तेलंगाना में मतदाता सूची के SIR को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस नेताओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि लापरवाही से 21 प्रतिशत वोट प्रभावित होने का खतरा है। जिला प्रभारी मंत्रियों को तत्काल समीक्षा बैठकें करने के निर्देश दिए गए।
हैदराबाद: तेलंगाना में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस के भीतर चिंता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पार्टी संगठन की तैयारियों और जमीनी स्तर पर चल रहे अभियान को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार के काम को गंभीरता से नहीं लिया, तो बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार रात तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की आपात बैठक में पार्टी नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने दावा किया कि लापरवाही के कारण राज्य में करीब 21 प्रतिशत वोट प्रभावित होने या मतदाता सूची से हटने का जोखिम है। उन्होंने जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक पार्टी संगठन की सक्रियता बढ़ाने और प्रत्येक क्षेत्र में मतदाताओं से जुड़े मामलों की निगरानी करने पर जोर दिया।
SIR को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक
तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर TPCC की यह आपात बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
बैठक का मुख्य मुद्दा SIR के दौरान मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया रहा। मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं से कहा कि चुनावी सूची में किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटना नहीं चाहिए। उन्होंने संगठन के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां तय करने और प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने की जरूरत बताई।
रेवंत रेड्डी ने खास तौर पर इस बात पर नाराजगी जताई कि जिला प्रभारी मंत्रियों से लेकर विधानसभा क्षेत्र, मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
21 फीसदी वोट प्रभावित होने की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि यदि मौजूदा स्थिति को तुरंत नहीं सुधारा गया तो लगभग 21 प्रतिशत वोट प्रभावित होने का खतरा है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री द्वारा पार्टी की आंतरिक समीक्षा के संदर्भ में सामने रखा गया है। उन्होंने इसे कांग्रेस संगठन के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में पेश किया।
मतदाता सूची में नाम शामिल होना चुनावी अधिकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटने या विवरण में गलती होने पर वह चुनाव में मतदान करने से वंचित हो सकता है। इसी वजह से SIR जैसी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दल भी अपने स्तर पर मतदाता सूची की निगरानी करते हैं।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने-अपने बूथ क्षेत्रों में सक्रिय रहकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सही तरीके से दर्ज रहें।
जिला प्रभारी मंत्रियों को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से जिला प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाने के निर्देश दिए। उन्हें वहां आपात समीक्षा बैठकें आयोजित करने और संबंधित संसदीय तथा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों के साथ समन्वय करने को कहा गया।
इसका उद्देश्य SIR से जुड़े काम की जमीनी स्थिति का आकलन करना और जहां कमियां हैं, उन्हें तेजी से दूर करना है। मुख्यमंत्री ने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की जरूरत बताई।
जिला प्रभारी मंत्रियों को केवल प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा करने के बजाय पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद करने को कहा गया है। इससे मतदाता सूची से जुड़े मामलों की पहचान और उनके समाधान में तेजी लाने की कोशिश की जाएगी।

बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे स्थानीय मतदाताओं और उनके क्षेत्रों से सीधे जुड़े होते हैं। किसी परिवार के पते में बदलाव, स्थानांतरण, मृत्यु, नए मतदाता के नाम जुड़ने या किसी अन्य त्रुटि की जानकारी स्थानीय स्तर पर जल्दी मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने पार्टी के बूथ स्तर के नेटवर्क को अधिक सक्रिय करने पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि केवल वरिष्ठ नेताओं की बैठकें पर्याप्त नहीं होंगी और वास्तविक सुधार तभी संभव होगा जब संगठन के निचले स्तर तक जिम्मेदारी तय की जाए। कांग्रेस के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव का असर भविष्य के चुनावों में पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में समीक्षा की तैयारी
आपात बैठक के दौरान संसदीय और विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। जिला स्तर पर होने वाली बैठकों में SIR से जुड़े मुद्दों की पहचान, मतदाता सूची में संभावित नाम कटने के मामलों और सत्यापन की स्थिति की समीक्षा किए जाने की संभावना है।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में बूथवार स्थिति तैयार की जाए। इसके जरिए उन इलाकों की पहचान की जा सकेगी जहां मतदाता सूची में बड़ी संख्या में बदलाव या संभावित नाम हटने की आशंका है।
यह प्रक्रिया कांग्रेस को चुनावी स्तर पर अपने संगठन की वास्तविक स्थिति समझने में भी मदद कर सकती है।
राजनीतिक दलों के लिए मतदाता सूची बनी अहम चुनौती
भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने के दौरान नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और विवरण में सुधार की प्रक्रिया चलती है।
राजनीतिक दल ऐसे अभियानों पर करीबी नजर रखते हैं, क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव का सीधा संबंध चुनावी भागीदारी से होता है। हालांकि, किसी नाम को हटाने या शामिल करने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत होती है।
तेलंगाना में SIR को लेकर कांग्रेस की सक्रियता इसी व्यापक चुनावी और संगठनात्मक संदर्भ में देखी जा रही है।
रेवंत रेड्डी ने संगठन को दिया स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं को संदेश दिया कि SIR जैसे महत्वपूर्ण अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रभारी मंत्रियों और स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों को तुरंत सक्रिय होने को कहा।
रेवंत रेड्डी की नाराजगी को कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी तैयारियों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि पार्टी का नेटवर्क केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि मतदाताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी लगातार सक्रिय रहे।
बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद अब जिला स्तर पर समीक्षा बैठकों और बूथवार गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
मतदाता अधिकारों पर बढ़ेगी निगरानी
SIR को लेकर कांग्रेस का अभियान आगे बढ़ने के साथ मतदाता अधिकारों और सूची में नामों की स्थिति पर निगरानी बढ़ सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं से पात्र मतदाताओं को सूची में अपने नाम और विवरण की स्थिति जांचने के लिए जागरूक करने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री की ओर से 21 प्रतिशत वोट प्रभावित होने की चेतावनी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, अंतिम रूप से कितने मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं, यह संबंधित पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने और आधिकारिक मतदाता सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने अपने संगठन को सक्रिय करने की रणनीति अपनाई है। जिला प्रभारी मंत्रियों को मैदान में उतरने के निर्देश और संसदीय तथा विधानसभा क्षेत्र प्रभारियों के साथ तत्काल समीक्षा बैठकों की योजना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
आने वाले दिनों में तेलंगाना में SIR को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि वह बूथ स्तर पर अपने संगठन को कितना प्रभावी ढंग से सक्रिय कर पाती है और मतदाता सूची में संभावित त्रुटियों या नामों के छूटने के मामलों को समय रहते सामने ला पाती है।










