सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने दार्जिलिंग में आयोजित किराती खम्बू राय सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेकर सिक्किम और दार्जिलिंग के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने इसे क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का आधार बताया।
गंगटोक: सिक्किम के मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने रविवार को सिक्किम और दार्जिलिंग के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। वे दार्जिलिंग में आयोजित किराती खाम्बु राई सांस्कृतिक महोत्सव 2026 और पवित्र साकेला उभौली समारोह में शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि यह सामाजिक एकता और आपसी सम्मान का आधार भी है। यह कार्यक्रम पूर्वी हिमालयी क्षेत्र की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना।
सांस्कृतिक महोत्सव में कई प्रमुख नेता शामिल
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति रही। इनमें सिक्किम सरकार के मंत्री Bhojraj Rai, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री Bishal Lama और दार्जिलिंग के सांसद Raju Bista शामिल थे।
इन नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय स्तर पर सांस्कृतिक सहयोग और संवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।
किराती खाम्बु राई समाज की भूमिका की सराहना
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने किराती खाम्बु राई सांस्कृतिक एवं अनुसंधान सोसाइटी (KKRSS) की प्रशंसा की, जिसने इस भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समुदाय की भाषा, परंपराओं और पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में ये प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।
साकेला उभौली पर्व का महत्व
साकेला उभौली किराती समुदाय का एक पवित्र और पारंपरिक पर्व है, जो प्रकृति, कृषि और सामुदायिक जीवन से जुड़ा हुआ है। इस पर्व में लोग सामूहिक नृत्य, पारंपरिक गीतों और अनुष्ठानों के माध्यम से प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और संगीत ने दर्शकों को आकर्षित किया और पूर्वी हिमालयी संस्कृति की समृद्ध झलक प्रस्तुत की।
सिक्किम-दार्जिलिंग संबंधों पर सीएम का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे आयोजन दोनों क्षेत्रों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सांस्कृतिक जुड़ाव केवल परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और क्षेत्रीय विकास का आधार भी है। उनके अनुसार, साझा संस्कृति ही भविष्य में शांति और सहयोग की दिशा तय कर सकती है।
क्षेत्रीय एकता और विकास पर जोर
सीएम तमांग ने कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग की सांस्कृतिक एकता केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों क्षेत्रों को शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, और इसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि तेजी से बदलते समय में पारंपरिक संस्कृतियों और भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे अपनी पहचान और विरासत को समझ सकें और आगे बढ़ा सकें।
पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्किम और दार्जिलिंग के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने से पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल सकता है। दोनों क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं। सांस्कृतिक महोत्सव जैसे आयोजन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।










