भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन आज संसद में यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया। भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने सदन के अंदर ई-सिगरेट पी, जिससे संसद में जमकर हंगामा हुआ।
नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र अपने चरम पर है और इस बीच सदन में ई-सिगरेट को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद पर सदन में ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया। यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया और ई-सिगरेट फिर से सुर्खियों में आ गई।
भारत में ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध है। साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके निर्माण, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका इस्तेमाल करने पर भी सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी मई 2019 में केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें ई-सिगरेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को विस्तार से बताया गया।
ई-सिगरेट क्या है और कैसे काम करती है?
ई-सिगरेट एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटिन और अन्य रसायन युक्त लिक्विड भरा जाता है।
- इसमें लगी बैट्री लिक्विड को भाप में बदल देती है।
- भाप पीने वाला व्यक्ति इसे पारंपरिक सिगरेट पीने जैसा अनुभव मानता है।
- लिक्विड में कभी-कभी केवल निकोटिन होता है, लेकिन कई बार इससे भी अधिक खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं।
ई-सिगरेट को अक्सर धूम्रपान के विकल्प के रूप में लिया जाता है। हालांकि, रिसर्च में यह पाया गया है कि इसके सेवन से अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियां और लंग्स कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
भारत में बैन और वैश्विक दृष्टिकोण
भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित है, जबकि कई देशों ने इसके सेवन पर अलग-अलग नियम बनाए हैं:
- कुछ देशों में पूर्ण प्रतिबंध।
- कुछ में आंशिक प्रतिबंध।
- कुछ देशों में इसे कानूनी रूप से अनुमति दी गई है।
भारत में बैन के कारण इसका उत्पादन, बिक्री और आयात अवैध है। यह प्रतिबंध ई-हुक्का पर भी लागू होता है।
ई-सिगरेट पर कानूनी कार्रवाई और सजा
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भारत में ई-सिगरेट पर सख्त कानूनी प्रावधान हैं।
पहली बार उल्लंघन
- अधिकतम 1 लाख रुपये का जुर्माना
- या एक साल की कैद
- या दोनों
दूसरी बार उल्लंघन
- अधिकतम 5 लाख रुपये का जुर्माना
- या तीन साल की जेल
- या दोनों
यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि ई-सिगरेट का उपयोग न सिर्फ प्रतिबंधित रहे, बल्कि इसकी खतरनाक स्वास्थ्य प्रभावों से जनता को सुरक्षा मिले।










