मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को इसकी जानकारी दी।
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित गबन के मामले की विस्तृत जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को नई SIT के गठन की जानकारी दी।
नई चार सदस्यीय जांच टीम का नेतृत्व IG रैंक की अधिकारी किरण एस करेंगी। टीम में उनके अलावा दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जिनमें DIG और SP स्तर के अधिकारी बताए गए हैं। जांच को वित्तीय दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टीम का हिस्सा बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट को दो सप्ताह में रिपोर्ट देगी SIT
उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक नई SIT का गठन 25 जुलाई को किया गया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में फोरेंसिक ऑडिट के महत्व पर भी जोर दिया। अदालत के सुझाव पर राज्य सरकार ने जांच टीम में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने नई SIT को मामले की जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत की निगरानी में होने वाली इस प्रक्रिया का उद्देश्य मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करना है।
इस मामले की पिछली सुनवाई 20 जुलाई को हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की जांच के लिए एक नई SIT गठित करने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रारंभिक जांच के लिए बनाई गई टीम में लखनऊ के कमिश्नर, वित्त विभाग के विशेष सचिव और एक वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल थे। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया था कि पहली SIT का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक जांच करना था।
जांच के दौरान कथित गंभीर अपराध के संकेत मिलने के बाद मामले में FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच के लिए नई SIT गठित करने का सुझाव दिया। अदालत की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि जांच टीम में अनुभवी अधिकारियों के साथ वित्तीय मामलों की विशेषज्ञता रखने वाले लोगों को शामिल करना उपयोगी होगा।

फोरेंसिक ऑडिट से वित्तीय लेनदेन की जांच पर जोर
मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट और संभावित फोरेंसिक ऑडिटर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। धार्मिक संस्थानों से जुड़े दान और चढ़ावे के मामलों में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, रसीदों और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए विशेषज्ञ ऑडिट की जरूरत पड़ सकती है। नई SIT जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की पड़ताल कर सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी व्यक्ति या संस्था पर लगे आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
राम मंदिर ट्रस्ट ने बनाई स्थायी धार्मिक समिति
इसी बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर एक स्थायी समिति के गठन को भी मंजूरी दी है। नौ सदस्यीय यह समिति मंदिर में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़े मामलों की देखरेख करेगी। ट्रस्ट के मुताबिक समिति में प्रमुख हिंदू धर्मगुरुओं, धार्मिक विद्वानों और रामानंदी परंपरा से जुड़े संतों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य मंदिर में होने वाली दैनिक पूजा, प्रमुख धार्मिक पर्वों, वैदिक अनुष्ठानों और पारंपरिक पूजा पद्धति से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन और निर्णय लेना है।
समिति की अध्यक्षता ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि करेंगे। इसमें जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, पेजावर मठ के स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास, मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास और अन्य संत एवं धर्माचार्य शामिल हैं।











