स्मार्ट डिवाइसेज बने प्राइवेसी खतरा, फोन से wi-fi स्मार्ट डिवाइसेज से बढ़ा प्राइवेसी खतरा

स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और Wi-Fi राउटर जैसे डिवाइसेज यूजर डेटा ट्रैक कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने डिजिटल प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर चेतावनी दी है।

स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, Wi-Fi राउटर और कनेक्टेड कार जैसे डिवाइसेज यूजर्स का पर्सनल डेटा लगातार ट्रैक कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती कनेक्टिविटी के साथ डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।

Digital Privacy:स्मार्ट डिवाइसेज ने लोगों की जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ डेटा ट्रैकिंग और डिजिटल सर्विलांस का खतरा भी बढ़ गया है। स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट टीवी और Wi-Fi राउटर तक कई डिवाइसेज यूजर की गतिविधियों, लोकेशन और पसंद से जुड़ी जानकारी लगातार रिकॉर्ड करते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बिना जानकारी के दी गई ऐप परमिशन और कमजोर सिक्योरिटी सेटिंग्स प्राइवेसी के लिए बड़ा जोखिम बन सकती हैं।

स्मार्ट डिवाइसेज कैसे कर रहे हैं डेटा ट्रैक

आज ज्यादातर डिजिटल डिवाइसेज इंटरनेट से जुड़े रहते हैं और लगातार डेटा एक्सचेंज करते हैं। स्मार्टफोन में मौजूद कई एप्स बैकग्राउंड में यूजर की एक्टिविटी, लोकेशन और सर्च पैटर्न को ट्रैक करते हैं। विज्ञापन दिखाने और यूजर बिहेवियर समझने के लिए कंपनियां इन जानकारियों का इस्तेमाल करती हैं।

स्मार्ट टीवी भी अब केवल एंटरटेनमेंट डिवाइस नहीं रह गए हैं। कई टीवी मॉडल ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए यह रिकॉर्ड करते हैं कि यूजर क्या देख रहा है। कुछ डिवाइसेज में मौजूद माइक्रोफोन वॉयस कमांड के साथ आसपास की बातचीत भी सुन सकते हैं।

Wi-Fi राउटर और स्मार्ट स्पीकर्स से बढ़ी चिंता

स्मार्ट स्पीकर्स जैसे Amazon Alexa और Google Home लगातार वेक वर्ड सुनने के लिए एक्टिव रहते हैं। इसी वजह से यूजर्स के वॉयस डेटा को लेकर लंबे समय से प्राइवेसी बहस चल रही है।

हालिया रिसर्च में यह भी सामने आया है कि Wi-Fi राउटर की बीम-फॉर्मिंग तकनीक कमरे के अंदर मौजूद लोगों की गतिविधियों को पहचान सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में कनेक्टेड डिवाइसेज के जरिए निगरानी और डेटा कलेक्शन का दायरा और बढ़ सकता है।

कनेक्टेड कारें भी बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा कर रही हैं। सीट, इंजन और इंफोटेनमेंट सिस्टम में लगे सेंसर ड्राइविंग पैटर्न और लोकेशन जैसी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ कंपनियां इस डेटा को थर्ड पार्टी के साथ शेयर या बेच भी सकती हैं।

डिजिटल प्राइवेसी बचाने के लिए क्या करें

ऑनलाइन सुरक्षा बनाए रखने के लिए यूजर्स को डिवाइस सेटिंग्स और ऐप परमिशन पर खास ध्यान देना चाहिए। कुछ जरूरी सावधानियां इस तरह हैं:

  • ऐप्स को केवल जरूरी परमिशन ही दें
  • कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन को जरूरत पड़ने पर ही ऑन रखें
  • मजबूत पासवर्ड और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें
  • ब्लूटूथ और Wi-Fi ऑटो-कनेक्ट फीचर बंद रखें
  • डिवाइसेज और एप्स को नियमित रूप से अपडेट करते रहें

एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय प्राइवेसी सेटिंग्स को समझना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

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