शब्बीर अली ने वायरल ऑडियो क्लिप को बताया फर्जी, कांग्रेस में साजिश का लगाया आरोप

हैदराबाद: पूर्व मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर ने वायरल ऑडियो क्लिप को फर्जी बताते हुए कांग्रेस को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने जांच की मांग की है।

हैदराबाद में पूर्व मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर ने अपने नाम से वायरल ऑडियो क्लिप को फर्जी बताया। उन्होंने कांग्रेस को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि मामले की फॉरेंसिक जांच जरूरी है और उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी है।

हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री Mohammad Ali Shabbir ने अपने नाम से वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑडियो न केवल एडिट किया गया है, बल्कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या वॉइस-क्लोनिंग तकनीक की मदद से भी तैयार किया जा सकता है।

शब्बीर अली ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला उनकी छवि को खराब करने और कांग्रेस पार्टी के भीतर भ्रम फैलाने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।

TPCC को तीन पेज का जवाब, सभी आरोपों का खंडन

वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की अनुशासन समिति द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में शब्बीर अली ने तीन पेज का विस्तृत स्पष्टीकरण सौंपा।

अपने जवाब में उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने TPCC अध्यक्ष बम्मा महेश कुमार गौड़ या किसी भी महिला नेता के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने सभी आरोपों को “झूठा, भ्रामक, राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण” बताया।

शब्बीर अली ने समिति को बताया कि वायरल क्लिप के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और पहले इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है।

54 सेकंड की ऑडियो क्लिप से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद 10 जून को तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर “TeluguScribe” नामक अकाउंट से 54 सेकंड का एक ऑडियो क्लिप साझा किया गया।

इसके बाद यह क्लिप तेजी से वायरल हो गया और कई तेलुगु समाचार चैनलों ने इसे प्रसारित भी किया। क्लिप में कथित तौर पर शब्बीर अली की आवाज बताई गई, जिसमें कुछ विवादित टिप्पणियों का दावा किया गया था।

हालांकि शब्बीर अली ने तुरंत ही इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे एडिटेड और फर्जी करार दिया।

AI और वॉइस क्लोनिंग तकनीक के इस्तेमाल का शक

अपने स्पष्टीकरण में शब्बीर अली ने दावा किया कि आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वॉइस क्लोनिंग का इस्तेमाल करके किसी की भी आवाज की नकल की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि बिना फॉरेंसिक जांच के किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा। उन्होंने TPCC से मांग की कि इस ऑडियो की वैज्ञानिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।]

शब्बीर अली ने वायरल ऑडियो क्लिप को बताया फर्जी, कांग्रेस में साजिश का लगाया आरोप

उनका कहना है कि इस तरह की तकनीकों का दुरुपयोग राजनीतिक छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

पुलिस में शिकायत और FIR दर्ज होने का दावा

शब्बीर अली ने बताया कि इस मामले में पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। कांग्रेस टाउन अध्यक्ष इरेनी संदीप कुमार द्वारा कामारेड्डी के पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई है, जिसमें ऑडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि इस शिकायत के आधार पर FIR भी दर्ज कर ली गई है। शिकायत में यह जांच करने की मांग की गई है कि ऑडियो असली है, एडिट किया गया है, मोर्फ किया गया है या AI से बनाया गया है।

इसके साथ ही इसमें शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।

राजनीतिक साजिश का आरोप, पार्टी में दरार फैलाने की कोशिश

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति की छवि खराब करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने की बड़ी साजिश है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस तरह की फर्जी सामग्री फैलाकर पार्टी के भीतर विभाजन पैदा करना चाहते हैं, खासकर कामारेड्डी जिले में।

शब्बीर अली ने जोर देकर कहा कि वह 45 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं और पार्टी की विचारधारा, अनुशासन और नेतृत्व के प्रति पूरी तरह वफादार हैं।

TPCC से निष्पक्ष जांच की मांग

अपने जवाब के अंत में शब्बीर अली ने TPCC अनुशासन समिति से अपील की कि किसी भी निर्णय से पहले पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाए।

उन्होंने कहा कि बिना जांच के किसी को दोषी ठहराना न केवल अनुचित होगा, बल्कि इससे पार्टी की आंतरिक एकता को भी नुकसान पहुंच सकता है।

राजनीतिक और डिजिटल युग में बढ़ती चुनौतियाँ

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि डिजिटल युग में फर्जी ऑडियो और डीपफेक तकनीक कितनी तेजी से राजनीतिक विवाद पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच और डिजिटल प्रमाणिकता का महत्व और भी बढ़ जाता है।

तेलंगाना कांग्रेस के भीतर यह विवाद आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है, खासकर जब पार्टी पहले से ही आंतरिक अनुशासन और नेतृत्व को लेकर चुनौतियों का सामना कर रही है।

Leave a comment