समस्तीपुर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान महिला सिपाही की मौत, पुलिसकर्मियों ने किया बवाल

समस्तीपुर सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला सिपाही मोनिका कुमारी की मौत हो गई। पति ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जांच की बात कही गई है।
समस्तीपुर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान महिला सिपाही की मौत, पुलिसकर्मियों ने किया बवाल
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समस्तीपुर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला सिपाही की मौत के बाद हंगामे की स्थिति बन गई। महिला सिपाही को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंच गए। महिला सिपाही की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और इलाज को लेकर सवाल उठाए गए। मृतका के पति ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन की ओर से महिला की स्थिति पहले से गंभीर होने की बात कही गई थी और लगाए गए आरोपों की जांच कराने की बात कही गई।

मृत महिला सिपाही की पहचान मोनिका कुमारी के रूप में हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार वह रोसड़ा थाना क्षेत्र के उदयपुर गांव की रहने वाली थीं और उनकी शादी राकेश कुमार से हुई थी। मोनिका वर्ष 2018 में बिहार पुलिस में नियुक्त हुई थीं और घटना के समय मोतिहारी में पदस्थापित थीं। वह उस समय मातृत्व अवकाश पर थीं। उनके पति राकेश कुमार रोसड़ा प्रखंड के मोतीपुर पंचायत में शिक्षक के रूप में कार्यरत बताए गए हैं। परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद रही, क्योंकि प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची महिला सिपाही की इलाज के दौरान मौत हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक मोनिका कुमारी को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद सुबह करीब चार बजे रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्हें समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर जल्दबाजी में सदर अस्पताल पहुंचे। परिवार को उम्मीद थी कि यहां बेहतर इलाज मिलने के बाद उनकी स्थिति संभल जाएगी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। इलाज के दौरान ही महिला सिपाही ने दम तोड़ दिया।

मृतका के पति ने अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि सदर अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पहले सामान्य प्रसव की बात कही थी। परिवार के मुताबिक कुछ ही देर बाद महिला को रेफर करने की बात कही जाने लगी। पति ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी की गंभीर स्थिति के बावजूद जरूरी जांच नहीं कराई गई। उनके अनुसार न तो ब्लड टेस्ट कराया गया और न ही अल्ट्रासाउंड किया गया और सीधे प्रसव की प्रक्रिया की ओर बढ़ा गया। हालांकि ये सभी बातें मृतका के पति की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती।

परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान महिला सिपाही की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे बचाया नहीं जा सका। पति के अनुसार जब उन्होंने अपनी पत्नी की स्थिति देखी तो वह गंभीर अवस्था में थीं और बाद में उनकी मौत हो गई। महिला सिपाही की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। अस्पताल में मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश देखने को मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

महिला सिपाही की मौत के बाद अस्पताल में पुलिसकर्मियों के पहुंचने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इलाज को लेकर उठे सवालों के बीच परिजन जवाब चाहते थे। इस तरह की घटना में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि अस्पताल पहुंचने के समय मरीज की वास्तविक स्थिति क्या थी, कौन-कौन से उपचार किए गए और इलाज के दौरान किन चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। इसी वजह से मामले में मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से संबंधित दस्तावेज काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश ने बताया कि महिला सिपाही को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उनकी स्थिति पहले से ही नाजुक थी। वहीं पति की ओर से अस्पताल प्रशासन पर लगाए गए आरोपों की जांच कराने की बात कही गई। इसका मतलब यह है कि महिला की मौत के वास्तविक कारण और इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

मामले में पोस्टमार्टम भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे मौत के चिकित्सकीय कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती किए जाने से लेकर मौत तक की पूरी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जा सकती है। मरीज को किस समय अस्पताल लाया गया, उसकी स्थिति क्या थी, कौन से उपचार किए गए, कौन सी दवाएं दी गईं और डॉक्टरों ने किस आधार पर इलाज का फैसला लिया, इन सभी बिंदुओं को जांच में देखा जा सकता है।

महिला सिपाही की मौत के बाद अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। प्रसव से संबंधित मामलों में मरीज की स्थिति अचानक गंभीर होने की संभावना रहती है। ऐसे में अस्पताल में समय पर जांच, आवश्यक दवाओं, खून, चिकित्सकीय टीम और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर के उपचार की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में परिवार की ओर से यह आरोप लगाया गया कि आवश्यक जांच नहीं कराई गई, जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना था कि मरीज गंभीर स्थिति में लाई गई थी। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच वास्तविक स्थिति जांच और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।

यह घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि मृतका खुद बिहार पुलिस में कार्यरत थीं। वर्ष 2018 में पुलिस विभाग में नियुक्त होने के बाद वह ड्यूटी कर रही थीं और घटना के समय मातृत्व अवकाश पर थीं। परिवार के लिए प्रसव के समय इस तरह की घटना बेहद पीड़ादायक रही। एक ओर परिवार नवजात और मां के सुरक्षित रहने की उम्मीद कर रहा था, वहीं दूसरी ओर अचानक महिला सिपाही की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार के सामने न सिर्फ भावनात्मक संकट खड़ा हुआ, बल्कि इलाज की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठे।

समस्तीपुर सदर अस्पताल में महिला सिपाही की मौत का मामला सामने आने के बाद यह भी जरूरी हो गया कि अस्पताल प्रशासन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा करे। यदि जांच में किसी स्तर पर चिकित्सकीय या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं यदि जांच में यह सामने आता है कि महिला को अस्पताल पहुंचने के समय ही गंभीर चिकित्सकीय समस्या थी और उपलब्ध उपचार के बावजूद उनकी स्थिति नहीं संभल सकी, तो उस स्थिति में भी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक कारण सामने आ जाएगा।

ऐसे मामलों में अस्पताल और मरीज के परिजनों के बीच पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। मरीज की स्थिति, किए गए उपचार और आगे की प्रक्रिया के बारे में परिवार को समय पर जानकारी मिलने से कई बार विवाद की स्थिति को टाला जा सकता है। दूसरी तरफ किसी मरीज की मौत के बाद आक्रोश में अस्पताल परिसर में हंगामा करना या कर्मचारियों के साथ विवाद करना समस्या का समाधान नहीं है। किसी भी आरोप की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना जरूरी है, ताकि वास्तविक जिम्मेदारी तय की जा सके।

मोनिका कुमारी की मौत के बाद उनके परिवार और साथी पुलिसकर्मियों के बीच भी शोक का माहौल रहा। घटना ने पुलिस विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया। हालांकि इस मामले को किसी व्यापक निष्कर्ष से जोड़ने से पहले घटना से संबंधित आधिकारिक जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला सिपाही को प्रसव पीड़ा के बाद पहले रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया था, जहां से गंभीर हालत में समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर किया गया। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पति ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने महिला की स्थिति को गंभीर बताया है और आरोपों की जांच कराने की बात कही है। अब जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।

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