अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने उनके दबाव में 800 कैदियों की फांसी रोकी। ईरान ने इसे पूरी तरह झूठा बताया। न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया और अमेरिकी दावे को खारिज कर दिया।
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि अमेरिका के डर और उनके हस्तक्षेप के कारण ईरान ने 800 से अधिक लोगों की फांसी टाल दी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर यह कदम नहीं उठाया गया होता, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार लोगों की फांसी हो सकती थी। इस बयान के बाद ईरान ने इसे पूरी तरह से झूठा करार दिया।
ईरान के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मुवाहेदी ने कहा कि न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप के दावे में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी कोई संख्या मौजूद ही नहीं है। ईरानी समाचार एजेंसी मिज़ान ने मुवाहेदी के हवाले से बताया कि न्यायपालिका की ओर से इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
क्या थी ट्रंप की मंशा?
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान में सामूहिक फांसी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या अमेरिकी लाल रेखाएं हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई की होती, तो यह बड़ी मानवाधिकार संकट की स्थिति को टाल सकता था। ट्रंप के इस बयान ने ईरान के साथ पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य दबाव और राजनीतिक संदेश देने का एक तरीका था। उन्होंने कहा कि यह बयान अमेरिकी आर्मडा की गतिविधियों को लेकर चेतावनी भी थी।
अमेरिकी आर्मडा मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह यानी आर्मडा मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इसे एक स्पष्ट संदेश माना, जो ईरान को चेतावनी देने और सैन्य विकल्प तैयार रखने का संकेत देता है। हालांकि, अब तक अमेरिका ने तेहरान पर कोई सीधे हमले की कार्रवाई नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य जमावड़े से ट्रंप को विकल्प मिलता है कि यदि जरूरत हुई, तो वे सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। इसके साथ ही यह कदम राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन
ईरान में पिछले कई हफ्तों से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में लगभग 5,000 से अधिक मौतों की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें लगातार हो रही हैं।
इस बीच ट्रंप के बयान ने विवाद और बढ़ा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण बड़े मानवाधिकार संकट को टाला गया, जबकि ईरान ने इसे पूरी तरह झूठा बताया।
ईरान का स्पष्ट खंडन
ईरानी न्यायपालिका ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने 800 कैदियों की फांसी रोकने या किसी भी तरह की सामूहिक फांसी रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया है। मुवाहेदी ने कहा कि ट्रंप का दावा वास्तविकता से पूरी तरह अलग है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बावजूद न्यायपालिका ने किसी प्रकार की सामूहिक फांसी की कार्रवाई नहीं की।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि हालांकि कुछ गिरफ्तार लोगों पर मौत की सजा के आरोप हैं, लेकिन ट्रंप के बयान में कही गई संख्या और हस्तक्षेप की बात पूरी तरह गलत है।











