शिमला पुलिस ने पंजाब-चंडीगढ़ के 2 चिट्टा सप्लायर पकड़े: एक सहकारी बैंक का कर्मचारी, दोनों मामलों में 20 ग्राम से ज्यादा नशा बरामद

शिमला पुलिस ने पंजाब और चंडीगढ़ से दो कथित चिट्टा सप्लायर पकड़े। एक सहकारी बैंक कर्मचारी है। दोनों मामलों में 20 ग्राम से अधिक नशा बरामद हुआ।
शिमला पुलिस ने पंजाब-चंडीगढ़ के 2 चिट्टा सप्लायर पकड़े: एक सहकारी बैंक का कर्मचारी, दोनों मामलों में 20 ग्राम से ज्यादा नशा बरामद
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शिमला पुलिस ने नशे की सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पंजाब और चंडीगढ़ से दो कथित चिट्टा सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों मामलों की जांच में बैकवर्ड लिंक यानी नशे की खेप शिमला तक पहुंचने के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की। इसी जांच के आधार पर एक आरोपी को पंजाब के फाजिल्का और दूसरे को चंडीगढ़ के मनीमाजरा से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में कुल मिलाकर 20 ग्राम से ज्यादा हेरोइन या चिट्टा बरामद हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों में एक सहकारी बैंक में काम करने वाला कर्मचारी भी शामिल है।

पहला मामला शिमला के ढली थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस ने 28 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। भट्टाकुफर-ढली टनल मार्ग पर एक टैक्सी की तलाशी के दौरान पुलिस ने 6.5 ग्राम हेरोइन या चिट्टा बरामद करने का दावा किया था। इस मामले में पुलिस ने सुन्नी निवासी दुष्यंत वर्मा और आनी निवासी अक्षय शर्मा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि दोनों आरोपियों तक नशे की खेप कहां से पहुंची थी।

पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच आगे बढ़ने पर फाजिल्का निवासी 24 वर्षीय अजय कुमार का नाम सामने आया। पुलिस का आरोप है कि अजय कुमार ने फाजिल्का से चिट्टा हासिल कर मोहाली में अक्षय शर्मा को सप्लाई किया था। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन और फोन संपर्क की जानकारी भी जुटाई। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच करीब 10,500 रुपये का लेनदेन हुआ था। इसके बाद शिमला पुलिस की टीम पंजाब पहुंची और 14 सितंबर को फाजिल्का के जलालाबाद तहसील के गांव मोजेवाला से अजय कुमार को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद अजय कुमार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा। पुलिस अब रिमांड के दौरान उससे कथित नशा सप्लाई नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नशे की सप्लाई केवल इन आरोपियों तक सीमित थी या इसके पीछे और भी लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पंजाब से हिमाचल तक नशीले पदार्थों की आपूर्ति किस माध्यम से और किन संपर्कों के जरिए की जा रही थी।

दूसरा मामला शिमला सदर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 8 सितंबर को अभियोग दर्ज किया गया था। कृष्णानगर क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान सनमजीत और सुमित सपरा को पांच ग्राम हेरोइन या चिट्टा के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने मामले की बैकवर्ड लिंकिंग शुरू की। यानी जांच इस दिशा में आगे बढ़ाई गई कि दोनों आरोपियों को कथित तौर पर नशा किससे मिला था और उनके पीछे सप्लाई करने वाला व्यक्ति कौन था।

पुलिस की जांच में इसके बाद मनीमाजरा, चंडीगढ़ निवासी 31 वर्षीय गौरव तिशावर का नाम सामने आया। पुलिस टीम ने चंडीगढ़ पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार गौरव एक सहकारी बैंक में कर्मचारी है। पुलिस का आरोप है कि नौकरी के अलावा वह कथित तौर पर नशे की बिक्री से भी आर्थिक लाभ हासिल कर रहा था। उसके मनीमाजरा स्थित घर की तलाशी के दौरान 9.31 ग्राम अतिरिक्त हेरोइन या चिट्टा बरामद करने का दावा किया गया है।

गौरव तिशावर को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस उसके संपर्कों और कथित सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या वह शिमला में पकड़े गए आरोपियों तक नियमित रूप से नशीला पदार्थ पहुंचाता था। इसके अलावा उसके बैंकिंग लेनदेन और मोबाइल संपर्कों की जांच से भी कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

दोनों मामलों को जोड़कर देखें तो पुलिस ने पहले शिमला में नशे के साथ पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की और फिर कथित सप्लाई स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया। इस तरह की जांच में पुलिस का ध्यान केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता जो नशे के साथ पकड़ा गया हो, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश की जाती है कि खेप किसने उपलब्ध कराई, पैसा किस माध्यम से भेजा गया और नशीले पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल रहे।

ढली मामले में पुलिस की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पंजाब तक पहुंचना रहा। शिमला पुलिस ने कथित सप्लायर की पहचान होने के बाद पंजाब में जाकर कार्रवाई की। फाजिल्का से अजय कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके मोबाइल फोन, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की जांच के जरिए आगे की कड़ियां तलाश रही है। पुलिस के अनुसार 10,500 रुपये के कथित लेनदेन और फोन संपर्क ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सदर मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई। शिमला में पांच ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के बाद जांच चंडीगढ़ के मनीमाजरा तक पहुंची। वहां से सहकारी बैंक कर्मचारी गौरव तिशावर को पकड़ा गया और उसके घर से 9.31 ग्राम अतिरिक्त चिट्टा बरामद करने का पुलिस ने दावा किया। इस बरामदगी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर उसके पास नशे की खेप कहां से आती थी और आगे किन लोगों को दी जाती थी।

पुलिस के लिए इस तरह के मामलों में आर्थिक लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। नशे की सप्लाई के मामलों में कथित खरीदार और सप्लायर के बीच पैसे के लेनदेन का रिकॉर्ड नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकता है। ढली मामले में पुलिस ने 10,500 रुपये के कथित लेनदेन का उल्लेख किया है। आगे की जांच में अन्य भुगतान, बैंक खाते, डिजिटल ट्रांजेक्शन और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है।

इसी तरह मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि आरोपियों के बीच कब और कितनी बार संपर्क हुआ। यदि जांच में दूसरे संदिग्धों के साथ नियमित संपर्क सामने आता है तो पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति का किसी आरोपी से फोन पर संपर्क होना अकेले अपराध साबित नहीं करता; उसकी भूमिका को अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर ही जांच में देखा जाता है।

शिमला पुलिस की इस कार्रवाई में खास बात यह है कि दोनों मामलों में जांच स्थानीय गिरफ्तारी के बाद कथित सप्लायर तक पहुंची। पुलिस इसे नशे की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए बैकवर्ड लिंकिंग की कार्रवाई के रूप में देख रही है। इससे जांच का दायरा शिमला से बाहर पंजाब और चंडीगढ़ तक पहुंचा है।

नशे से जुड़े मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नशीले पदार्थ की बरामदगी नहीं होती, बल्कि उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाना भी होता है। यदि किसी आरोपी के खिलाफ सप्लाई का आरोप है तो जांच में यह भी पता लगाया जाता है कि वह पदार्थ कहां से हासिल करता था, किसे देता था और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य कौन लोग शामिल थे। शिमला पुलिस इन दोनों मामलों में इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

दोनों मामलों में बरामदगी को मिलाकर 20 ग्राम से अधिक हेरोइन या चिट्टा मिलने की जानकारी सामने आई है। ढली मामले में पहले 6.5 ग्राम और सदर मामले में पहले पांच ग्राम बरामद किए गए थे। इसके बाद कथित सप्लायरों तक पहुंचने पर अजय कुमार और गौरव तिशावर से जुड़ी कार्रवाई हुई। सदर मामले में गौरव के घर से 9.31 ग्राम अतिरिक्त चिट्टा मिलने का पुलिस ने दावा किया है।

अब पुलिस दोनों मामलों में आगे की सप्लाई चेन और संपर्कों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यदि अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

फिलहाल शिमला पुलिस की कार्रवाई ने यह जरूर दिखाया है कि स्थानीय स्तर पर चिट्टा बरामदगी के मामलों की जांच को पुलिस पंजाब और चंडीगढ़ तक ले जा रही है। एक मामले में फाजिल्का और दूसरे में मनीमाजरा तक जांच पहुंची है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों मामलों के पीछे कथित नेटवर्क कितना बड़ा है और नशे की सप्लाई में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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