रोहन और गायब करने वाला रबर: गुस्से की कीमत

रोहन और गायब करने वाला रबर: गुस्से की कीमत

रोहन एक 10 साल का लड़का था जिसे स्कूल का होमवर्क करना और सब्जियाँ खाना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसका कमरा हमेशा बिखरा रहता था। वह अक्सर सोचता था, 'काश! मैं इन बोरिंग चीज़ों को हमेशा के लिए गायब कर सकता।' उसे नहीं पता था कि उसकी यह इच्छा एक छोटे से, अजीब दिखने वाले रबर से पूरी होने वाली थी।

कहानी

एक शाम, रोहन पुरानी बाज़ार में एक स्टेशनरी की दुकान पर पेंसिल खरीदने गया। दुकान बहुत पुरानी थी और वहाँ धूल जमी हुई थी। एक कोने में, उसे एक कांच के जार में एक अजीब सा रबर दिखाई दिया। वह सामान्य रबर से थोड़ा बड़ा था और हल्के नीले रंग का था, जिसमें से हल्की चमक निकल रही थी।

दुकानदार, जो एक बूढ़ा आदमी था, ने कहा, 'बेटा, यह कोई साधारण रबर नहीं है। इसे सोच-समझकर ले जाना।' रोहन ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और रबर खरीद लिया।

घर आकर रोहन अपना गणित (Maths) का होमवर्क करने बैठा। उसे एक सवाल समझ नहीं आ रहा था। झुंझलाकर उसने पेंसिल से कॉपी पर एक बड़ा सा 'कद्दू' (Pumpkin) बना दिया, क्योंकि आज रात खाने में कद्दू की सब्ज़ी बनी थी और उसे वह बिल्कुल पसंद नहीं थी।

फिर उसने उस नए नीले रबर से कद्दू का चित्र मिटा दिया।

जैसे ही चित्र मिटा, रसोई से मम्मी की हैरान आवाज़ आई, 'अरे! अभी तो यहाँ कद्दू रखा था, अचानक कहाँ गायब हो गया?'

रोहन चौंक गया। 'क्या यह सच में रबर का कमाल है?' उसने सोचा।

उसने इसे परखने (test) का फैसला किया। उसने कागज़ पर लिखा 'मेरा स्कूल बैग'। फिर उसने धीरे-धीरे उसे रबर से मिटा दिया। 'फुर्रर्र!' एक हल्की आवाज़ हुई और मेज़ पर रखा उसका भारी-भरकम स्कूल बैग हवा में गायब हो गया!

रोहन खुशी से उछल पड़ा। 'वाह! अब तो मज़ा आ गया। मैं अपनी नापसंद की हर चीज़ गायब कर सकता हूँ!'

अगले दो दिन तक रोहन ने खूब मनमानी की। उसने कागज़ पर 'कड़वी दवाई' लिखा और मिटा दिया दवाई की शीशी गायब। पड़ोस का कुत्ता बहुत भोंकता था, उसने कागज़ पर 'कुत्ता' लिखा और मिटा दिया कुत्ता गायब। उसने अपने गंदे मोजे, अलार्म घड़ी और यहाँ तक कि अपने दाँतों का ब्रश भी गायब कर दिया। उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे ताकतवर बच्चा बन गया है।

लेकिन, कहते हैं न कि जादू के साथ मुसीबत भी आती है।

रविवार की दोपहर, रोहन अपनी छोटी बहन 'मीना' के साथ लूडो खेल रहा था। मीना बार-बार जीत रही थी और रोहन को चिढ़ा रही थी। रोहन को बहुत तेज गुस्सा आया।

बिना सोचे-समझे, उसने अपनी ड्राइंग बुक उठाई, उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा 'मीना'। और गुस्से में उस जादुई रबर को उस नाम पर घिस दिया।

कागज़ से नाम मिट गया। और उसी पल, कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया।

रोहन ने सामने देखा, मीना की कुर्सी खाली थी। मीना गायब हो चुकी थी!

रोहन का गुस्सा पल भर में डर में बदल गया। 'मीना! मीना!' वह चिल्लाया। उसने पूरे घर में ढूँढा, अलमारी के पीछे, पलंग के नीचे, लेकिन मीना कहीं नहीं थी।

शाम को मम्मी-पापा घर आए। वे मीना को न पाकर बहुत परेशान हो गए। घर में रोना-धोना शुरू हो गया। रोहन एक कोने में खड़ा काँप रहा था। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। उसने अपनी प्यारी बहन को सिर्फ़ एक खेल में हारने की वजह से गायब कर दिया था। उसे वो कुत्ता, वो स्कूल बैग, सब याद आए। अब उसे समझ आया कि दुनिया से चीज़ों को गायब कर देना कोई खेल नहीं है।

रोहन दौड़कर अपने कमरे में गया। वह बुरी तरह रो रहा था। उसने काँपते हाथों से वही ड्राइंग बुक उठाई और पेंसिल से वापस लिखने लगा 'मेरी प्यारी बहन मीना'।

जैसे ही उसने लिखना पूरा किया, एक चमकीली रोशनी हुई और 'धप्प' से मीना अपनी कुर्सी पर वापस आ गई। वह रोहन को घूर रही थी, 'भैया, तुम कहाँ चले गए थे? मेरी बारी थी न!'

मीना को कुछ याद नहीं था कि क्या हुआ था। रोहन ने दौड़कर उसे गले लगा लिया। वह इतना खुश पहले कभी नहीं हुआ था।

उस रात, जब सब सो गए, रोहन चुपचाप उठा। वह घर के पीछे वाले बगीचे में गया। उसने एक गहरा गड्ढा खोदा और उस जादुई नीले रबर को उसमें दफना दिया।

अगले दिन सुबह, रोहन को अपना स्कूल बैग, टूथब्रश और यहाँ तक कि पड़ोस का कुत्ता भी वापस मिल गया। उसने राहत की साँस ली। अब उसे होमवर्क करना और कद्दू खाना भी बुरा नहीं लग रहा था, क्योंकि उसका परिवार उसके साथ था।

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'गुस्से में लिया गया कोई भी फैसला हमेशा मुसीबत लाता है। हमारे आस-पास की चीज़ें और लोग, भले ही कभी-कभी हमें परेशान करें, लेकिन वे हमारे जीवन का ज़रूरी हिस्सा हैं। उन्हें अपनी ज़िंदगी से हमेशा के लिए हटा देना सही हल नहीं है।'

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