तिरुवल्लूर अमोनिया गैस रिसाव हादसे के नौ दिन बाद असम के 60 से अधिक प्रवासी मजदूर विशेष व्यवस्था के तहत घर लौट गए। झारखंड के 41 श्रमिक अब भी राहत शिविर में हैं, जबकि कई घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
गुवाहाटी: तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में स्थित एक समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में हुए भीषण अमोनिया गैस रिसाव हादसे के बाद राहत एवं पुनर्वास का कार्य लगातार जारी है। हादसे के नौ दिन बाद सोमवार को प्रशासन ने असम के 60 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित उनके गृह राज्य रवाना किया। राज्य सरकार ने असम सरकार के साथ समन्वय कर विशेष यात्रा व्यवस्था की, ताकि प्रभावित श्रमिक सुरक्षित अपने परिवारों तक पहुंच सकें।
यह अमोनिया गैस रिसाव हाल के वर्षों में दक्षिण भारत के सबसे गंभीर औद्योगिक हादसों में गिना जा रहा है। इस दुर्घटना में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद से प्रभावित श्रमिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
असम के बाद ओडिशा के श्रमिक भी लौट चुके हैं
प्रशासन के अनुसार असम से पहले ओडिशा के 62 प्रवासी श्रमिकों को भी उनके गृह राज्य भेजा जा चुका है। यह राहत अभियान का दूसरा बड़ा चरण माना जा रहा है। दोनों राज्यों की सरकारों ने श्रमिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर विशेष व्यवस्था की।
प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता उन श्रमिकों को दी गई जो हादसे के बाद काम पर लौटने की स्थिति में नहीं थे या मानसिक रूप से अत्यधिक प्रभावित थे। अधिकारियों ने उन्हें भोजन, चिकित्सा सहायता और यात्रा सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं।
राहत शिविर में अब भी मौजूद हैं कई प्रवासी मजदूर
असम और ओडिशा के श्रमिकों की वापसी के बावजूद राहत शिविर अभी पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। वर्तमान में झारखंड के 41 प्रवासी श्रमिक सरकारी राहत शिविर में रह रहे हैं। वे रेलवे आरक्षण मिलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
झारखंड श्रम विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि रेलवे टिकटों की उपलब्धता में देरी के कारण पुनर्वास प्रक्रिया अपेक्षा से धीमी चल रही है। हालांकि प्रशासन लगातार रेलवे अधिकारियों के संपर्क में है और जल्द सभी श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजने की तैयारी कर रहा है।
कुछ श्रमिक इलाज करा रहे परिजनों के साथ रुके
सभी प्रभावित श्रमिक अपने गृह राज्यों की ओर नहीं लौटे हैं। कुछ लोगों ने तमिलनाडु में ही रुकने का निर्णय लिया है क्योंकि उनके परिजन अभी अस्पताल में भर्ती हैं। प्रशासन के अनुसार कई परिवार अपने घायल सदस्यों के स्वस्थ होने तक राज्य छोड़ना नहीं चाहते। अधिकारियों ने ऐसे परिवारों को अस्थायी आवास, भोजन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

अस्पताल में अब भी जारी है घायलों का इलाज
हादसे में घायल कई श्रमिकों का इलाज अभी भी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक केरल के तीन और पश्चिम बंगाल के तीन श्रमिक पेरियापालयम स्थित एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश मरीजों की हालत पहले से बेहतर है, लेकिन अमोनिया गैस के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए कुछ मरीजों को लगातार निगरानी में रखा गया है।
आखिर क्या हुआ था तिरुवल्लुर में?
यह हादसा तिरुवल्लुर जिले की सेंट पीटर एंड पॉल सी फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार फैक्ट्री में अमोनिया गैस का रिसाव होने से बड़ी संख्या में कर्मचारी जहरीली गैस की चपेट में आ गए।
अमोनिया का उपयोग समुद्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में शीतलन प्रणाली के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। हालांकि यह गैस अत्यधिक जहरीली होती है और अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने से सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, फेफड़ों को नुकसान तथा गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है। हादसे के समय फैक्ट्री में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक काम कर रहे थे, जिनमें असम, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और केरल के कर्मचारी शामिल थे।
न्याय की मांग को लेकर बढ़ा राजनीतिक दबाव
इस औद्योगिक दुर्घटना के बाद राजनीतिक दलों और श्रमिक संगठनों ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन आयोजित किए। प्रदर्शनकारियों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और घायल श्रमिकों के लिए दीर्घकालिक सहायता की मांग की।
सीपीआई नेताओं का कहना है कि यदि औद्योगिक सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। उन्होंने राज्य सरकार से सभी रासायनिक और औद्योगिक इकाइयों की व्यापक सुरक्षा जांच कराने की भी मांग की।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने भारत में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रमिक रासायनिक, निर्माण और विनिर्माण उद्योगों में कार्यरत हैं। इनमें से कई उद्योगों में सुरक्षा प्रशिक्षण, आपातकालीन निकासी योजना और स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक फैक्ट्री में नियमित सुरक्षा ऑडिट, गैस रिसाव चेतावनी प्रणाली, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए। इससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकार और प्रशासन की अगली चुनौती
तमिलनाडु प्रशासन फिलहाल दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर प्रभावित श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि देश में औद्योगिक सुरक्षा ढांचे की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता की भी याद दिलाता है। यदि भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत नहीं किया गया तो ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहेगा।










