विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) Sibi George ने संयुक्त राष्ट्र आतंक रोधी कार्यालय (United Nations Office of Counter-Terrorism) के कार्यवाहक अवर महासचिव Alexander Zouev से मुलाकात की।
संयुक्त राष्ट्र: वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर सराहना मिली है। संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी कार्यालय (UN Office of Counter-Terrorism – UNOCT) के वरिष्ठ अधिकारी एलेक्जेंडर जौएव ने भारत के आतंकवाद-रोधी प्रयासों की खुलकर प्रशंसा की है। यह बयान भारत के विदेश मंत्रालय के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान सामने आया।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एलेक्जेंडर जौएव, जो कि यूएनओसीटी के कार्यवाहक अवर महासचिव हैं, से मुलाकात की। इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने और भारत-यूएनओसीटी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर केंद्रित बातचीत
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवाद की बढ़ती वैश्विक चुनौतियों और उससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच चल रहे सहयोगी प्रयासों को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बैठक में आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए संयुक्त रणनीतियों और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा हुई।
संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-रोधी कार्यालय के कार्यवाहक प्रमुख एलेक्जेंडर जौएव ने बैठक के दौरान भारत के लंबे समय से चले आ रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार साझेदार के रूप में उभरा है। जौएव ने विशेष रूप से भारत की आतंकवाद-रोधी नीतियों, क्षमता निर्माण प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का अनुभव और दृष्टिकोण वैश्विक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में मददगार साबित हो रहा है।
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भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच बढ़ता सहयोग
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग का समर्थन करता रहा है और संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। हालिया बैठक में दोनों पक्षों ने इस सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में साइबर आतंकवाद, कट्टरपंथ, वित्तीय आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद जैसे आधुनिक खतरों पर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, सूचना साझा करने और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
इससे पहले, बुधवार को सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस से भी मुलाकात की थी। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार, वैश्विक शासन संरचना और भारत की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने लगातार यह रुख अपनाया है कि वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी, पारदर्शी और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
भारत की वैश्विक भूमिका पर बढ़ता भरोसा
विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत की आतंकवाद-रोधी भूमिका की सराहना इस बात का संकेत है कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे में भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। भारत न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नीति उसे वैश्विक मंचों पर एक महत्वपूर्ण आवाज बनाती है।
बैठक के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है। किसी भी देश द्वारा अकेले इस चुनौती का सामना करना पर्याप्त नहीं है।










