पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र के मतदाताओं से विकास और रोजगार के मुद्दों पर मतदान की अपील की। बीजेपी उम्मीदवार शंखराव सरकार के समर्थन में उन्होंने विपक्ष के बिखरे होने का भी मुद्दा उठाया।
रेजीनगर: पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार तेज हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शंखराव सरकार के समर्थन में प्रचार किया। मुस्लिम बहुल रेजीनगर में आयोजित सभा के दौरान अधिकारी ने मतदाताओं से धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय विकास और रोजगार के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच बंटवारे का जिक्र करते हुए मतदाताओं से अपना वोट बिखरने नहीं देने की अपील भी की।
रेजीनगर में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। यह सीट आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है।
शुभेंदु अधिकारी ने क्या अपील की?
चुनावी सभा में शुभेंदु अधिकारी ने रेजीनगर के मतदाताओं से कहा कि चुनाव को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देखने के बजाय विकास, रोजगार और सरकारी सुविधाओं के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के बीच मौजूद राजनीतिक विभाजन का उल्लेख करते हुए मतदाताओं से “बंटे हुए विपक्ष” को वोट नहीं देने की अपील की।
अधिकारी ने रेजीनगर को विकास के मामले में एक “मॉडल विधानसभा क्षेत्र” बनाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी उम्मीदवार शंखराव सरकार चुनाव जीतते हैं, तो वह स्वयं क्षेत्र के विकास की निगरानी करेंगे। उनके मुताबिक रेजीनगर को नंदीग्राम और भवानीपुर की तरह विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
यह अपील खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेजीनगर में मुस्लिम आबादी बड़ी है और चुनावी मुकाबले में कई राजनीतिक दल और गुट मैदान में हैं।
‘70:30’ की राजनीति पर भी बोले मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण में विपक्ष की ओर से कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘70:30’ के नैरेटिव का भी उल्लेख किया। उन्होंने मतदाताओं से इस तरह की धार्मिक गणित वाली राजनीति पर ध्यान नहीं देने को कहा और विकास को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने की बात कही।
अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में विकास के लिए सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी जरूरतों पर काम किया जाएगा। उन्होंने रेजीनगर में एक नेताजी सुभाष सेवा केंद्र स्थापित करने का भी वादा किया, जिसके जरिए लोगों को सरकारी सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने की बात कही।
40 हजार प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का दावा
मुख्यमंत्री ने चुनावी सभा में रोजगार और पलायन को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार अगले दो वर्षों में रेजीनगर क्षेत्र से बाहर काम करने के लिए गए करीब 40 हजार मजदूरों को वापस लाने का प्रयास करेगी।
उन्होंने अगले छह महीनों में क्षेत्र के लोगों को 125 दिनों का काम उपलब्ध कराने की बात भी कही। इसके अलावा रेजीनगर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का वादा किया गया। अधिकारी के मुताबिक, इसके लिए जमीन की पहचान की जा चुकी है और लगभग डेढ़ वर्ष में वहां कारखाने शुरू होने की उम्मीद है।
हालांकि, ये सभी घोषणाएं चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा किए गए राजनीतिक वादे हैं। इनके क्रियान्वयन की स्थिति और समयसीमा भविष्य में सरकारी फैसलों तथा बजटीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का वादा
शुभेंदु अधिकारी ने रेजीनगर के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी कई घोषणाएं कीं। उन्होंने क्षेत्र में अस्पताल और शैक्षणिक सुविधाओं को विस्तार देने की बात कही।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने चुनावी सभा में कॉलेज, पुल और 200 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन विकास परियोजनाओं को रेजीनगर को मॉडल विधानसभा क्षेत्र बनाने की योजना का हिस्सा बताया।
अधिकारी ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया और दावा किया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ देते समय समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
आयुष्मान और अन्नपूर्णा योजना के आंकड़ों का जिक्र
चुनावी सभा में अधिकारी ने दावा किया कि रेजीनगर क्षेत्र के करीब 2,01,555 लोगों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया गया है। उन्होंने इनमें लगभग 40 हजार प्रवासी मजदूरों के शामिल होने की बात कही।
उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 70 हजार महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिल रहा है। उनके मुताबिक इनमें लगभग 35 हजार महिलाएं अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं।
इन आंकड़ों का उल्लेख अधिकारी ने अपने चुनावी भाषण में सरकारी योजनाओं की पहुंच को रेखांकित करने के लिए किया।
हुमायूं कबीर के बयान पर प्रतिक्रिया
शुभेंदु अधिकारी ने रेजीनगर के पूर्व विधायक और AJUP संस्थापक हुमायूं कबीर से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कबीर के एक कथित बयान की आलोचना की, जिसमें अधिकारी के जल्द “दुनिया से चले जाने” की प्रार्थना करने की बात कही गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक असहमति और विचारों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत हमलों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेजीनगर की जनता अपने वोट के माध्यम से प्रतिक्रिया देगी।
हुमायूं कबीर ने रेजीनगर सीट खाली की है। इसके बाद होने वाले उपचुनाव में उन्होंने अपने बेटे गोलाम नबी आजाद को AJUP उम्मीदवार बनाया है।
तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना
अधिकारी ने अपने भाषण में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों को भी चुनावी मुद्दा बनाया। रेजीनगर में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के अलावा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला एक अलग तृणमूल गुट भी चुनाव मैदान में है।
उन्होंने वाम दलों और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया। साथ ही, पिछली तृणमूल सरकार के दौरान नौकरियों, मनरेगा और आवास योजनाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए।
इन आरोपों को अधिकारी के राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न दल एक-दूसरे की नीतियों और शासन के रिकॉर्ड पर सवाल उठा रहे हैं।
रेजीनगर में कई दलों के बीच मुकाबला
रेजीनगर उपचुनाव में मुकाबला केवल BJP और तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं है। आधिकारिक उम्मीदवारों के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार BJP ने शंखराव सरकार, कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी, CPI(M) ने सैयद असद अली, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। AJUP की ओर से गोलाम नबी आजाद मैदान में हैं।
इसके अलावा अन्य उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी मुकाबले की अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की सूची और क्षेत्र में चल रहे प्रचार से तय होगी।
6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को नतीजे
निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना की जाएगी। नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी इसी दिन उपचुनाव होना है।
रेजीनगर सीट का उपचुनाव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीनों बाद हो रहा है। ऐसे में यहां का चुनावी मुकाबला राज्य की नई राजनीतिक परिस्थितियों में पहला महत्वपूर्ण परीक्षण भी माना जा रहा है। हालांकि, किसी उपचुनाव के परिणाम से राज्य की व्यापक राजनीतिक दिशा के बारे में स्वतः निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
SIR की अपीलों का मुद्दा भी चर्चा में
रेजीनगर उपचुनाव के दौरान मतदाता सूची से जुड़े Special Intensive Revision (SIR) के मामलों पर भी नजर है। रिपोर्टों के मुताबिक, रेजीनगर में 12 हजार से अधिक SIR अपीलें लंबित हैं। नंदीग्राम में भी 6 हजार से अधिक ऐसी अपीलें लंबित बताई गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को पश्चिम बंगाल में लंबित SIR अपीलों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई को उपचुनाव से पहले कराने की मांग स्वीकार नहीं की थी। इससे लंबित मामलों का मुद्दा भी चुनावी प्रक्रिया के बीच चर्चा में बना हुआ है।
रेजीनगर में विकास बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण
रेजीनगर में BJP के प्रचार अभियान में शुभेंदु अधिकारी ने विकास, रोजगार, पलायन और सरकारी योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है। साथ ही उन्होंने धार्मिक आधार पर वोट के विभाजन से बचने की अपील की है और विपक्षी दलों के बीच बंटवारे को चुनावी मुद्दा बनाया है।
दूसरी ओर, रेजीनगर में कई दलों और तृणमूल कांग्रेस के अलग-अलग गुटों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। ऐसे में 6 अक्टूबर को होने वाला मतदान क्षेत्र के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद को सामने रखेगा। मतगणना के बाद 9 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।










