श्रीलंका के चेम्मनी सामूहिक कब्रगाह से अब तक 249 कंकाल बरामद, जांच में मिले सिक्के और आभूषण के अवशेष

श्रीलंका के चेम्मनी सामूहिक कब्रगाह से अब तक 249 कंकाल बरामद हुए हैं। खुदाई मे सिक्के और आभूषण जैसे अवशेष भी मिले है। यह संघर्ष के दौर से जुड़ी मानी जा रही

श्रीलंका के जाफना स्थित चेम्मनी सामूहिक कब्रगाह की खुदाई में अब तक 249 कंकाल बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान सिक्के और आभूषण जैसे अवशेष भी मिले हैं। यह कब्रगाह लिट्टे संघर्ष के दौर से जुड़ी मानी जा रही है।

कोलंबो: श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र जाफना के पास स्थित चेम्मनी (Chemmani) में कथित सामूहिक कब्रगाह की खुदाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। हालिया खुदाई में अब तक 249 मानव कंकाल बरामद किए जा चुके हैं। यह मामला श्रीलंका के गृहयुद्ध और तमिल संघर्ष के दौर से जुड़ा माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर मानवाधिकार, युद्ध अपराध और लापता लोगों के मुद्दों को सामने ला दिया है।

स्थानीय अदालत के आदेश के बाद सात महीने से रुकी खुदाई को दोबारा शुरू किया गया। जांच अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह खोज श्रीलंका के इतिहास के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक बन सकती है।

तीसरे चरण की खुदाई में मिले नए कंकाल

मानवाधिकार मामलों से जुड़े वकील रनीथा ज्ञानराजा के अनुसार, खुदाई के तीसरे चरण में मंगलवार तक 9 नए कंकाल बरामद किए गए। इसके साथ ही कुल बरामद कंकालों की संख्या बढ़कर 249 हो गई है।

उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान कुछ पुराने सिक्के और आभूषण जैसा दिखाई देने वाला एक धातु का टुकड़ा भी मिला है। विशेषज्ञ अब इन वस्तुओं की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे किस समय और किन परिस्थितियों से जुड़े हो सकते हैं।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम कंकालों की पहचान, उम्र, लिंग और मृत्यु के कारणों की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के जरिए इन शवों की पहचान करने में लंबा समय लग सकता है।

अदालत के आदेश के बाद दोबारा शुरू हुई जांच

चेम्मनी में इस साल फरवरी के दौरान सामान्य विकास कार्य के समय कुछ मानव अवशेष मिलने के बाद मामला फिर चर्चा में आया। इसके बाद स्थानीय अदालत ने न्यायिक निगरानी में विस्तृत जांच और खुदाई के आदेश दिए।

15 मई को खुदाई का पहला चरण शुरू किया गया था। हालांकि, वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण सितंबर 2025 में यह प्रक्रिया रोक दी गई थी। बाद में मानवाधिकार संगठनों और पीड़ित परिवारों के दबाव के बाद अदालत ने पिछले सप्ताह खुदाई दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया।

दूसरे चरण की खुदाई करीब 45 दिनों तक चली थी, जिसमें 240 कंकाल बरामद हुए थे। अब तीसरे चरण में लगातार नए अवशेष मिलने से यह आशंका गहराती जा रही है कि यहां बड़ी संख्या में लोगों को दफनाया गया हो सकता है।

लिट्टे संघर्ष से जुड़ा माना जा रहा मामला

चेम्मनी का नाम पहली बार 1998 में अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया था। उस समय श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और सरकारी बलों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा था।

गृहयुद्ध के दौरान हजारों लोगों के लापता होने और गैरकानूनी हत्याओं के आरोप लगे थे। इसी दौरान चेम्मनी इलाके में कथित सामूहिक कब्रगाह की जानकारी सामने आई थी। उस समय खुदाई में करीब 15 मानव कंकाल मिले थे, जिसके बाद यह स्थान मानवाधिकार जांच का केंद्र बन गया।

मानवाधिकार समूहों का आरोप रहा है कि गृहयुद्ध के दौरान कई लोगों को हिरासत में लेने के बाद गायब कर दिया गया था। हालांकि, विभिन्न सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों ने समय-समय पर इन आरोपों से इनकार भी किया है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की नजर इस मामले पर

चेम्मनी सामूहिक कब्रगाह का मामला अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींच रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद समेत कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने श्रीलंका में युद्धकालीन अपराधों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डीएनए और फॉरेंसिक जांच में यह साबित होता है कि ये शव गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए लोगों के हैं, तो इससे श्रीलंका सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ सकता है।

कई तमिल परिवार आज भी अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह खुदाई उनके लिए उम्मीद और दर्द दोनों लेकर आई है।

फॉरेंसिक जांच से खुल सकते हैं कई राज

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, बरामद कंकालों की स्थिति और आसपास मिले सामान से कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सभी शव एक ही समय में दफनाए गए थे या अलग-अलग अवधियों में यहां लाए गए।
सिक्कों और आभूषण जैसे अवशेषों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इनके जरिए समय अवधि और पीड़ितों की पहचान से जुड़े संकेत मिल सकते हैं।

फॉरेंसिक टीम अब हर कंकाल का वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार कर रही है। इसके बाद डीएनए सैंपल लेकर संभावित रिश्तेदारों से उनका मिलान किया जाएगा।

श्रीलंका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला

श्रीलंका का गृहयुद्ध 2009 में समाप्त हुआ था, लेकिन उसके घाव आज भी पूरी तरह नहीं भरे हैं। युद्ध के दौरान हजारों लोगों के मारे जाने और लापता होने के आरोप लगे थे।

चेम्मनी की खुदाई केवल एक पुरातात्विक या कानूनी प्रक्रिया नहीं मानी जा रही, बल्कि यह श्रीलंका में न्याय, जवाबदेही और सुलह की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखी जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ती है, तो इससे पीड़ित परिवारों को कुछ हद तक न्याय मिल सकता है। वहीं, यदि प्रक्रिया में देरी या राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ, तो यह मामला फिर विवादों में घिर सकता है।

पीड़ित परिवारों की बढ़ी उम्मीदें

खुदाई स्थल के आसपास कई परिवार लगातार मौजूद हैं, जिनके रिश्तेदार दशकों पहले लापता हो गए थे। कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि डीएनए जांच के जरिए उन्हें अपने प्रियजनों के बारे में सच्चाई पता चल सकेगी।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल श्रीलंका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक

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