GST New Rules 2026: जीएसटी के 8 नए सर्कुलर जारी, रजिस्ट्रेशन और रिफंड के नियमों में कारोबारियों को राहत

जीएसटी के 8 नए सर्कुलर जारी हुए हैं। अब रजिस्ट्रेशन, टैक्स नोटिस, इनपुट टैक्स क्रेडिट और एक्सपोर्ट रिफंड से जुड़े नियम स्पष्ट होंगे। जानें कारोबारियों को क्या

GST से जुड़े कामों में कारोबारियों को होने वाली परेशानी कम करने के लिए CBIC ने आठ नए सर्कुलर जारी किए हैं। इनमें GST रजिस्ट्रेशन, टैक्स नोटिस, अपील और रिफंड से जुड़े कई नियमों पर स्थिति साफ की गई है। कुछ दूसरे बदलाव 1 नवंबर से लागू होंगे।

GST New Rules 2026: जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना हो, टैक्स नोटिस का जवाब देना हो या फिर रिफंड लेना हो, इन कामों में कारोबारियों को कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी अतिरिक्त कागज मांग लिए जाते हैं तो कभी नोटिस में यह साफ नहीं होता कि गलती क्या है। ऐसी परेशानियों को देखते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 26 अक्टूबर 2026 को आठ सर्कुलर जारी किए हैं। इनमें छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, बैंकों, कार डीलरों और एक्सपोर्ट का काम करने वालों से जुड़े नियम समझाए गए हैं।

GST रजिस्ट्रेशन में अब नहीं मांग सकेंगे बेवजह कागजात

नया कारोबार शुरू करने वाले लोगों को GST रजिस्ट्रेशन कराने में कई बार दिक्कत आती है। आवेदन के समय अधिकारी अतिरिक्त कागजात मांग लेते हैं या किसी कमी के चलते फाइल अटक जाती है। इससे रजिस्ट्रेशन मिलने में देरी होती है। CBIC ने सर्कुलर नंबर 257/03/2026-GST में अधिकारियों को इस बारे में निर्देश दिए हैं। अब रजिस्ट्रेशन के लिए जो दस्तावेज तय हैं, उन्हीं के आधार पर आवेदन की जांच करनी होगी। बिना किसी ठोस वजह के कारोबारी से दूसरे कागजात नहीं मांगे जाने चाहिए।

अगर आवेदन में कोई जानकारी छूट गई है या दस्तावेज सही नहीं है, तो अधिकारी को बताना होगा कि कमी कहां है। इससे आवेदन करने वाला व्यक्ति उसे ठीक कर सकेगा। किराये की दुकान में कारोबार करने वालों, अपनी दुकान या ऑफिस रखने वालों और साझा ऑफिस से काम करने वालों के लिए भी कागजात से जुड़े नियम साफ किए गए हैं। SEZ में कारोबार करने वालों को किन दस्तावेजों की जरूरत होगी, इस पर भी जानकारी दी गई है।

टैक्स नोटिस में बताना होगा कि गलती क्या है

कई कारोबारियों की शिकायत रहती है कि उन्हें GST विभाग से नोटिस तो मिल जाता है, लेकिन उसमें पूरी बात समझ नहीं आती। किस लेन-देन पर सवाल उठाया गया है या कितना टैक्स बाकी बताया जा रहा है, इसकी जानकारी साफ नहीं होती। इसी परेशानी को लेकर CBIC ने सर्कुलर नंबर 258/04/2026-GST जारी किया है। इसके मुताबिक, अधिकारी सिर्फ कानून की धारा लिखकर नोटिस नहीं भेज सकते। उन्हें बताना होगा कि कारोबारी से क्या गलती हुई है और टैक्स की रकम किस हिसाब से निकाली गई है।

अगर किसी व्यापारी पर जानबूझकर टैक्स चोरी करने या गलत जानकारी देने का आरोप है, तो विभाग के पास उसका ठोस आधार होना चाहिए। कारोबारी नोटिस का जो जवाब देगा और अपने पक्ष में जो कागजात लगाएगा, अधिकारियों को उन पर भी गौर करना होगा। इसके बाद जो आदेश जारी होगा, उसमें फैसले की वजह बतानी होगी।

GST अपील में जमा पैसे कब वापस मिलेंगे?

GST New Rules 2026: जीएसटी के 8 नए सर्कुलर जारी, रजिस्ट्रेशन और रिफंड के नियमों में कारोबारियों को राहत

GST विभाग के किसी फैसले से कारोबारी सहमत नहीं है, तो वह उसके खिलाफ अपील कर सकता है। इसके लिए पहले तय रकम जमा करनी पड़ती है। इसे प्री-डिपॉजिट कहा जाता है। आम तौर पर पहली अपील में विवादित टैक्स का 10 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होता है। मामला अपीलीय ट्रिब्यूनल तक जाने पर अलग से अतिरिक्त रकम जमा करने का नियम है।

CBIC ने सर्कुलर नंबर 259/05/2026-GST में बताया है कि इस रकम की गणना कैसे होगी और अपील का फैसला आने के बाद रिफंड किस तरह लिया जा सकेगा। अगर अपील में फैसला कारोबारी के पक्ष में आता है, तो वह जमा पैसे वापस लेने के लिए आवेदन कर सकता है। सिर्फ इसलिए रिफंड नहीं रोका जा सकता कि टैक्स विभाग आगे अपील करने की सोच रहा है। 

हालांकि, अगर संबंधित आदेश पर अदालत या ट्रिब्यूनल ने रोक लगाई है, तो स्थिति अलग होगी। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी रकम अपील का फैसला आने के बाद भी वापस मिलने में अटकी रहती है।

ITC को लेकर बैंक और कार डीलरों को क्या राहत?

इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े नियमों पर भी CBIC ने स्थिति साफ की है। सर्कुलर नंबर 260 में इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (ISD) के जरिए अलग-अलग GST रजिस्ट्रेशन वाली इकाइयों के बीच टैक्स क्रेडिट बांटने की प्रक्रिया समझाई गई है। वहीं, सर्कुलर नंबर 261 में बैंकों और NBFC के लिए GST कानून की धारा 17(4) के तहत 50 प्रतिशत ITC वाले विकल्प पर निर्देश दिए गए हैं।

कार डीलरों के लिए भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण आया है। सर्कुलर नंबर 262 के तहत डीलर-एजेंसी मॉडल में काम करने वाले अधिकृत डीलरों की डेमो गाड़ियों पर ITC को लेकर पहले की पाबंदी वापस ली गई है। इससे पात्र डीलरों को निर्धारित शर्तों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में मदद मिल सकती है।

एक्सपोर्ट करने वालों के लिए भुगतान और रिफंड के नियम स्पष्ट

विदेशों में सामान या सेवाएं बेचने वाले कारोबारियों के लिए भी दो सर्कुलर जारी किए गए हैं। सर्कुलर नंबर 263 में निर्यात से मिलने वाले भुगतान को लेकर जानकारी दी गई है। अगर आयात के बकाये और निर्यात से मिलने वाली रकम का समायोजन RBI के नियमों के मुताबिक होता है, तो निर्धारित शर्तों पर उसे स्वीकार किया जा सकता है।

कुछ मान्य रुपये वाले बैंक खातों के जरिए सेवाओं के निर्यात का भुगतान मिलने पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अलावा, सर्कुलर नंबर 264 में GST के नियम 96(10) को हटाए जाने से जुड़े पुराने मामलों पर निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में इस नियम को हटाने का प्रभाव 23 अक्टूबर 2017 से माना गया है। इससे संबंधित लंबित रिफंड और टैक्स विवादों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

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