रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं। उनके निधन से उद्योग जगत में शोक की लहर फैल गई है।
New Delhi: Vijaypat Singhania का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनका निधन शनिवार शाम मुंबई में हुआ, जिसकी पुष्टि उनके परिवार ने की है। Gautam Singhania ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह जानकारी साझा की। रेमंड समूह के प्रवक्ता के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। उनके निधन की खबर से उद्योग जगत में शोक का माहौल है।
दो दशकों तक रेमंड का नेतृत्व
विजयपत सिंघानिया ने साल 1980 में Raymond Group की कमान संभाली थी और करीब 20 वर्षों तक चेयरमैन के रूप में कंपनी का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में रेमंड ने देश के प्रमुख वस्त्र ब्रांड्स में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
साल 2000 तक उन्होंने कंपनी को एक नए स्तर पर पहुंचाया और बदलते बाजार के हिसाब से उसे तैयार किया। उनके फैसलों की वजह से रेमंड ने प्रतिस्पर्धा के दौर में खुद को मजबूती से स्थापित किया।
बेटे को सौंपी कंपनी की जिम्मेदारी
साल 2015 में विजयपत सिंघानिया ने अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया को ट्रांसफर कर दी थी। इसके बाद कंपनी की पूरी जिम्मेदारी गौतम सिंघानिया के हाथों में आ गई।
यह फैसला उनके जीवन का एक अहम मोड़ था, जहां उन्होंने अपने उत्तराधिकारी को कंपनी की बागडोर सौंपते हुए खुद पीछे हटने का निर्णय लिया।
कितनी संपत्ति छोड़ गए
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विजयपत सिंघानिया अपने पीछे लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ गए हैं। हालांकि, उन्होंने अपने जीवनकाल में ही अपनी कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी अपने बेटे को दे दी थी, जिससे संपत्ति का बड़ा हिस्सा पहले ही ट्रांसफर हो चुका था।
यह भी उल्लेखनीय है कि आर्थिक उदारीकरण से पहले ही उन्होंने रेमंड को इस तरह तैयार किया कि कंपनी बदलते बाजार में टिक सके और आगे बढ़ सके।
पिता-पुत्र के बीच विवाद
कुछ साल पहले विजयपत सिंघानिया और गौतम सिंघानिया के बीच संपत्ति और कंपनी को लेकर विवाद सामने आया था। यह मामला कानूनी रूप तक भी पहुंचा था, जिसने काफी चर्चा बटोरी थी। हालांकि बाद में दोनों के बीच समझौता हो गया और यह विवाद सुलझा लिया गया। इसके बाद परिवार और कंपनी के स्तर पर स्थिति सामान्य हो गई।
पद्म भूषण से सम्मानित
विजयपत सिंघानिया को उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके उद्योग और समाज में दिए गए योगदान को दर्शाता है। उनकी पहचान सिर्फ एक उद्योगपति के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी रही, जिन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई।
पायलट के रूप में भी बनाई पहचान
विजयपत सिंघानिया एक कुशल पायलट भी थे और उन्हें रोमांचक गतिविधियों का शौक था। साल 2005 में उन्होंने हॉट एयर बैलून से लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
इसके अलावा 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक अकेले उड़ान भरकर एक और रिकॉर्ड कायम किया था। यह उपलब्धियां उनके साहसी व्यक्तित्व को दर्शाती हैं।










