भारत में कर्मचारी ऑफिस टाइम के बाद भी लगातार कॉल, ईमेल और मैसेज के जरिए काम से जुड़े रहते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है। Right to Disconnect की कानूनी मांग जोर पकड़ रही है, खासकर Gen Z और नई पीढ़ी के लिए, जो निजी समय और Work-Life Balance को महत्व देती है।
Right to Disconnect in India: भारत में हालिया सर्वे में सामने आया है कि हर 10 में से 9 कर्मचारी ऑफिस के घंटों के बाद भी लगातार कॉल, ईमेल और मैसेज का जवाब देते हैं। यह समस्या घर, छुट्टी और बीमार होने के दिनों तक कर्मचारियों को प्रभावित करती है। लोकसभा में शीतकालीन सत्र 2025 में काम से अलग होने के अधिकार को कानूनी रूप देने की मांग उठी। नई पीढ़ी और Gen Z इस अधिकार को लेकर अधिक संवेदनशील हैं और Work-Life Balance को प्राथमिकता देती हैं।
ऑफिस टाइम के बाहर लगातार जुड़ाव
सर्वे में पाया गया कि हर 10 में से 9 कर्मचारी काम के घंटे खत्म होने के बाद भी ऑफिस से जुड़े रहते हैं। अधिकांश कर्मचारियों को डर है कि अगर उन्होंने ईमेल या कॉल का जवाब नहीं दिया, तो पदोन्नति या ऑफिस में उनकी छवि पर असर पड़ेगा।
इस लगातार उपलब्ध रहने की संस्कृति ने कर्मचारियों को तनाव और थकान में डाल दिया है। घर, छुट्टी या बीमारी के दिनों में भी काम से जुड़ा रहना उनके निजी समय और स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।

संसद में उठ रहा मुद्दा
लोकसभा में शीतकालीन सत्र 2025 में पर्सनल सदस्य द्वारा पेश किए गए विधेयक में काम से अलग होने के अधिकार को कानूनी रूप देने की मांग की गई। इसका मकसद कर्मचारियों के तनाव को कम करना और बेहतर Work-Life Balance सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा, यह पहल नई पीढ़ी यानी Gen Z की मांगों को भी दर्शाती है। युवा कर्मचारी मानसिक स्वास्थ्य और निजी समय को महत्व दे रहे हैं और अगर उनका अधिकार नहीं सम्मानित होगा, तो वे नौकरी छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं।
पीढ़ियों और एम्प्लायर की सोच में फर्क
बेबी बूमर्स के 88 प्रतिशत मानते हैं कि ऑफिस टाइम के बाद संपर्क होना जिम्मेदारी और समर्पण का हिस्सा है। वहीं, Gen Z में केवल 50 प्रतिशत इसे सकारात्मक मानते हैं। 81 प्रतिशत एम्प्लायर नियमित काम के घंटे के बाद अतिरिक्त भुगतान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन 66 प्रतिशत को डर है कि Right to Disconnect लागू करने से उत्पादकता कम हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना
ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में भी कर्मचारियों का ऑफिस टाइम के बाद काम करना आम है। ऑस्ट्रेलिया में 90 प्रतिशत कर्मचारी और सिंगापुर में 93 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस के बाद काम करते हैं। हालांकि, दोनों देशों में एम्प्लायर की चिंता और नियमों में भिन्नता देखने को मिलती है।










