ताजमहल पर नहीं रुक रहा बंदरों का आतंक: ब्राजील के पर्यटक समेत 2 को काटा, दो महीने में विदेशी-बच्चों समेत कई पर हमला

आगरा के ताजमहल में बंदरों के हमले नहीं रुक रहे। विदेशी पर्यटकों और बच्चों समेत कई लोगों को काटा जा चुका है, अगस्त में 740 लोग बंदर काटने से अस्पताल पहुंचे।
ताजमहल पर नहीं रुक रहा बंदरों का आतंक: ब्राजील के पर्यटक समेत 2 को काटा, दो महीने में विदेशी-बच्चों समेत कई पर हमला
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आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बंदरों का बढ़ता आतंक लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ताजमहल परिसर में हाल के दिनों में बंदरों के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी घायल हुए हैं। ताजा घटनाओं के बीच पर्यटकों में डर का माहौल है और स्मारक परिसर में बंदरों को नियंत्रित करने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठ रही है। सितंबर में ही एक विदेशी महिला पर्यटक को रॉयल गेट के पास बंदर ने काट लिया था। इससे पहले जुलाई में दक्षिण कोरिया की महिला पर्यटक पर भी बंदर ने हमला किया था।

ताजा घटनाक्रम में ताजमहल घूमने पहुंचे पर्यटकों के साथ बंदरों के हमले की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक बंदरों के झुंड पर्यटकों के आसपास घूमते हैं और कई बार अचानक उन पर झपट पड़ते हैं। हालिया मामलों में विदेशी पर्यटकों को भी चोट लगी है। इससे ताजमहल जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर सुरक्षा और पर्यटक सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

16 सितंबर को ब्रिटेन से आए पर्यटकों के एक दल में शामिल महिला पर्यटक सुजैन एन बरेट को ताजमहल के रॉयल गेट के पास बंदर ने काट लिया था। बताया गया कि महिला अपने साथियों के साथ स्मारक देखने पहुंची थीं। अचानक बंदर के काटने के बाद वहां मौजूद दूसरे पर्यटकों में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सीआईएसएफ जवानों ने घायल महिला को ताजमहल परिसर की डिस्पेंसरी पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एंबुलेंस से निजी अस्पताल भेजा गया।

इससे पहले जुलाई में दक्षिण कोरिया से आई महिला पर्यटक किम मेह को भी ताजमहल परिसर में बंदर ने काट लिया था। रिपोर्ट के अनुसार वह अपने साथी के साथ सुबह ताजमहल पहुंची थीं और टिकट विंडो के पास इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान बंदर ने उनके दाहिने हाथ में काट लिया, जिससे खून निकलने लगा। पर्यटक को पहले ताजमहल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में अस्पताल भेजने की व्यवस्था की गई।

जुलाई की इस घटना में इलाज के लिए एंबुलेंस मिलने में भी देरी की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार एंबुलेंस चालक से संपर्क किए जाने के बावजूद करीब एक घंटे तक वाहन नहीं पहुंचा। इसके बाद पर्यटक को बैटरी कार के माध्यम से अस्पताल भेजा गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से एंबुलेंस चालक के समय पर नहीं पहुंचने को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

बंदरों के हमले की घटनाएं केवल विदेशी पर्यटकों तक सीमित नहीं हैं। हाल की रिपोर्टों में बच्चों और देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों के बंदर के काटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। 31 अगस्त को हरियाणा से ताजमहल देखने आए छह वर्षीय बच्चे अयांश को मेहमानखाना के पास बंदर ने हाथ में काट लिया था। इसके अलावा कर्नाटक से आए एक पर्यटक पर पश्चिमी गेट के पास बंदर के हमले की बात भी रिपोर्ट में सामने आई।

ताजमहल परिसर में बंदरों के हमलों का सिलसिला कई महीनों से चर्चा में है। जून में छत्तीसगढ़ की पर्यटक सावित्री बाई कश्यप को अमरूद टीला के पास बंदर द्वारा काटे जाने की जानकारी सामने आई थी। पश्चिम बंगाल से आई एक महिला पर्यटक पर भी बंदर के हमले की रिपोर्ट सामने आई थी। इन घटनाओं में पर्यटकों के हाथ में मौजूद खाने-पीने की चीजों को लेकर बंदरों के अचानक झपटने की बात भी सामने आई।

आगरा में बंदर और अन्य जानवरों के काटने की समस्या केवल ताजमहल परिसर तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने वाले मरीजों के आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। अगस्त में जानवरों के काटने के बाद 3,619 नए मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें 740 लोगों को बंदरों ने काटा था। इसी अवधि में 2,663 लोगों को आवारा कुत्तों और 273 लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा था।

जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त में आए 3,619 नए मरीजों में 3,152 लोगों को एक घाव मिला, जबकि 467 मरीजों में दो या उससे अधिक घाव पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक कई मरीजों के घाव शरीर के संवेदनशील हिस्सों, जैसे गर्दन और चेहरे पर भी थे। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और समय पर एंटी रैबीज उपचार की जरूरत होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जानवर के काटने के बाद घरेलू नुस्खे अपनाने से बचने की सलाह दी है। जिला अस्पताल के एंटी रैबीज नोडल अधिकारी के अनुसार काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए और इसके बाद चिकित्सक से संपर्क कर एंटी रैबीज वैक्सीन तथा जरूरत के अनुसार अन्य उपचार लेना चाहिए। घाव पर नमक-मिर्च या अन्य घरेलू पदार्थ लगाने से बचने की सलाह दी गई है।

ताजमहल में बंदरों की मौजूदगी लंबे समय से पर्यटकों के लिए चुनौती बनी हुई है। स्मारक परिसर में रोजाना देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में बंदरों के अचानक हमला करने की घटनाएं पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ आगरा के पर्यटन अनुभव को भी प्रभावित कर सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और विदेशी पर्यटकों के लिए ऐसी घटनाएं परेशानी का कारण बनती हैं।

पर्यटकों की ओर से बंदरों की संख्या नियंत्रित करने, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और पर्यटकों को स्पष्ट सुरक्षा निर्देश देने की मांग उठती रही है। ताजमहल के प्रवेश और परिसर में पर्यटकों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं और स्मारक का संचालन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संबंधित है। आधिकारिक ताजमहल वेबसाइट के अनुसार स्मारक पर विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए अलग टिकट कतारें हैं तथा प्रवेश के लिए निर्धारित गेटों से व्यवस्था संचालित होती है।

हालांकि बंदरों के हमले को रोकने के लिए केवल चेतावनी बोर्ड पर्याप्त नहीं माने जा सकते। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उन स्थानों की पहचान जरूरी है जहां बंदरों की गतिविधि अधिक रहती है। इसके साथ ही वहां प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की निगरानी, खाद्य पदार्थों के खुले प्रदर्शन पर नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर वन विभाग की सहायता जैसे उपायों पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

ताजमहल में लगातार सामने आ रही बंदर काटने की घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि विश्व धरोहर स्थल पर आने वाले लाखों पर्यटकों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटक सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह बेहतर किया जाए। हालिया घटनाओं में विदेशी पर्यटकों के घायल होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया है। जुलाई में दक्षिण कोरिया की पर्यटक और सितंबर में ब्रिटेन की पर्यटक के साथ हुई घटनाएं बताती हैं कि समस्या केवल स्थानीय आगंतुकों तक सीमित नहीं है।

फिलहाल पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे बंदरों के बेहद करीब न जाएं, उन्हें खाना न खिलाएं और उनके सामने खाने की चीजें लेकर न घूमें। यदि किसी व्यक्ति को बंदर काट ले या खरोंच दे तो तत्काल घाव को साबुन और बहते पानी से साफ कर चिकित्सा केंद्र में उपचार लेना चाहिए। आगरा जिला अस्पताल में जानवरों के काटने के मामलों के लिए एंटी रैबीज उपचार उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

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