NEET पेपर लीक केस में स्पीडी ट्रायल शुरू, 53 आरोपितों पर सुनवाई; पहले दिन NTA DG की गवाही

पटना CBI कोर्ट में NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले के 53 आरोपितों का स्पीडी ट्रायल शुरू हुआ। पहले दिन NTA DG प्रदीप सिंह कारोला की गवाही हुई।
NEET पेपर लीक केस में स्पीडी ट्रायल शुरू, 53 आरोपितों पर सुनवाई; पहले दिन NTA DG की गवाही
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पटना में नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र लीक मामले की न्यायिक प्रक्रिया अब तेज हो गई है। पटना की सीबीआई विशेष अदालत में 53 आरोपितों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल शुरू हो चुका है। ट्रायल के पहले दिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक प्रदीप सिंह कारोला अदालत में बतौर गवाह पेश हुए। सीबीआई और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने उनसे पूछताछ की और उनकी गवाही पूरी हो गई। मामले की अगली सुनवाई अब सात अक्टूबर को होगी।

नीट-यूजी 2024 का प्रश्नपत्र लीक मामला देश की सबसे चर्चित परीक्षा अनियमितता से जुड़े मामलों में रहा है। पांच मई 2024 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की सूचना सामने आने के बाद बिहार में पुलिस कार्रवाई शुरू हुई थी। पटना के शास्त्री नगर थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई। शुरुआती जांच के बाद मामला आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू तक पहुंचा और बाद में केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी। अब इसी मामले में अदालत के सामने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सीबीआई की ओर से इस मामले में 54 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। विशेष अदालत ने 24 सितंबर 2026 को 52 आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद अब 53 आरोपितों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की कार्यवाही शुरू हुई है। एक आरोपित अभी फरार बताया गया है। अदालत ने उसके मामले को अलग करते हुए उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है।

ट्रायल के पहले दिन एनटीए महानिदेशक प्रदीप सिंह कारोला की गवाही को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नीट-यूजी परीक्षा के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में एनटीए की भूमिका मामले की जांच का एक प्रमुख हिस्सा रही है। अदालत में गवाह से सीबीआई और बचाव पक्ष दोनों की ओर से सवाल किए गए। गवाही पूरी होने के बाद अब मुकदमे में अन्य गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नीट-यूजी 2024 परीक्षा पांच मई 2024 को देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा के दिन ही पटना में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। शास्त्री नगर थाने के तत्कालीन प्रभारी अमर कुमार की कार्रवाई के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुरुआती स्तर पर गिरफ्तारियों के बाद जांच को बिहार आर्थिक अपराध इकाई को सौंपा गया। जांच आगे बढ़ने पर प्रश्नपत्र लीक और उससे जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई की जांच के अनुसार मामले में प्रश्नपत्र के लीक होने और कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले पहुंचने से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई। सीबीआई की चार्जशीट के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों में हजारीबाग के एक परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की कथित चोरी और उसके बाद उसे हल कर संबंधित लोगों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि ट्रायल के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों और अदालत के निर्णय से ही होगी।

जांच एजेंसी की चार्जशीट से जुड़े विवरणों के अनुसार, पांच मई 2024 को हजारीबाग के एक परीक्षा केंद्र में प्रश्नपत्रों के रखे जाने और उनकी सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम की जांच की गई थी। जांच में यह आरोप सामने आया कि प्रश्नपत्र की डिजिटल प्रतियां तैयार की गईं और बाद में कथित तौर पर उन्हें हल कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी ने इस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग आरोपितों के बीच कथित साजिश और संपर्क से जोड़ते हुए अदालत में अपना पक्ष रखा है।

मामले की जांच के दौरान बिहार के पटना से लेकर झारखंड के हजारीबाग तक कई कड़ियों की पड़ताल की गई। सीबीआई की चार्जशीट से संबंधित प्रकाशित विवरणों में परीक्षा केंद्र, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, कथित तौर पर प्रश्नपत्र की तस्वीर लेने और उसके बाद हल किए गए प्रश्नपत्र को आगे भेजने जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी ने इन घटनाओं के आधार पर आरोपितों की भूमिका तय करने का प्रयास किया।

इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि परीक्षा शुरू होने से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र की जानकारी कुछ लोगों तक पहुंची या नहीं और यदि पहुंची तो वह किस माध्यम से पहुंची। जांच एजेंसी ने मोबाइल फोन, डिजिटल सामग्री, बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की मदद से घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश की। सीबीआई की चार्जशीट में कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों का उल्लेख है।

परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी इस मामले ने सवाल खड़े किए थे। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में एनटीए के अधिकारियों की गवाही और चार्जशीट में दर्ज बयानों के आधार पर परीक्षा प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित कुछ कमियों का उल्लेख किया गया था। इन बयानों और साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन भी अदालत की कार्यवाही में ही होना है।

नीट-यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में लाखों विद्यार्थी शामिल होते हैं। इसलिए प्रश्नपत्र की सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता का महत्व बहुत अधिक है। मामले में स्पीडी ट्रायल शुरू होने से अब जांच एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य अदालत के सामने क्रमवार रखे जाएंगे। गवाहों से पूछताछ, दस्तावेज पेश किए जाने और बचाव पक्ष की जिरह के जरिए मामले के अलग-अलग पहलुओं पर अदालत में विचार होगा।

ट्रायल शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो चुके हैं। अदालत में अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे और बचाव पक्ष को उनका प्रतिवाद करने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम निष्कर्ष न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय किया जाएगा।

मामले में एक आरोपित के फरार होने की स्थिति भी अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा है। उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है और उसका मामला बाकी आरोपितों से अलग कर दिया गया है। वहीं, जिन 53 आरोपितों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल शुरू हुआ है, उनके मामले में अब गवाहों की पेशी का सिलसिला आगे बढ़ेगा। अगली सुनवाई सात अक्टूबर को निर्धारित है।

अदालत की ओर से स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाली सुनवाइयों में सीबीआई कितने गवाह पेश करती है और किन दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों को अदालत के सामने रखती है। इसी तरह बचाव पक्ष की ओर से इन साक्ष्यों पर क्या आपत्तियां और सवाल उठाए जाते हैं, यह भी मुकदमे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कई स्तरों से होकर अदालत तक पहुंची है। शुरुआत में पटना पुलिस की प्राथमिकी, फिर बिहार ईओयू की जांच और उसके बाद सीबीआई की जांच ने मामले को व्यापक रूप दिया। केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई जांच सौंपे जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने देश के अलग-अलग स्थानों से जुड़े घटनाक्रमों की जांच की और आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की 2024 की कार्यवाही का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दो अगस्त 2024 के अपने निर्णय में उस समय उपलब्ध सामग्री के आधार पर परीक्षा में किसी व्यापक स्तर के सिस्टमेटिक लीक या बड़े पैमाने की ऐसी अनियमितता को स्थापित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं पाई थी। बाद की आपराधिक जांच और अब चल रहे ट्रायल का दायरा संबंधित आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत में तय होना है।

अब स्पीडी ट्रायल शुरू होने के साथ करीब दो साल पुराने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण की शुरुआत हो गई है। पहले दिन एनटीए महानिदेशक की गवाही पूरी होना अभियोजन पक्ष के लिए गवाह पेश करने की प्रक्रिया की शुरुआत है। आने वाले दिनों में अन्य गवाहों और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा। सात अक्टूबर की सुनवाई में आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

नीट-यूजी 2024 से जुड़े इस मामले का फैसला उन साक्ष्यों पर निर्भर करेगा जो ट्रायल के दौरान अदालत के सामने पेश किए जाएंगे। फिलहाल अदालत ने 53 आरोपितों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि एक आरोपित फरार है और उसका मामला अलग रखा गया है। पहले दिन एनटीए महानिदेशक प्रदीप सिंह कारोला की गवाही के साथ शुरू हुई यह प्रक्रिया अब आगे के गवाहों, दस्तावेजों और बचाव पक्ष की दलीलों के जरिए आगे बढ़ेगी।

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