रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, 10 दिन बाद सरकार बातचीत को तैयार

रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं मे अनियमितताओं के खिलाफ 10 दिन से जारी छात्र आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत को तैयार

झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र पिछले 10 दिनों से शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे हैं। सरकार ने अब उच्च स्तरीय समिति बनाकर आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत करने और उनकी मांगों पर विचार करने का फैसला किया है।

रांची: झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम पिछले दस दिनों से राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक का केंद्र बना हुआ है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोपों को लेकर हजारों अभ्यर्थी लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार और योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है।

लगातार बढ़ते जनसमर्थन और आंदोलन की व्यापक चर्चा के बाद झारखंड सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो आंदोलनकारियों की मांगों को सुनेगी और समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी।

सरकार बनाएगी हाई लेवल कमेटी

राज्य सरकार के अनुसार प्रस्तावित समिति की निगरानी उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल करेंगी। समिति में कई मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सरकार का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों को विस्तार से सुनना, उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करना है। समिति के गठन की अधिसूचना जल्द जारी किए जाने की संभावना है।

आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता रही अनुशासन

यह आंदोलन देश के अन्य छात्र आंदोलनों से कई मायनों में अलग माना जा रहा है। पिछले दस दिनों के दौरान प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है। न तो किसी प्रकार की हिंसा हुई, न सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और न ही पुलिस बल प्रयोग की स्थिति बनी।

आंदोलनकारी छात्रों ने स्वयं एक आचार संहिता तैयार की है। इसके तहत मंच से राजनीतिक, धार्मिक या जातीय टिप्पणियों पर रोक लगाई गई है। वक्ताओं को केवल परीक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ही बोलने की अनुमति है। व्यक्तिगत आरोपों और आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग से भी बचने के निर्देश दिए गए हैं।

राजनीतिक दलों की सीधी भागीदारी पर रोक

आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि छात्रों ने राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी पर रोक लगा रखी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों के नेतृत्व में रहे और इसका मूल उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद के बजाय भर्ती प्रणाली में सुधार बना रहे।

हालांकि विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है, लेकिन प्रदर्शन का संचालन और निर्णय प्रक्रिया छात्रों के हाथ में ही बनी हुई है।

देशभर से मिल रहा समर्थन

आंदोलन को अब झारखंड के बाहर भी समर्थन मिलने लगा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार दिल्ली, गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से लोग ऑनलाइन माध्यम से सहयोग कर रहे हैं। छात्रों के लिए भोजन और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों द्वारा की जा रही है।

स्थानीय संस्थाएं भी लगातार भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, जिससे आंदोलनकारी बिना किसी बड़ी आर्थिक कठिनाई के अपना सत्याग्रह जारी रखे हुए हैं।

विभिन्न संगठनों ने बनाई अलग रणनीति

JPSC-JSSC सुधार मंच, अभ्यर्थी न्याय मंच और छात्र संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। आने वाले दिनों में विधानसभा मार्च, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार के साथ बातचीत से सकारात्मक परिणाम नहीं निकलते हैं तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

भूख हड़ताल भी जारी

अभ्यर्थी न्याय मंच के नेता देवेंद्र महतो लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलनकारी नेताओं ने अपील की है कि सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहें और किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

छात्रों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, आयोगों में नियुक्तियों की पारदर्शिता, लंबित भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर जारी करना, आयु सीमा में आवश्यक छूट देना और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।

छात्रों का कहना है कि पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया लाखों युवाओं के भविष्य के लिए आवश्यक है।

सामाजिक समर्थन भी बढ़ा

छात्र आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया और शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील की। हालांकि आंदोलन का संचालन पूरी तरह छात्रों के हाथ में ही बना हुआ है।

आगे क्या?

सरकार द्वारा प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली बातचीत अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण चरण होगी। यदि दोनों पक्ष समाधान की दिशा में सहमत होते हैं तो भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद का रास्ता निकल सकता है। वहीं यदि वार्ता निष्कर्ष तक नहीं पहुंचती, तो आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच होने वाले संवाद पर टिकी हुई है।

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