चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताए जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आयोग पर सवाल उठाने के लिए “गढ़े हुए झूठ” को आधार बनाया।
नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। यह प्रतिक्रिया चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण के बाद आई, जिसमें आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR और उससे जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि SIR से संबंधित उसके आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
चुनाव आयोग के बयान के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस और विपक्ष पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR को लेकर विपक्ष ने जनता को गुमराह किया और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के लिए एक “गढ़े हुए झूठ” को आधार बनाया।
नवीन ने अपने पोस्ट में कहा कि SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। उनके अनुसार, इसके बावजूद कांग्रेस ने आयोग पर आरोप लगाए और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाया। उनके बयान की रिपोर्ट PTI समेत कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने बयान में कहा कि SIR से संबंधित सभी आदेश आयोग की मंजूरी से जारी हुए। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR को लेकर जारी आदेश को भी आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा।
आयोग ने यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में दिया है, जब उसके भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच किसी मुद्दे पर अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन अंतिम आयोगीय निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
फॉर्म-6 में बदलाव पर भी आयोग की सफाई
SIR विवाद में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव भी चर्चा का विषय रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को भी आयोग की मंजूरी प्राप्त थी और संबंधित व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसमें बदलाव को लेकर उठे सवाल सीधे मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया से जुड़े हैं।
आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर क्या है विवाद?
SIR को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब चुनाव आयोग के कामकाज और कुछ फैसलों को लेकर निर्वाचन आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों की खबरें सामने आईं। 23 सितंबर की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के नाम पर लिए गए कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि आयोग के सभी निर्णय, जिनमें SIR भी शामिल है, तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्त किए गए विचार और आयोग का अंतिम निर्णय अलग-अलग विषय हैं।
26 सितंबर की पूर्ण आयोग बैठक के बाद जारी बयान में आयोग ने इस रुख को दोहराते हुए SIR से संबंधित फैसलों को सर्वसम्मत बताया।
नितिन नवीन ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं का किया जिक्र
नितिन नवीन ने अपने बयान में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनावी प्रक्रिया से कांग्रेस या उसके सहयोगी दलों को राजनीतिक लाभ मिलता है, तब वे उसकी विश्वसनीयता स्वीकार करते हैं, लेकिन विपरीत जनादेश मिलने पर उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं।
नवीन ने केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को परिणाम के आधार पर अलग-अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए “दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार” का सहारा लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष से सार्वजनिक रूप से जवाब देने और माफी मांगने की भी मांग की। ये सभी टिप्पणियां भाजपा अध्यक्ष के बयान के रूप में सामने आई हैं।
कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण पर क्या कहा?
चुनाव आयोग के बयान के बाद राजनीतिक विवाद समाप्त नहीं हुआ। कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए और कुछ मुद्दों को अभी भी अनुत्तरित बताया। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने आयोग के बयान को अपर्याप्त बताते हुए SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ सवाल दोहराए।
इससे स्पष्ट है कि विवाद का केंद्र केवल यह सवाल नहीं है कि SIR के फैसलों को औपचारिक रूप से किस तरह मंजूरी मिली, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े व्यापक मुद्दे भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। 27 मई 2026 के एक फैसले में अदालत ने बिहार में SIR से संबंधित कार्यवाही और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया था। अदालत के रिकॉर्ड में SIR की प्राधिकरण, अपनाई गई प्रक्रिया और मतदाताओं की पात्रता निर्धारित करने की पद्धति से जुड़े सवालों का उल्लेख है।
इससे पहले जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में चल रहे SIR से जुड़े मामले में लगभग 1.16 करोड़ लोगों को जारी नोटिस और मतदाताओं की विभिन्न श्रेणियों से जुड़े मुद्दों पर निर्देश दिए थे।
आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक बहस
SIR को लेकर चुनाव आयोग का ताजा बयान भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आयोग ने जहां अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, वहीं विपक्ष आयोग की कार्यप्रणाली और कुछ प्रक्रियागत सवालों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहा है। नितिन नवीन ने आयोग के बयान को कांग्रेस के आरोपों के संदर्भ में उठाते हुए विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण के बावजूद कुछ सवालों को अनुत्तरित बताया है।
ऐसे में SIR विवाद अब चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में आयोग की ओर से जारी होने वाले अतिरिक्त स्पष्टीकरण और संबंधित न्यायिक कार्यवाही इस विवाद की दिशा को प्रभावित कर सकती है।











