सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को न्यायिक कार्यवाही के दौरान हुई अभूतपूर्व घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने अदालत के समक्ष एक वादी द्वारा किए गए कथित अपमानजनक और अभद्र व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता के लिए गंभीर चुनौती हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक कार्यवाही के दौरान एक वादी के कथित अनुचित और अभद्र व्यवहार को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने कहा है कि अदालत की गरिमा, न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और कानून के शासन का सम्मान हर परिस्थिति में बनाए रखना जरूरी है। SCBA ने इस घटना की निंदा करते हुए केंद्र सरकार से अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर इसके प्रसार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि अदालत की कार्यवाही के वीडियो या उनके संपादित अंशों को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान हुई घटना पर SCBA की प्रतिक्रिया
SCBA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पक्षकार का व्यवहार न्यायिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। बार एसोसिएशन ने कहा कि अदालत कक्ष में किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा, धमकी, अनुशासनहीनता या कार्यवाही में बाधा डालने वाला व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे आचरण से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि कानून के शासन और संस्थागत सम्मान पर भी असर पड़ता है।
SCBA ने स्पष्ट किया कि न्यायालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि संविधान और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए अदालत के भीतर अनुशासन और सम्मान बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
न्यायपालिका की गरिमा सर्वोपरि: SCBA
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। अदालत में पेश होने वाले प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह वकील हो, पक्षकार हो या कोई अन्य व्यक्ति—से अपेक्षा की जाती है कि वह न्यायालय की गरिमा और प्रक्रिया का सम्मान करे। एसोसिएशन के अनुसार, न्यायिक कार्यवाही के दौरान अनुचित व्यवहार से निपटने के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधानों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
कोर्ट रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया को लेकर नई गाइडलाइन की मांग
इस घटना के बाद SCBA ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, क्लिपिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर विस्तृत नियम बनाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल युग में अदालतों की कार्यवाही से जुड़े वीडियो तेजी से ऑनलाइन फैलते हैं। कई बार छोटे हिस्सों या संपादित वीडियो को बिना पूरे संदर्भ के साझा किया जाता है, जिससे गलत धारणा बन सकती है।
SCBA ने सुझाव दिया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे, कोर्टरूम रिकॉर्डिंग के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम हों। वीडियो क्लिप के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। न्यायिक कार्यवाही को तोड़-मरोड़कर पेश करने पर रोक लगाई जा सके। न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास की रक्षा की जा सके।
केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग
SCBA ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह कानून के अनुसार ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए, जिनका उद्देश्य न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना या अदालतों के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करना हो। एसोसिएशन का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली भ्रामक या संदर्भ से हटाई गई सामग्री के कारण न्यायिक संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, SCBA ने यह भी स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके साथ अदालत की कार्यवाही की गरिमा और उचित संदर्भ बनाए रखना भी आवश्यक है।









