धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) में मंगलवार को एक प्रसूता ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। दो बेटियों और एक बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल बन गया। अस्पताल में भी एक साथ तीन नवजातों के जन्म की खबर चर्चा का विषय रही। लेकिन परिवार की यह खुशी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। जन्म के कुछ ही समय बाद तीन नवजातों में से एक की मौत हो गई। एक साथ तीन बच्चों के आने की खुशी के बीच अचानक एक बच्चे की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया।
जानकारी के अनुसार कुसुंडा के खरिकाबाद बस्ती निवासी बबली कुमारी को प्रसव पीड़ा होने के बाद एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया था। बबली कुमारी का ससुराल मुकुंदा में बताया गया है और उनके पति का नाम उत्तम रवानी है। चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव कराया गया, जिसमें महिला ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। इनमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल था। स्वास्थ्य सहिया यशोदा देवी ने भी प्रसूता की देखभाल और अस्पताल में आवश्यक सहयोग किया।
एक साथ तीन बच्चों के जन्म की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया था। परिजनों के लिए यह पल बेहद खास था, क्योंकि एक साथ दो बेटियों और एक बेटे का जन्म हुआ था। अस्पताल में भी इस प्रसव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता बढ़ गई थी। डॉक्टरों ने तीनों नवजातों की स्थिति की जांच की और उन्हें विशेष निगरानी में रखा। ताजा जानकारी के मुताबिक तीनों बच्चे सामान्य से कुछ कमजोर थे, इसलिए चिकित्सकों ने उन्हें वार्मर पर रखने का फैसला किया था।
प्रसव के बाद नवजातों को सामान्य वार्ड में रखने के बजाय विशेष चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत महसूस हुई। तीनों बच्चों को एनआईसीयू में वार्मर पर रखा गया, जहां चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। एक साथ जन्म लेने वाले बच्चों में यदि जन्म के समय कमजोरी हो तो शुरुआती घंटों में विशेष निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। इसी को देखते हुए अस्पताल में बच्चों की लगातार देखभाल की जा रही थी।
इसी दौरान परिवार को वह दुखद खबर मिली, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था। तीनों नवजातों में से एक की मौत हो गई। कुछ समय पहले जिस परिवार में तीन बच्चों के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अचानक मातम छा गया। परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद भावुक और कठिन रही। एक तरफ दो नवजात बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चिंता थी तो दूसरी तरफ जन्म के तुरंत बाद एक बच्चे को खोने का दुख परिवार के सामने था।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने दोनों जीवित नवजातों की स्थिति को देखते हुए उनकी बेहतर चिकित्सा और निगरानी के लिए उन्हें रांची स्थित रिम्स रेफर करने का निर्णय लिया। ताजा रिपोर्ट के अनुसार दोनों बच्चों को बेहतर देखभाल के लिए रिम्स भेजा गया है। इस फैसले के पीछे नवजातों की कमजोरी और उन्हें आवश्यक स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई है।
वहीं प्रसूता बबली कुमारी की स्थिति सुरक्षित बताई गई है। प्रसव के बाद चिकित्सकों की ओर से उनकी भी निगरानी की गई। एक साथ तीन बच्चों के जन्म के बाद मां की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी था। अस्पताल की ओर से मां को लेकर किसी गंभीर परेशानी की जानकारी सामने नहीं आई है।
एक साथ तीन बच्चों का जन्म चिकित्सकीय दृष्टि से भी विशेष स्थिति माना जाता है। ऐसे मामलों में नवजातों को जन्म के बाद अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता हो सकती है, खासकर तब जब उनका वजन या स्वास्थ्य सामान्य से कमजोर हो। चिकित्सक जन्म के बाद बच्चों की सांस, तापमान, वजन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों पर नजर रखते हैं। SNMMCH में भी तीनों बच्चों को विशेष निगरानी में रखा गया था।
परिवार के लिए यह घटना भावनाओं के उतार-चढ़ाव से भरी रही। प्रसव से पहले परिवार में नए मेहमानों के आने की उम्मीद थी और प्रसव के बाद जब एक साथ तीन बच्चों के जन्म की जानकारी मिली तो खुशियां दोगुनी-तिगुनी हो गईं। लेकिन कुछ ही समय में एक नवजात की मौत ने इस खुशी को गहरे दुख में बदल दिया। अब परिवार की उम्मीदें रिम्स रेफर किए गए दोनों बच्चों के स्वस्थ होने पर टिकी हैं।
एसएनएमएमसीएच धनबाद में प्रसूता को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के बाद प्रसव कराया गया। अस्पताल की टीम ने प्रसव के बाद मां और बच्चों की स्थिति का आकलन किया। तीनों बच्चों को कमजोर पाए जाने पर उन्हें वार्मर पर रखा गया। यह कदम नवजातों को आवश्यक तापमान बनाए रखने और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया था।
इस घटना के बीच एक दूसरी रिपोर्ट में शुरुआत में तीनों नवजातों की स्थिति सामान्य बताए जाने की जानकारी सामने आई थी और उन्हें बाल चिकित्सा विभाग में निगरानी में रखने की बात कही गई थी। हालांकि बाद की ताजा जागरण रिपोर्ट में एक नवजात की मौत और दो बच्चों को रिम्स रेफर किए जाने की जानकारी दी गई है। इसलिए फिलहाल बच्चों की स्थिति के संबंध में बाद की जानकारी को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
धनबाद के एसएनएमएमसीएच में प्रसव और नवजातों की चिकित्सा से जुड़े मामलों में एनआईसीयू और बाल चिकित्सा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। खासकर ऐसे मामलों में जहां एक साथ कई बच्चों का जन्म होता है, प्रत्येक नवजात की अलग-अलग चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार शुरुआती उपचार के बाद आवश्यकता होने पर बच्चों को उच्च केंद्र पर रेफर किया जाता है।
इस मामले में भी चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को रांची रेफर किया है, ताकि उन्हें जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सा और निरंतर निगरानी मिल सके। परिवार के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता दोनों बच्चों का स्वास्थ्य है। एक नवजात को खोने के बाद परिजन बाकी दोनों बच्चों के सुरक्षित रहने की उम्मीद कर रहे हैं।
मां बबली कुमारी की स्थिति सुरक्षित होना परिवार के लिए राहत की बात है। प्रसव के बाद मां और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी की जाती है। चिकित्सकों की ओर से नवजातों की कमजोरी को देखते हुए जो कदम उठाए गए, उनमें एनआईसीयू में वार्मर पर रखना और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करना शामिल रहा।
कुल मिलाकर धनबाद के SNMMCH में एक साथ तीन बच्चों के जन्म ने परिवार में खुशियां ला दी थीं। दो बेटियों और एक बेटे के जन्म से परिजन बेहद खुश थे, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद एक नवजात की मौत से यह खुशी गहरे दुख में बदल गई। अस्पताल में कमजोर बताए गए दोनों अन्य नवजातों को बेहतर चिकित्सा निगरानी के लिए रिम्स रांची रेफर किया गया है, जबकि प्रसूता बबली कुमारी की स्थिति सुरक्षित बताई गई है। अब परिवार की उम्मीदें दोनों बच्चों के जल्द स्वस्थ होने पर टिकी हैं।











