जिसे गोद में उठाया, अब अंतिम बार देख रहा हूं सुल्तानगंज में छह बच्चों की डूबने से मौत; एक साथ उठीं अर्थियां, परिवारों में मचा कोहराम

भागलपुर के सुल्तानगंज में कर्मा-धर्मा पर्व पर स्नान के दौरान छह बच्चों की डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने शव निकाले, पोस्टमार्टम के बाद एक साथ अंतिम संस्कार हुआ।
जिसे गोद में उठाया, अब अंतिम बार देख रहा हूं सुल्तानगंज में छह बच्चों की डूबने से मौत; एक साथ उठीं अर्थियां, परिवारों में मचा कोहराम
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भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां एक पल में मातम में बदल दीं। कर्मा-धर्मा पर्व के मौके पर स्नान करने गए छह बच्चों की पानी में डूबने से मौत हो गई। हादसा भीरखुद पंचायत के तरेटा गांव के नारायणपुर क्षेत्र में स्थित पोखर और बाढ़ के पानी से भरे इलाके में हुआ। घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरातफरी मच गई। ग्रामीण और स्थानीय युवक पानी में उतरे और काफी मशक्कत के बाद सभी बच्चों को बाहर निकाला। उन्हें सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद सभी छह बच्चों को मृत घोषित कर दिया।

मृत बच्चों में तीन लड़के और तीन लड़कियां शामिल हैं। उनकी उम्र अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 10 से 15 वर्ष के बीच बताई गई है। मृतकों की पहचान पूजा कुमारी, राहुल कुमार, विकास कुमार, आयुष कुमार, मीनाक्षी कुमारी और ज्योति कुमारी के रूप में हुई है। इनमें राहुल कुमार और पूजा कुमारी सगे भाई-बहन बताए गए हैं। ज्योति कुमारी सबौर क्षेत्र के रजंदीपुर की रहने वाली थी और अपने ननिहाल आई हुई थी। बाकी बच्चे सुल्तानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 27 स्थित विष्णु टोला से जुड़े बताए गए हैं।

बताया गया कि सोमवार को कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर बच्चे स्नान करने के लिए घर से निकले थे। पर्व की तैयारी और पूजा से जुड़े अनुष्ठान के तहत बच्चे पानी में स्नान करने पहुंचे थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही देर बाद पानी में डूबने की खबर फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चे गहरे पानी की तरफ चले गए और देखते ही देखते हादसा हो गया। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग बच्चों को बचाने के लिए पानी में उतर गए।

स्थानीय लोगों ने बच्चों को खोजने के लिए काफी प्रयास किया। पानी की गहराई और बाढ़ के कारण बने हालात के बीच ग्रामीणों ने एक-एक कर बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को इलाज की उम्मीद में सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने सभी छह बच्चों की मौत की पुष्टि कर दी। अस्पताल पहुंचते ही परिवारों के लोग अपने बच्चों को देखने के लिए दौड़ पड़े। कुछ ही देर पहले तक जो बच्चे पर्व के लिए घर से निकले थे, उनके शव अस्पताल पहुंचने की खबर ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया।

हादसे की खबर फैलते ही तरेटा और विष्णु टोला समेत आसपास के इलाकों में मातमी सन्नाटा पसर गया। जिन घरों में कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर तैयारियां चल रही थीं, वहां अचानक रोने और चीखने की आवाजें सुनाई देने लगीं। परिवारों के लोग बार-बार बच्चों को याद कर रहे थे। किसी के घर का बेटा चला गया तो किसी की बेटी हमेशा के लिए परिवार से दूर हो गई। एक साथ छह बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।

सबसे मार्मिक स्थिति अस्पताल और बाद में घरों पर देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के शव घर पहुंचने पर कई परिजन उन्हें देखकर बेसुध हो गए। माता-पिता अपने बच्चों के शव से लिपटकर रोते रहे। परिवारों के लिए यह यकीन करना मुश्किल था कि जिन बच्चों को कुछ घंटे पहले तक उन्होंने पर्व के लिए घर से बाहर जाते देखा था, अब उन्हें अंतिम विदाई देनी पड़ेगी।

राहुल कुमार और पूजा कुमारी की मौत ने उनके परिवार को विशेष रूप से तोड़ दिया। दोनों सगे भाई-बहन थे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मां से छिपकर स्नान करने के लिए घर से निकले थे। परिवार को जब हादसे की जानकारी मिली तो घर में कोहराम मच गया। दोनों बच्चों के शव एक साथ घर पहुंचने के बाद माता-पिता की हालत बेहद खराब हो गई।

ज्योति कुमारी की कहानी भी परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रही। वह सबौर क्षेत्र के रजंदीपुर की रहने वाली थी और अपने ननिहाल आई हुई थी। पर्व के दौरान वह दूसरे बच्चों के साथ स्नान करने गई, लेकिन वापस जीवित नहीं लौट सकी। हादसे के बाद उसका शव उसके परिजन अपने गांव ले गए। बाकी मृत बच्चों के शवों को भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद उनके परिवारों को सौंपा गया।

पोस्टमार्टम के बाद जब बच्चों के शव गांव पहुंचे तो एक साथ कई अर्थियां उठीं। एक ही इलाके में एक साथ इतनी अर्थियां उठने का दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। जिन रास्तों पर पर्व के दौरान उत्सव और चहल-पहल होनी थी, उन्हीं रास्तों से बच्चों की अंतिम यात्रा निकली। स्थानीय लोगों ने बताया कि पूरे इलाके में ऐसा माहौल था जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था।

इस हादसे ने छह परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्चों के माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवारों की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद बच्चों को लेकर उनके सपने बड़े थे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि पर्व के दिन ही उन्हें अपने बच्चों की अंतिम यात्रा निकालनी पड़ेगी। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अंचल अधिकारी रमन कुमार, प्रभारी ईओ निशांत कुमार और थाना प्रभारी धनंजय कुमार समेत अन्य लोग घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने परिवारों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। अंचल अधिकारी ने बताया कि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित परिवारों को आपदा राहत के तहत निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा।

पुलिस के अनुसार, बच्चों की मौत पानी में डूबने से हुई है। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस और प्रशासन ने घटनास्थल की परिस्थितियों की जानकारी भी जुटाई। हादसा बाढ़ के पानी से भरे क्षेत्र में हुआ था, जहां पानी की गहराई का अनुमान बच्चों को नहीं रहा होगा। हालांकि हादसे की पूरी परिस्थितियों को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी की गई।

एक अन्य रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक बच्चे के गहरे पानी में जाने के बाद दूसरे बच्चे उसे बचाने के प्रयास में पानी में उतरे, जिसके बाद कई बच्चे डूब गए। हालांकि इस घटनाक्रम का विस्तृत क्रम अलग-अलग रिपोर्टों में पूरी तरह एक जैसा नहीं है। इतना स्पष्ट है कि सभी छह बच्चे स्नान के लिए पानी में गए थे और कुछ ही देर में वे गहरे पानी की चपेट में आ गए।

हादसे के बाद सबसे पहले स्थानीय ग्रामीण ही बचाव के लिए आगे आए। घटनास्थल पर किसी बड़े बचाव दल के पहुंचने से पहले गांव के लोगों ने पानी में उतरकर बच्चों की तलाश शुरू कर दी थी। स्थानीय युवकों ने काफी मेहनत के बाद सभी बच्चों को पानी से बाहर निकाला। इस प्रयास के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सक छहों को बचा नहीं सके।

कर्मा-धर्मा पर्व के कारण गांव में पहले से ही उत्सव का माहौल था। बच्चे भी इसी उत्साह में स्नान और पूजा से जुड़े अनुष्ठान के लिए निकले थे। लेकिन कुछ ही देर में पूरा माहौल बदल गया। जिन परिवारों में पर्व की तैयारी हो रही थी, वहां अचानक शोक की स्थिति बन गई। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चों की मौत की खबर फैलने के बाद पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई और हर कोई परिवारों को संभालने की कोशिश करता रहा।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना कई बार मुश्किल होता है। खेतों, पोखरों और निचले इलाकों में पानी जमा होने के कारण सामान्य रास्ते और जलाशय के बीच अंतर भी स्पष्ट नहीं रहता। ऐसे में बच्चों के लिए गहरे पानी का खतरा और बढ़ जाता है। तरेटा में हुआ यह हादसा भी इसी तरह के खतरे की ओर ध्यान खींचता है, हालांकि घटना की स्थानीय परिस्थितियां प्रशासनिक जांच और प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी।

इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की जल सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। खासकर बाढ़ या जलभराव के दौरान बच्चों को अकेले पानी के आसपास जाने से रोकना जरूरी है। पानी की सतह शांत दिखाई देने के बावजूद नीचे गहराई या तेज बहाव हो सकता है। तरेटा में छह बच्चों की एक साथ मौत ने इस खतरे को बेहद गंभीर तरीके से सामने रखा है।

परिवारों का दुख केवल बच्चों की मौत तक सीमित नहीं है। कई परिजनों के सामने अब आने वाले दिनों की जिंदगी का सवाल खड़ा हो गया है। बच्चों के साथ जुड़ी रोजमर्रा की यादें, उनकी पढ़ाई, उनकी छोटी-छोटी बातें और घर में उनकी मौजूदगी अचानक खत्म हो गई। माता-पिता के लिए यह स्वीकार करना बेहद कठिन है कि जिन बच्चों को उन्होंने बड़े होते देखा, उन्हें अब अंतिम विदाई देनी पड़ रही है।

हादसे के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन से पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता देने की मांग की है। नगर जदयू अध्यक्ष मनीष कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों को जल्द सहायता राशि देने की मांग की। सांसद प्रतिनिधि पवन केसान ने भी परिवारों के साथ खड़े रहने की बात कही और बताया कि सांसद के परिवारों से मिलने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन की ओर से आपदा राहत के तहत सहायता देने की बात कही गई है। इसके लिए परिवारों से संबंधित दस्तावेज और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मुआवजा राशि मिलने की प्रक्रिया प्रशासनिक नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। स्थानीय लोगों की मांग है कि इस घटना के बाद बाढ़ के पानी से भरे ऐसे स्थानों की पहचान की जाए और वहां बच्चों की पहुंच रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।

पुलिस ने घटना के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। हादसे को लेकर किसी आपराधिक साजिश या बाहरी कारण की जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह डूबने की घटना है। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल परिवारों को सहायता और राहत प्रक्रिया पूरी कराने की है।

तरेटा गांव में अब पर्व की खुशियों की जगह बच्चों की यादें रह गई हैं। छह परिवारों में एक साथ मातम पसरा है। जिन बच्चों की उम्र अभी पढ़ने, खेलने और सपने देखने की थी, उनकी जिंदगी अचानक खत्म हो गई। एक साथ कई बच्चों की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डाल दिया। परिवारों के लिए यह नुकसान ऐसा है जिसकी भरपाई किसी भी सहायता से संभव नहीं है।

सुल्तानगंज की यह घटना एक बार फिर बताती है कि बाढ़ के पानी और ग्रामीण जलाशयों के आसपास बच्चों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भी बच्चों को गहरे पानी से दूर रखना और किसी वयस्क की निगरानी में ही स्नान कराना जरूरी है। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती भी है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की पहचान कर लोगों को लगातार सावधान किया जाए।

फिलहाल तरेटा और विष्णु टोला में शोक का माहौल है। छह बच्चों के परिवार अपने-अपने बच्चों को अंतिम विदाई दे चुके हैं। एक परिवार ने बेटा खोया, दूसरे ने बेटी, जबकि राहुल और पूजा के परिवार ने एक साथ भाई-बहन को खो दिया। ज्योति अपने ननिहाल से पर्व के लिए आई थी और वहीं से उसकी अंतिम यात्रा निकली। इस हादसे ने पूरे इलाके को ऐसी पीड़ा दी है, जिसे लंबे समय तक भुला पाना मुश्किल होगा।

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