केंद्र सरकार ने गिग और असंगठित कामगारों के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन किया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया इसकी अध्यक्षता करेंगे। बोर्ड PF, बीमा और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर सुझाव देगा। हालांकि, अभी नए लाभ लागू नहीं किए गए हैं।
बिजनेस न्यूज़: Swiggy, Zomato, Uber और Ola जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों के लिए केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की दिशा में नया कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। यह बोर्ड असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करेगा। इसका उद्देश्य ऐसे कामगारों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है, जिन्हें नियमित नौकरी करने वाले कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
गिग वर्कर्स के लिए सरकार ने बनाया नया बोर्ड
देश में ऑनलाइन डिलीवरी, कैब सर्विस और ऐप आधारित दूसरी सेवाओं से लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। इनमें से बड़ी संख्या में कामगार नियमित कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में उन्हें भविष्य निधि, स्वास्थ्य बीमा और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं आसानी से नहीं मिल पातीं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया है। श्रम मंत्रालय ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी।
बोर्ड का गठन सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत किया गया है। यह कानून 21 नवंबर 2025 से लागू है। इसमें नौ पुराने सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एक व्यवस्था में शामिल किया गया है। नई अधिसूचना के मुताबिक, बोर्ड का कार्यकाल तीन साल होगा। यह असंगठित कामगारों के साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण से जुड़े मामलों पर काम करेगा।
बोर्ड में किन कंपनियों और संगठनों को मिली जगह?
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया करेंगे। श्रम मंत्रालय के सचिव इसके उपाध्यक्ष होंगे। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े मामलों के लिए बोर्ड में पांच बड़ी डिजिटल कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें Eternal Group, Swiggy, Zepto, Urban Company और Rapido के प्रतिनिधि शामिल हैं।
इसके अलावा पांच सदस्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का प्रतिनिधित्व करेंगे। इनमें ऐप आधारित परिवहन कर्मचारियों के संगठन और श्रमिक यूनियनों से जुड़े लोग हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), राज्य सरकारों और श्रम विशेषज्ञों को भी इस व्यवस्था में जगह दी गई है। इससे कंपनियों, कामगारों और सरकार के बीच सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध होगा।
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साल में कम से कम तीन बैठकें करेगा बोर्ड
श्रम मंत्रालय के अनुसार, नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की साल में कम से कम तीन बैठकें होंगी। इनमें कामगारों के लिए नई योजनाओं की जरूरत और मौजूदा सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी। बोर्ड केंद्र सरकार को बताएगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए किस तरह की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
इसके अलावा पहले से चल रही कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी, राज्यों में कामगारों के रिकॉर्ड की समीक्षा और सामाजिक सुरक्षा फंड के खर्च की जांच भी इसकी जिम्मेदारी होगी। हालांकि, बोर्ड खुद सभी योजनाओं को लागू नहीं करेगा। उसकी सिफारिशों के आधार पर सरकार आगे फैसले ले सकेगी।
क्या गिग वर्कर्स को अब PF और बीमा का फायदा मिलेगा?
नया बोर्ड बनने के बाद डिलीवरी का काम करने वालों और ऐप से कैब चलाने वाले ड्राइवरों के मन में सवाल है कि क्या अब उन्हें भी PF और बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल सरकार ने ऐसी कोई नई योजना शुरू नहीं की है। अभी केवल बोर्ड बनाने की अधिसूचना जारी हुई है। इसलिए बोर्ड बनने का मतलब यह नहीं है कि सभी गिग वर्कर्स को तुरंत PF या बीमा मिलने लगेगा।
हालांकि, सोशल सिक्योरिटी कोड में इन कामगारों के लिए कई सुविधाओं की व्यवस्था करने की बात कही गई है। इनमें दुर्घटना होने पर बीमा, इलाज में मदद, महिलाओं को मातृत्व लाभ, दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता और बुढ़ापे के लिए सुरक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं। इनका फायदा किसे मिलेगा, कितनी रकम मिलेगी और क्या शर्तें होंगी, यह सरकार के नियम जारी होने के बाद ही साफ होगा।








