झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर कमीशन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। ED ने उन्हें 2024 में गिरफ्तार किया था। करीब दो साल बाद अब वह जेल से बाहर आएंगे।
रांची: भारत के झारखंड राज्य में चर्चित टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री Alamgir Alam को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लगभग दो साल जेल में बिताने के बाद अब वह बाहर आ सकेंगे। भारत के Supreme Court of India ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी है।
यह फैसला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया। इससे पहले आलमगीर आलम की जमानत याचिका Jharkhand High Court द्वारा जुलाई 2025 में खारिज कर दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
2024 में हुई थी गिरफ्तारी
आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को Enforcement Directorate (ED) ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उनसे दो दिनों तक करीब 14 घंटे पूछताछ की गई थी।
ईडी ने आरोप लगाया था कि झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लेने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें अधिकारी, इंजीनियर और राजनीतिक पदाधिकारी शामिल थे।
जांच एजेंसी ने अदालत में दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि जनवरी 2024 में जारी 92 करोड़ रुपये के 25 टेंडरों में कथित तौर पर कमीशन लिया गया। ईडी के अनुसार इन टेंडरों से संबंधित लगभग 1.23 करोड़ रुपये का कथित कमीशन आलमगीर आलम तक पहुंचा।
कैश बरामदगी ने बढ़ाई थी जांच की गंभीरता
इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर उस समय सुर्खियां बटोरी थीं जब मई 2024 में ईडी ने आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी।
जांच के दौरान करीब 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। यह रकम विभिन्न परिसरों से मिली थी और बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के कारण मामला और गंभीर हो गया था।
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छापेमारी के बाद आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव कुमार लाल और उनके घरेलू सहायक जहांगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों से लंबी पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी से खुला मामला
टेंडर कमीशन घोटाले की जांच की शुरुआत ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता Virendra Ram की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई थी।
ईडी ने फरवरी 2023 में वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं में भारी अनियमितताएं कीं और कथित तौर पर रिश्वत और कमीशन का नेटवर्क विकसित किया।
इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और कई वरिष्ठ अधिकारियों तथा राजनीतिक नेताओं के नाम सामने आने लगे।
पूर्व IAS अधिकारी से भी हुई पूछताछ
मामले में झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Manish Ranjan से भी पूछताछ की गई थी।
उन्हें मई 2024 में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में बुलाकर लंबी पूछताछ की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही थीं कि कथित कमीशन नेटवर्क कैसे संचालित किया जा रहा था और सरकारी टेंडरों में किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं।
आलमगीर आलम का राजनीतिक सफर
आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह Pakur विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं।
गिरफ्तारी के समय वह झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस गठबंधन सरकार में संसदीय कार्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वह 2006 से 2009 तक झारखंड विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय स्तर की राजनीति से की थी और सरपंच चुनाव जीतकर सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था। वर्ष 2000 में वह पहली बार विधायक बने।
राजनीतिक और कानूनी असर जारी
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इस मामले को भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाता है।
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की सुनवाई और जांच आगे भी जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में सरकारी टेंडर प्रक्रियाओं, भ्रष्टाचार नियंत्रण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।









