उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में गणपति विसर्जन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। करणी सेना के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपकर उत्तराखंड में भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड को भगवान गणेश की जन्मस्थली माना जाता है और इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर प्रदेश में गणपति की प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा पर रोक लगाने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए।
करणी सेना की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से भी इस संबंध में कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। संगठन का तर्क है कि भगवान गणेश से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और उत्तराखंड की आस्था को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन की गतिविधि को रोका जाना चाहिए। रामनगर में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाना है। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार गणेश चतुर्थी के बाद गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को पड़ रही है। ऐसे में करणी सेना की मांग का सीधा संबंध आने वाले गणेशोत्सव और उससे जुड़ी विसर्जन परंपरा से है। संगठन चाहता है कि पर्व के दौरान प्रदेश में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर प्रशासन पहले से स्पष्ट व्यवस्था करे और उसकी मांग पर सरकार स्तर से निर्णय लिया जाए।
गणपति उत्सव देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के बाद कई स्थानों पर पूजा-अर्चना, भजन, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके बाद निर्धारित अवधि पूरी होने पर प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। उत्तराखंड में भी पिछले वर्षों में गणपति उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन से जुड़े कार्यक्रम हुए हैं। रामनगर में वर्ष 2024 में भी गणपति विसर्जन शोभायात्रा निकाले जाने की खबर सामने आई थी।
इसी परंपरा के बीच करणी सेना की ओर से विसर्जन पर रोक लगाने की मांग ने धार्मिक मान्यता और सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड में भगवान गणेश की जन्मस्थली होने की मान्यता को देखते हुए यहां उनकी प्रतिमाओं को जल में विसर्जित करने की परंपरा पर विचार होना चाहिए। ज्ञापन के जरिए संगठन ने प्रशासन से अपनी बात सरकार के उच्च स्तर तक पहुंचाने की मांग की है।
रामनगर में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में धार्मिक और सांस्कृतिक तर्क रखे। उनका कहना है कि किसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने से पहले उस क्षेत्र की स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक महत्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। करणी सेना ने इसी आधार पर प्रदेश में गणपति प्रतिमा विसर्जन की परंपरा पर रोक लगाने की मांग रखी है।
हालांकि, यह मांग फिलहाल एक संगठन की ओर से प्रशासन के सामने रखी गई मांग है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उत्तराखंड सरकार ने गणपति विसर्जन पर कोई रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। अभी प्रशासन या सरकार की ओर से इस मांग को स्वीकार करने अथवा पूरे प्रदेश में विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कोई निर्णय सामने नहीं आया है। इसलिए वर्तमान स्थिति में इसे करणी सेना की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
इस मामले में प्रशासन के सामने एक चुनौती यह भी होगी कि धार्मिक मान्यताओं, स्थानीय आस्था, परंपराओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ देखा जाए। यदि आने वाले गणेशोत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो प्रशासन को आयोजनकर्ताओं के साथ समन्वय कर व्यवस्था करनी होगी। वहीं करणी सेना की ओर से रखी गई मांग पर सरकार क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकता है।
उत्तराखंड में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की संख्या काफी अधिक है। हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, देहरादून और अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के आयोजन होते हैं। गणेश चतुर्थी भी कई स्थानों पर श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है। ऐसे में इस साल गणेशोत्सव को लेकर तैयारियों के बीच यह मांग सामने आने से स्थानीय प्रशासन के सामने एक नया विषय जरूर आया है।
रामनगर में पहले भी गणपति विसर्जन से जुड़े सार्वजनिक आयोजन हो चुके हैं। 2024 में रामनगर में गणपति महोत्सव के बाद विसर्जन शोभायात्रा निकाले जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इसमें धार्मिक आयोजन के बाद प्रतिमा विसर्जन की परंपरा का उल्लेख किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में गणपति उत्सव और विसर्जन कोई पूरी तरह नई गतिविधि नहीं है। अब करणी सेना की ओर से इसी परंपरा को रोकने की मांग किए जाने के बाद इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
करणी सेना के ज्ञापन में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक का उल्लेख किए जाने से यह भी संकेत मिलता है कि संगठन इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता। संगठन चाहता है कि प्रदेश सरकार और पुलिस के शीर्ष अधिकारी इस मामले पर विचार करें और पूरे उत्तराखंड के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था या निर्णय लिया जाए। हालांकि, इस मांग पर सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाएगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
गणपति विसर्जन को लेकर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी कई जगह चर्चा का विषय रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थान, कृत्रिम तालाब या अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। हालांकि, रामनगर के इस मामले में करणी सेना की वर्तमान मांग मुख्य रूप से धार्मिक मान्यता और उत्तराखंड को भगवान गणेश की जन्मस्थली मानने के तर्क पर आधारित बताई गई है। उपलब्ध खबर में संगठन की ओर से किसी अलग पर्यावरणीय आधार का उल्लेख नहीं है।
इस विवाद का अगला चरण प्रशासन के रुख पर निर्भर करेगा। उप जिलाधिकारी को ज्ञापन दिए जाने के बाद मांग संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकती है। यदि प्रशासन संगठन से विस्तृत पक्ष मांगता है या सरकार स्तर पर इस संबंध में कोई बैठक होती है, तो आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। वहीं गणेश चतुर्थी नजदीक होने के कारण स्थानीय स्तर पर प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर आयोजनकर्ताओं की तैयारियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
फिलहाल रामनगर में सामने आए घटनाक्रम का सार यही है कि करणी सेना ने उत्तराखंड में गणपति भगवान की प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगाने की मांग उठाई है। संगठन के पदाधिकारियों ने उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान को ज्ञापन देकर अपनी बात रखी है और मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक से भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड भगवान गणेश की जन्मस्थली है, इसलिए यहां गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा पर रोक लगाई जानी चाहिए।
वहीं उपलब्ध स्वतंत्र जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी और गणेश विसर्जन के लिए 25 सितंबर की तारीख बताई गई है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में प्रशासन और सरकार का रुख इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण रहेगा। अभी तक पूरे प्रदेश में गणपति विसर्जन पर रोक लगाए जाने का कोई सरकारी आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए इस खबर को फिलहाल करणी सेना की मांग और प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।








