रांची में लंबे समय से बंद पड़े एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट यानी HTI को दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। झारखंड के युवाओं के लिए यह पहल तकनीकी शिक्षा और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कभी औद्योगिक प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे इस संस्थान को नए स्वरूप में शुरू करने के लिए एचईसी प्रबंधन ने प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित कराने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अगली बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद संस्थान की नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग यानी NCVT से संबद्धता दोबारा बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
एचटीआई के दोबारा शुरू होने की खबर उन युवाओं के लिए खास महत्व रखती है जो औद्योगिक क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करना चाहते हैं। फिलहाल झारखंड के कई युवाओं को बेहतर औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। यदि रांची में एचटीआई दोबारा अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करता है तो युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रशिक्षण के लिए होने वाला अतिरिक्त खर्च और दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी भी कम हो सकती है।
एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का पुराना इतिहास भी इस पहल को महत्वपूर्ण बनाता है। यहां पहले आईटीआई स्तर पर इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर जैसे ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड दो वर्ष के थे, जबकि कोपा और वेल्डर का प्रशिक्षण एक वर्ष का होता था। संस्थान में दो शिफ्ट में प्रशिक्षण चलता था और पांचों ट्रेडों को मिलाकर हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था। यानी यह संस्थान केवल प्रशिक्षण देने वाला केंद्र नहीं था, बल्कि झारखंड में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में काम करता था।
एचटीआई में प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा आगे चलकर एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर चुके हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में भी काम करने की जानकारी सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संस्थान में मिलने वाला प्रशिक्षण युवाओं को सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार तक सीमित नहीं करता था, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक अवसरों के लिए तैयार करता था। ऐसे में अगर संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप दोबारा विकसित किया जाता है तो इससे आने वाले समय में झारखंड के तकनीकी युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
एचईसी प्रबंधन की योजना के मुताबिक पहले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई जाएगी। इसके बाद NCVT से संस्थान की संबद्धता बहाल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। संबद्धता बहाल होने के बाद संस्थान को नए तरीके से संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि एचटीआई को केवल पुराने ढांचे के साथ दोबारा खोलने की कोशिश नहीं होगी, बल्कि उपलब्ध संसाधनों और बदलती औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था को नए स्वरूप में तैयार करने की संभावना है।
झारखंड जैसे औद्योगिक राज्य में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बनी रहती है। राज्य में भारी उद्योग, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, खनन और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिशियन, मशीनिस्ट, फीटर और वेल्डर जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में काम के अवसर बन सकते हैं। एचटीआई के पुनरुद्धार से स्थानीय स्तर पर कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रशिक्षण और उद्योग के बीच की दूरी कम की जा सकती है। अगर संस्थान में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया जाता है तो विद्यार्थी केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मशीनों और औद्योगिक उपकरणों के साथ काम करने का अनुभव भी हासिल कर सकेंगे। ऐसे प्रशिक्षण से युवाओं को नौकरी के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि एचटीआई को दोबारा शुरू करने के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी हैं। संस्थान में लंबे समय से नया नामांकन बंद है। एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में इसका संचालन प्रभावित हुआ और वर्ष 2022-23 से नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद धीरे-धीरे संस्थान के ट्रेडों की NCVT संबद्धता भी समाप्त होती चली गई। पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता खत्म हुई और बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर तथा मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह संस्थान में चलने वाले सभी पांच ट्रेड बंद हो गए।
वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात बताए गए हैं। ऐसे में संस्थान को दोबारा सक्रिय करने के लिए केवल प्रशिक्षण शुरू करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कर्मचारियों, प्रशिक्षकों, उपकरणों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करना होगा। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वर्षों से बंद पड़े संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना को किस स्थिति में वापस प्रशिक्षण के योग्य बनाया जा सकता है।
एचटीआई परिसर में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें मौजूद हैं। लेकिन लंबे समय तक संस्थान के बंद रहने के कारण इन उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। यहां तक कि संस्थान का ट्रांसफार्मर भी गायब होने की बात कही गई है। मशीनों के मोटर, दूसरे उपकरण और लेथ मशीनों के कुछ पुर्जों के चोरी होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में संस्थान को पुनर्जीवित करने की योजना में सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
अगर निजी एजेंसी के माध्यम से संस्थान का संचालन शुरू होता है तो उपलब्ध मशीनों और बुनियादी ढांचे का फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए पहले उपकरणों की स्थिति का आकलन करना होगा। जो मशीनें काम करने की स्थिति में हैं, उन्हें प्रशिक्षण में लगाया जा सकता है, जबकि खराब या क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार नए उपकरणों की व्यवस्था करनी होगी। प्रशिक्षण को वर्तमान औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
युवाओं के लिए इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि उन्हें अपने घर और राज्य के नजदीक ही तकनीकी प्रशिक्षण का अवसर मिले। दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण लेने के लिए फीस के अलावा रहने, खाने और यात्रा का खर्च भी उठाना पड़ता है। रांची में संस्थान शुरू होने पर स्थानीय और आसपास के जिलों के विद्यार्थी अपेक्षाकृत कम खर्च में औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को भी तकनीकी शिक्षा हासिल करने का बेहतर अवसर मिल सकता है।
रोजगार के नजरिए से देखें तो प्रशिक्षण के बाद युवाओं के लिए एचईसी के साथ-साथ निजी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों, इंजीनियरिंग इकाइयों और तकनीकी सेवा क्षेत्र में अवसर तलाशना आसान हो सकता है। हालांकि प्रशिक्षण पूरा करना अपने आप में नौकरी की गारंटी नहीं है, लेकिन औद्योगिक ट्रेड में मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण और व्यावहारिक कौशल युवाओं की रोजगार क्षमता को जरूर मजबूत कर सकता है।
एचटीआई का पुनरुद्धार ऐसे समय में प्रस्तावित है जब तकनीकी कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उद्योगों में मशीनों और तकनीक का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसलिए संस्थान को दोबारा शुरू करते समय पुराने ट्रेडों के साथ-साथ आधुनिक औद्योगिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा। इससे प्रशिक्षुओं को बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, एचईसी के कर्मचारियों से जुड़े कुछ लंबित वित्तीय मामलों का भी मामला मंत्रालय तक पहुंचा है। एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड यानी VPF अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मुद्दा भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के संबंधित सीपीएसई-एचईसी अनुभाग ने एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। यह मामला भी संस्थान के पुनरुद्धार से जुड़े व्यापक एचईसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
मंत्रालय को भेजे गए मामले में एचईसी कर्मचारी और श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से 6 सितंबर को भेजे गए ई-मेल का भी उल्लेख किया गया है। इसमें VPF अंशदान की वापसी और कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए थे। मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन के पास भेजते हुए अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। अब इस मामले में प्रबंधन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर कर्मचारियों की नजर बनी हुई है।
एचटीआई के दोबारा शुरू होने की योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्थान के पास पहले से प्रशिक्षण का अनुभव, भवन और मशीनरी का आधार मौजूद है। चुनौती इन संसाधनों को फिर से सक्रिय करने की है। यदि बोर्ड की मंजूरी, NCVT संबद्धता और संचालन के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो वर्षों से बंद पड़े संस्थान में फिर से प्रशिक्षण शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है।
झारखंड के युवाओं के लिए यह पहल सिर्फ एक पुराने प्रशिक्षण संस्थान को खोलने तक सीमित नहीं होगी। इसके सफल होने पर रांची में तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र फिर से सक्रिय हो सकता है। हर साल करीब 200 युवाओं को प्रशिक्षण देने की पुरानी क्षमता को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे राज्य में कुशल तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने और युवाओं को निजी तथा औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल एचटीआई को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव एचईसी बोर्ड के सामने रखा जाना है। बोर्ड की मंजूरी के बाद NCVT संबद्धता बहाल कराने और संचालन के लिए एजेंसी चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए संस्थान के दोबारा खुलने की अंतिम तस्वीर इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन प्रस्ताव सामने आने से वर्षों से बंद पड़े एचटीआई के फिर से सक्रिय होने और झारखंड के युवाओं को तकनीकी हुनर का स्थानीय ठिकाना मिलने की उम्मीद जरूर बढ़ी है।











