ईरान ने अमेरिका से मांग की है कि वह IRGC और ईरानी प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की गारंटी दे। ईरान ने कहा कि बिना इस भरोसे के वह 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने पर विचार नहीं करेगा।
तेहरान: फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक नया विवाद सामने आया है। ईरान फुटबॉल फेडरेशन के प्रमुख मेहदी ताज ने स्पष्ट कहा है कि यदि अमेरिका ईरान की सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खिलाफ “अपमानजनक व्यवहार” न करने की गारंटी नहीं देता, तो ईरान की राष्ट्रीय टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पर पुनर्विचार कर सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका की भूमिका भी क्षेत्रीय राजनीति में अहम बनी हुई है।
अमेरिका में होगा वर्ल्ड कप का बड़ा हिस्सा
फीफा वर्ल्ड कप 2026 पहली बार तीन देशों—अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको—की संयुक्त मेजबानी में आयोजित किया जाएगा। हालांकि टूर्नामेंट के अधिकांश बड़े मुकाबले अमेरिका में होने हैं।
इसी कारण ईरान की टीम, अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ को अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा, सुरक्षा जांच और राजनीतिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। यही बात अब विवाद का मुख्य कारण बन रही है।
IRGC को लेकर अमेरिका और ईरान में टकराव
अमेरिका लंबे समय से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को एक आतंकवादी संगठन मानता है। दूसरी ओर ईरान IRGC को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता है।
- मेहदी ताज, जो पहले IRGC से जुड़े रह चुके हैं, ने कहा कि ईरान को आशंका है कि:
- खिलाड़ियों या अधिकारियों के साथ सख्त व्यवहार हो सकता है
- ईरानी प्रतिनिधियों का सार्वजनिक अपमान किया जा सकता है
- और राजनीतिक कारणों से टीम को निशाना बनाया जा सकता है
उन्होंने कहा कि ईरान केवल तभी भागीदारी सुनिश्चित करेगा जब अमेरिका स्पष्ट रूप से सम्मानजनक व्यवहार की गारंटी देगा।
![]()
खेल और राजनीति का बढ़ता टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति से भी जुड़ा हुआ है।
- पिछले कुछ वर्षों में:
- रूस-यूक्रेन युद्ध
- कतर वर्ल्ड कप के दौरान मानवाधिकार विवाद
- और अब ईरान-अमेरिका तनाव
ने यह दिखाया है कि वैश्विक खेल आयोजनों पर राजनीतिक माहौल का गहरा असर पड़ता है।
फुटबॉल जैसे बड़े मंच पर देशों की राजनीतिक छवि और कूटनीतिक संबंध भी अहम भूमिका निभाने लगे हैं।
ईरान को किस बात का डर?
ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका में:
- कड़ी सुरक्षा जांच
- राजनीतिक विरोध प्रदर्शन
- मीडिया आलोचना
- और संभावित कानूनी प्रतिबंध
- ईरानी टीम और अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या प्रतिनिधि का IRGC से संबंध पाया जाता है, तो वीजा प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है।
फीफा पर भी बढ़ सकता है दबाव
यह विवाद फीफा के लिए भी चुनौती बन सकता है। फीफा हमेशा खेल को राजनीति से अलग रखने की बात करता रहा है, लेकिन वास्तविकता में बड़े टूर्नामेंट अक्सर भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित होते रहे हैं।
यदि ईरान आधिकारिक तौर पर कोई शर्त रखता है, तो फीफा और आयोजक देशों को:
- सुरक्षा
- कूटनीतिक व्यवहार
- और खिलाड़ियों के अधिकारों
- पर स्पष्ट नीति बनानी पड़ सकती है।
- इजराइल-ईरान तनाव भी बना बड़ा कारण
यह बयान ऐसे समय आया है जब इजराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में सामने आया कि अधिकांश इजराइली नागरिक अभी ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं।
सर्वे में क्या सामने आया?
- इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के सर्वे के अनुसार:
- लगभग 59% इजराइली मानते हैं कि अभी युद्ध रोकना सुरक्षा हित में नहीं है
- यहूदी समुदाय में दो-तिहाई लोग संघर्ष जारी रखने के पक्ष में हैं
- जबकि अरब नागरिकों की राय अपेक्षाकृत विभाजित रही
यह सर्वे दर्शाता है कि क्षेत्र में अस्थिरता और अविश्वास अभी भी काफी गहरा है।
अमेरिका की भूमिका पर बढ़ती चिंता
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। लगभग 51% इजराइलियों का मानना है कि उनके देश के रक्षा निर्णयों पर उनकी सरकार से ज्यादा प्रभाव अमेरिका का होता है।
यह आंकड़ा अक्टूबर 2025 में 44% था, यानी अब अमेरिकी प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की मध्य पूर्व नीति अब सीधे तौर पर क्षेत्रीय खेल, सुरक्षा और कूटनीति को प्रभावित कर रही है।
क्या वर्ल्ड कप पर असर पड़ सकता है?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान वास्तव में वर्ल्ड कप से हटने पर विचार करेगा या यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है। लेकिन यदि विवाद बढ़ता है, तो:
- खिलाड़ियों की यात्रा प्रभावित हो सकती है
- सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी हो सकती है
- और फीफा पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है
- विशेषज्ञों का मानना है कि खेल आयोजनों को वैश्विक राजनीति से पूरी तरह अलग रखना अब पहले से कहीं अधिक मुश्किल होता जा रहा है।
खेल कूटनीति का नया दौर
इतिहास में कई बार खेल आयोजनों का इस्तेमाल कूटनीतिक संवाद या विरोध के मंच के रूप में हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच भी खेल संबंध अक्सर राजनीतिक तनाव से प्रभावित रहे हैं।
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 अब केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति की परीक्षा भी बनता दिखाई दे रहा है।








