सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने दिया इस्तीफा, अब प्रधानमंत्री बनने की तैयारी

सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने इस्तीफा दे दिया। वे 25 अक्टूबर के समय से पहले संसदीय चुनाव में पार्टी की जीत पर प्रधानमंत्री बनने की कोशिश करेंगे।

सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। उनका लक्ष्य शुरुआती संसदीय चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद संभालना है। संसद अध्यक्ष एना ब्रनाबिक अंतरिम राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगी। देश में 25 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होंगे।

बेलग्रेड: सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से संकेत दिए जाने के बाद यह कदम ऐसे समय आया है, जब सर्बिया 25 अक्टूबर को समय से पहले संसदीय चुनाव की ओर बढ़ रहा है। वुसिक की योजना अपनी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) की जीत की स्थिति में राष्ट्रपति पद छोड़कर प्रधानमंत्री की भूमिका में आने की है।

वुसिक के इस्तीफे के बाद संसद की अध्यक्ष और उनकी राजनीतिक सहयोगी एना ब्रनाबिक अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगी। वुसिक ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि सर्बिया में राष्ट्रपति चुनाव साल के अंत तक कराए जाएंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब देश करीब दो वर्षों से सरकार विरोधी प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन ने सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

25 अक्टूबर को होने वाला है समय से पहले चुनाव

सर्बिया में 25 अक्टूबर को होने वाला संसदीय चुनाव मौजूदा राजनीतिक संकट को समाप्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वुसिक की पार्टी लंबे समय से सत्ता में है और वह चुनाव अभियान में देशभर में सक्रिय रहने की बात कह चुके हैं।

वुसिक ने बेलग्रेड में अपने समर्थकों से कहा कि वह सर्बिया के हर हिस्से में मौजूद रहेंगे और चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने अपनी पार्टी की जीत को लेकर विश्वास जताया है, हालांकि उपलब्ध सर्वेक्षणों में तस्वीर एक जैसी नहीं बताई गई है। वुसिक के लिए चुनाव का परिणाम महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री पद पर जाने की उनकी योजना उनकी पार्टी के संसदीय बहुमत या सरकार बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

इस्तीफे से पहले पुतिन से बातचीत

वुसिक ने शनिवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की थी। क्रेमलिन के अनुसार, बातचीत में वुसिक ने चुनाव की तैयारियों के बारे में रूसी राष्ट्रपति को जानकारी दी। रूसी पक्ष के अनुसार, दोनों नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।

वुसिक का राष्ट्रपति पद छोड़कर प्रधानमंत्री की भूमिका में आने का प्रस्ताव रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस राजनीतिक दौर की याद दिलाता है, जब पुतिन ने राष्ट्रपति पद की संवैधानिक अवधि की सीमा के बीच प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में अपनी भूमिका बनाए रखी थी। हालांकि, सर्बिया और रूस की संवैधानिक तथा राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं और दोनों मामलों की परिस्थितियां भी समान नहीं हैं।

छात्र आंदोलन बनी बड़ी राजनीतिक चुनौती

वुसिक के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक छात्र नेतृत्व वाला राजनीतिक आंदोलन है। इस आंदोलन से जुड़ा Student List आगामी चुनाव में वुसिक की पार्टी को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। Student List सार्वजनिक संस्थानों में राष्ट्रपति के प्रभाव को कम करने, न्यायपालिका और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े बदलाव करने तथा सुलभ आवास और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देने की बात करता है।

छात्र आंदोलन की शुरुआत 2024 में नोवी साद के एक नवनिर्मित रेलवे स्टेशन पर छतरी जैसी संरचना गिरने के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों से हुई थी। इस घटना में 16 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सरकारी परियोजनाओं में ठेकों और भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक अक्षमता को लेकर सवाल उठाए गए। सरकार के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक राजनीतिक चुनौती में बदल गया।

विश्वविद्यालयों को लेकर वुसिक की टिप्पणी

अपने संबोधन में वुसिक ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को भी सरकार की असफलताओं से जुड़े क्षेत्रों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने गैर-जिम्मेदारी दिखाई और विश्वविद्यालयों को राजनीतिक दलों के मुख्यालय में बदल दिया। छात्र आंदोलन के दौरान देश के कई विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन और गतिविधियां देखने को मिली थीं। आंदोलन ने सरकार की नीतियों और सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज पर व्यापक बहस को जन्म दिया।

एक दशक से अधिक समय से सर्बियाई राजनीति में प्रभाव

56 वर्षीय अलेक्जेंडर वुसिक एक दशक से अधिक समय से सर्बिया की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वह स्लोबोदान मिलोशेविच के दौर में कट्टर राष्ट्रवादी राजनीति से जुड़े रहे और सूचना मंत्री के रूप में भी काम किया। इसके बाद उन्होंने 2012 से 2014 तक उपप्रधानमंत्री और 2014 से 2017 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

2017 में वह पहली बार सर्बिया के राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सर्बिया ने एक तरफ यूरोपीय संघ में शामिल होने की अपनी कोशिश जारी रखी, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ अपने संबंधों को भी बनाए रखा।

यूरोपीय संघ और रूस के बीच संतुलन की कोशिश

सर्बिया लंबे समय से यूरोपीय संघ में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही बेलग्रेड ने मॉस्को के साथ पारंपरिक रूप से करीबी संबंध भी बनाए रखे हैं।

रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यूरोपीय देशों और सर्बिया के बीच रूस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मतभेद रहे हैं। वुसिक ने कहा कि यूरोप में उनकी कई बैठकों में रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने से इनकार को लेकर उनसे सवाल किए जाते थे। वुसिक ने यह भी कहा कि उनके रूस के राष्ट्रपति पुतिन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छे संवाद रहे हैं।

चीन के लिए यूरोप का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार

वुसिक के कार्यकाल में सर्बिया ने चीन के साथ आर्थिक संबंध भी मजबूत किए हैं। करीब 6.5 करोड़ की आबादी वाले इस देश में चीन ने खनन सहित कई क्षेत्रों में निवेश किया है। सर्बिया को चीन के यूरोप में आर्थिक और औद्योगिक विस्तार के महत्वपूर्ण मार्गों में से एक के रूप में देखा जाता है। वुसिक सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने को अपनी आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

चीन के साथ आर्थिक संबंधों के विस्तार के साथ सर्बिया ने यूरोपीय संघ के साथ अपनी सदस्यता प्रक्रिया को भी जारी रखा है। इससे बेलग्रेड की विदेश नीति में विभिन्न वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

कोसोवो का मुद्दा अब भी बड़ी चुनौती

सर्बिया और कोसोवो के बीच संबंध सामान्य नहीं हो पाए हैं। कोसोवो की स्वतंत्रता को सर्बिया स्वीकार नहीं करता और यह मुद्दा यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में सर्बिया के लिए प्रमुख चुनौतियों में शामिल है।

वुसिक ने कहा कि जो भी व्यक्ति अगला राष्ट्रपति बनेगा, उसे शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ राष्ट्रीय हितों तथा कोसोवो में सर्बियाई लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सर्बिया पर कोसोवो को छोड़ने के लिए आने वाले दबाव का सामना करना होगा।

पिछले चुनावों को लेकर आरोपों से इनकार

सर्बिया के पिछले चुनावों को लेकर विपक्ष और सरकार विरोधी समूहों ने मतदाता दबाव, मतपेटियों में हेरफेर और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वुसिक ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।

आगामी 25 अक्टूबर का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सर्बिया में राजनीतिक समर्थन की मौजूदा स्थिति को सामने ला सकता है।

आगे क्या होगा?

वुसिक के इस्तीफे के बाद एना ब्रनाबिक अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगी। राष्ट्रपति चुनाव साल के अंत तक होने की घोषणा की गई है। इस बीच 25 अक्टूबर का संसदीय चुनाव सर्बिया की अगली सरकार और वुसिक की राजनीतिक भूमिका के लिए निर्णायक प्रक्रिया होगी। यदि उनकी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आती है, तो वुसिक के प्रधानमंत्री पद संभालने का रास्ता खुल सकता है।

इस घटनाक्रम के साथ सर्बिया की घरेलू राजनीति, यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया, रूस और चीन के साथ संबंध तथा कोसोवो का मुद्दा आने वाले महीनों में देश की राजनीति के प्रमुख विषय बने रहेंगे।

Leave a comment