गुरुवार रात करीब 10 बजे डंपर और बोलेरो की आमने-सामने टक्कर में तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन टकराते ही आग की लपटों में घिर गए। कुछ ही सेकंड में बोलेरो और डंपर आग का गोला बन गए, जिससे अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
बारात में जा रहे थे युवक, रास्ते में हुई त्रासदी
हादसे के समय बोलेरो में सवार सभी युवक हनुमानगढ़ के मनदपुरा गांव से पिलानी में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। खुशियों का यह सफर अचानक मातम में बदल गया।
जैसे ही डंपर, जो रोड़ी (ग्रेवल) से भरा हुआ था, सामने से आ रही बोलेरो से टकराया, एक जोरदार धमाका हुआ और दोनों वाहन आग की चपेट में आ गए। बोलेरो में बैठे तीन युवक मौके पर ही जिंदा जल गए।
पुलिस और राहत टीमों ने बचाए 5 घायल
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। Rajasthan Police के हमीरवास थाना प्रभारी रायसिंह सुथार के नेतृत्व में राहत कार्य शुरू किया गया।
पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद पांच युवकों को जलती हुई गाड़ी से बाहर निकाला। ये सभी 50 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके थे।
घायलों को पहले पिलानी के अस्पताल ले जाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर झुंझुनूं और बाद में जयपुर रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घायलों की हालत नाजुक
इस हादसे में घायल हुए युवकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- मनदपुरा, हनुमानगढ़
- कमल (22), मनदपुरा, हनुमानगढ़
- आनंद (20), मनदपुरा, हनुमानगढ़
- विकास (24), सिद्धमुख
- आशीष (20), हिसार
डॉक्टरों के अनुसार सभी की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा देखरेख में रखा गया है।
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एम्बुलेंस और दमकल में देरी पर सवाल
इस हादसे ने आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना स्थल पिलानी के काफी नजदीक होने के बावजूद दमकल को मौके पर पहुंचने में करीब 45 मिनट लग गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर आग पर काबू पा लिया जाता, तो संभवतः कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। नियमों के अनुसार हाईवे के टोल प्लाजा के पास आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आई।
‘डेथ जोन’ बनता जा रहा NH-709
स्थानीय आंकड़े इस हाईवे की खतरनाक स्थिति को उजागर करते हैं। पिछले एक साल में इसी 20 किलोमीटर के दायरे में कम से कम 8 लोगों की मौत हो चुकी है।
थिरपाली क्षेत्र के पास एक ही स्थान पर बार-बार हादसे हो रहे हैं, जिससे यह इलाका ‘डेथ जोन’ के रूप में पहचाना जाने लगा है। इसके बावजूद सुरक्षा सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
हादसे के पीछे संभावित कारण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सड़क किनारे उगी घनी झाड़ियों और जंगली पौधों के कारण मोड़ पर सामने से आने वाले वाहनों का दृश्य बाधित होता है। यह दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण बन रहा है।
इसके अलावा हाईवे पर पर्याप्त संकेतक, स्ट्रीट लाइट और स्पीड कंट्रोल उपायों की कमी भी हादसों की संख्या बढ़ा रही है।
शवों की पहचान में मुश्किल
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके हैं। पुलिस के अनुसार, शवों की पहचान करना बेहद कठिन हो गया है।
शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए चूरू जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है और डीएनए जांच के जरिए पहचान की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।








