सोनम वांगचुक ने अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से की पानी पीने की अपील, भर्ती परीक्षा विवाद पर तेज हुआ आंदोलन

झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद के बीच अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ से सोनम वांगचुक ने पानी पीने की अपील। बातचीत के बाद महतो ने केवल पानी पिया

झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पानी पीने की अपील की। बातचीत के बाद महतो ने केवल पानी और नमक लेने का फैसला किया।

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन के केंद्र में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो हैं, जो अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और छात्रों की मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

इसी बीच, प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से महतो से बातचीत की और उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए कम से कम पानी पीने की अपील की। इस बातचीत के बाद महतो ने पानी पीने का निर्णय लिया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भोजन ग्रहण नहीं करेंगे।

वीडियो कॉल के दौरान स्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता

अनशन के तीसरे दिन देवेंद्र नाथ महतो की शारीरिक स्थिति कमजोर होने लगी थी। वीडियो कॉल के दौरान उन्होंने सोनम वांगचुक को बताया कि वे लंबे समय से आंदोलन का हिस्सा हैं और लगातार भूख हड़ताल के कारण बेहद थक चुके हैं।

महतो ने कहा कि वे 25 जुलाई से शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे हैं और 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चिकित्सकों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि यदि वे पानी नहीं पीते हैं तो उनकी हालत गंभीर हो सकती है और अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है।

सोनम वांगचुक ने कहा- पानी छोड़ना जीवन के लिए खतरा

बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने महतो से कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना होता है, लेकिन पानी छोड़ देना जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

उन्होंने आग्रह किया कि लंबे संघर्ष के लिए शरीर का स्वस्थ रहना जरूरी है और केवल भूख हड़ताल के साथ पानी भी छोड़ देना आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उचित निर्णय लेगी।

बातचीत के बाद बदला फैसला

वीडियो कॉल समाप्त होने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे अब पानी और नमक का सेवन करेंगे, लेकिन जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती, तब तक वे भोजन ग्रहण नहीं करेंगे।

उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

आंदोलन में अन्य छात्र भी शामिल

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, छात्र संगठनों के कई सदस्य भी भूख हड़ताल में शामिल हो चुके हैं। बताया गया कि दो महिला छात्रों सहित पांच अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी मांगों के समर्थन में अनशन शुरू किया है।

आंदोलनकारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच हो, कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। उनका मानना है कि इससे मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है।

इसी कारण छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक विरोध और स्वास्थ्य के बीच संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध नागरिकों का अधिकार है। हालांकि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, पानी की कमी से शरीर में डिहाइड्रेशन, रक्तचाप में गिरावट, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए लंबे अनशन के दौरान चिकित्सकीय निगरानी और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।

सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कदम नहीं उठाती। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से समाधान खोजते हैं, तो स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है।

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