हिमाचल कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में मंडी नेताओं को प्रमुख स्थान मिला है। सुक्खू समर्थकों और अन्य गुटों के बीच संतुलन बनाकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश की गई है, जिससे पार्टी में एकजुटता बढ़ने की उम्मीद है।
Mandi: हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Himachal Pradesh Congress Committee) की नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण सामने आए हैं। इस बार टीम में मंडी संसदीय क्षेत्र का प्रभाव पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई दे रहा है। पार्टी ने इस बदलाव के जरिए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक संतुलन और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। नई कार्यकारिणी से यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी अब सभी गुटों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
सुक्खू समर्थकों और होलीलाज के बीच संतुलन
नई टीम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukhu) के समर्थकों और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) के परिवार, जिसे होलीलाज कहा जाता है, के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। लंबे समय से पार्टी के अंदर अलग-अलग गुट सक्रिय रहे हैं, ऐसे में इस बार कार्यकारिणी बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि सभी को प्रतिनिधित्व मिले। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व गुटबाजी को कम करना चाहता है और संगठन को एकजुट रखना चाहता है।
मंडी के नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
नई कार्यकारिणी में मंडी जिले के कई नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, जीवन ठाकुर, चेतराम ठाकुर, परसराम और चंद्रप्रभा नेगी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इन सभी नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में पकड़ मानी जाती है और इन्हें जिम्मेदारी देकर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की गई है। चंद्रप्रभा नेगी को शामिल कर महिला प्रतिनिधित्व को भी जगह दी गई है, जिससे सामाजिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास दिखता है।
महासचिव पद पर सुक्खू खेमे की मौजूदगी
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महासचिव पद पर पवन ठाकुर, अमित भरमौरी, धर्मेंद्र धामी, हरिचंद्र शर्मा, यदोपति ठाकुर, दीपक शर्मा और उपेंद्रकांत को जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया है। अलग-अलग वर्गों और इलाकों से नेताओं को शामिल कर संगठन को मजबूत आधार देने की कोशिश की गई है।
धर्मेंद्र धामी को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के करीबी के रूप में देखा जाता है, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि पार्टी ने विभिन्न नेतृत्व के समर्थकों को शामिल किया है।
दीपक शर्मा की वापसी को मिला महत्व
मंडी जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष दीपक शर्मा को महासचिव बनाया गया है। उनकी नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह बीच में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) में चले गए थे और बाद में कांग्रेस में लौटे। वापसी के बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना यह दिखाता है कि पार्टी अपने पुराने नेताओं को फिर से मौका देने के लिए तैयार है।
दिग्गज नेताओं की अनदेखी
नई कार्यकारिणी में कुछ बड़े नेताओं को जगह नहीं मिलने से चर्चा भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर को इस बार टीम में शामिल नहीं किया गया है, जिससे उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह जोगेंद्रनगर के पूर्व विधायक सुरेंद्र पाल और अमित पाल सिंह को भी मौका नहीं मिला।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर
नई कार्यकारिणी को देखकर साफ है कि पार्टी का फोकस संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर है। ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, जिनकी पकड़ अपने क्षेत्रों में मजबूत है और जो कार्यकर्ताओं के साथ सीधे जुड़े रहते हैं। इसका उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है।









